तीन महीने में जांच का आदेश, उच्चस्तरीय समिति बनेगी
मुंबई : चर्च मिशनरी की जमीनों की तीन महीने में जांच और आदिवासियों को स्वतंत्र सातबारा देने की दो बड़ी घोषणाएं विधानसभा में की गईं। राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले (Chandrashekhar Bawankule) ने कहा कि चर्च मिशनरी की जमीनों की जांच के लिए उच्चस्तरीय समिति बनाई जाएगी। वहीं, वनाधिकार कानून के तहत जमीन पाने वाले आदिवासी परिवारों को नया नमूना 7E और 12E जारी किया जाएगा।
चर्च मिशनरी की जमीनों की होगी जांच
मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले (Chandrashekhar Bawankule) ने कहा कि ब्रिटिश काल में चर्च मिशनरी संस्थाओं को मिली और बाद में संदिग्ध तरीके से हस्तांतरित हुई जमीनों की पूरे महाराष्ट्र में जांच होगी। यह जांच तीन महीने में पूरी कर रिपोर्ट तैयार की जाएगी।
नाशिक के 5 हजार परिवारों को राहत
विधानसभा में विधायक देवयानी फरांदे (Devyani Farande) ने नाशिक डायोसीसन ट्रस्ट (Nashik Diocesan Trust) से जुड़े मामले को उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि मूल ट्रस्टियों के निधन के बाद दस्तावेजों में फेरबदल कर एक निजी कंपनी को अधिकार दिए गए। इसके बाद स्थानीय लोगों से संपत्ति के लेन-देन और निर्माण के लिए लाखों रुपये लेकर एनओसी देने की बात कही गई। मंत्री ने कहा कि इस मामले के समाधान के लिए विभागीय आयुक्त की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय समिति बनाई जाएगी।
समिति में कौन-कौन होगा?
समिति में विभागीय आयुक्त, जमाबंदी आयुक्त कार्यालय के प्रतिनिधि, पंजीकरण विभाग (IGR) के अधिकारी और पुलिस विभाग के अधिकारी शामिल होंगे। समिति पूरे मामले की जांच कर सरकार को रिपोर्ट देगी।
कानूनी कार्रवाई भी होगी
सरकार जमीनों के मूल उद्देश्य की जांच करेगी। जरूरत पड़ने पर उन्हें सरकारी नियंत्रण में लाने की कानूनी संभावना भी देखी जाएगी। निजी कंपनी के कामकाज की पुलिस जांच कराई जाएगी। उच्च न्यायालय में सरकार की ओर से विशेष सरकारी वकील भी नियुक्त किए जाएंगे।
आदिवासियों को मिलेगा अपना सातबारा
2 लाख से अधिक परिवारों को लाभ
राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले (Chandrashekhar Bawankule) ने घोषणा की कि वनाधिकार कानून के तहत जमीन पाने वाले आदिवासी और पारंपरिक वनवासी परिवारों के लिए अब नमूना 7E और 12E लागू किया जाएगा। इससे राज्य के 2 लाख से अधिक परिवारों को लाभ मिलेगा।
बैंक ऋण और योजनाएं होंगी आसान
अब तक वनपट्टाधारकों का नाम सातबारा में केवल “अन्य अधिकार” के रूप में दर्ज होता था। नई व्यवस्था में 7E पर लाभार्थी का नाम और 12E में फसल का विवरण दर्ज होगा। इससे बैंक ऋण, किसान आईडी, सरकारी योजनाओं का लाभ और प्राकृतिक आपदा में मुआवजा प्राप्त करना आसान होगा।
सर्वे के बाद होगी प्रविष्टि
राजस्व मंत्री ने बताया कि भूमि अभिलेख विभाग वन क्षेत्रों का विशेष सर्वे करेगा। सर्वे पूरा होने के बाद संबंधित जमीन की आधिकारिक प्रविष्टि 7E और 12E में की जाएगी।
विपक्ष ने किया स्वागत
विपक्ष के नेता विजय वडेट्टीवार (Vijay Wadettiwar) और कांग्रेस नेता नाना पटोले (Nana Patole) ने इस निर्णय का स्वागत किया। सरकार ने ग्राम वनाधिकार समितियों के पुनर्गठन पर भी सकारात्मक विचार करने का आश्वासन दिया।

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