मानसून सत्र में महिला किसानों को कानूनी दर्जा देने सहित 10 विधेयक होंगे पेश
मुंबई : महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के 56 लाख किसानों के लिए 36,585 करोड़ रुपए की कर्ज माफी की घोषणा की है, जिसे राज्य के इतिहास की अब तक की सबसे बड़ी ऋणमाफी बताया जा रहा है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि यह फैसला राजनीतिक नहीं, बल्कि संकटग्रस्त किसानों को राहत देने के उद्देश्य से लिया गया है। उन्होंने बताया कि सोमवार से शुरू हो रहे विधानमंडल के मानसून सत्र में महिला किसानों को कानूनी रूप से किसान का दर्जा देने वाला महत्वपूर्ण विधेयक भी पेश किया जाएगा।
कर्ज माफी से किसानों को मिलेगी नई शुरुआत
मुख्यमंत्री ने कहा कि ऋणमाफी कोई स्थायी समाधान नहीं है, लेकिन इससे किसानों को आर्थिक राहत मिलेगी और वे दोबारा बैंक ऋण लेने के योग्य बन सकेंगे। उन्होंने बताया कि विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों के आधार पर योजना तैयार की गई है और इसे अंतिम रूप देने के लिए मुख्यमंत्री तथा दोनों उप मुख्यमंत्रियों की उपसमिति गठित की गई है।
बारिश की स्थिति देखते हुए जल्दबाजी में बुवाई न करें
फडणवीस ने बताया कि इस वर्ष राज्य में सामान्य से करीब 80 प्रतिशत कम वर्षा हुई है। मौसम विभाग के अनुसार 23 जून से कोंकण में बारिश बढ़ने की संभावना है, जबकि विदर्भ और मराठवाड़ा में जुलाई के पहले सप्ताह तक पर्याप्त वर्षा की संभावना कम है। उन्होंने किसानों से कम से कम 100 मिमी वर्षा होने के बाद ही बुवाई करने और सरकारी कृषि सलाह का पालन करने की अपील की।
जल संकट और खेती को लेकर सरकार सतर्क
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य के बांधों में फिलहाल केवल 24 प्रतिशत जल भंडारण है, जो पिछले वर्ष की तुलना में काफी कम है। उन्होंने जल संरक्षण पर जोर देते हुए कहा कि बीज और उर्वरकों का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है तथा किसानों को कम पानी वाली मोटे अनाज (श्री अन्न) की फसलों को अपनाने पर विचार करना चाहिए।
महिला किसानों को मिलेगा कानूनी अधिकार
मुख्यमंत्री ने कहा कि मानसून सत्र में पेश होने वाला विधेयक महिला किसानों को आधिकारिक किसान का दर्जा देगा, जिससे वे विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे प्राप्त कर सकेंगी। उन्होंने इसे कृषि क्षेत्र में महिलाओं को अधिकार और सम्मान दिलाने की दिशा में बड़ा कदम बताया।

राज्य की तिजोरी पर पहला अधिकार अन्नदाता का’
उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि किसानों का हित सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि पहले भी सरकार ने कर्जमाफी, आर्थिक सहायता, नियमित ऋण चुकाने वाले किसानों के लिए प्रोत्साहन अनुदान, फसल नुकसान पर बढ़ी हुई सहायता और अन्य राहतकारी निर्णय लागू किए हैं। उन्होंने भी किसानों से मौसम की स्थिति को देखते हुए जल्दबाजी में बुवाई नहीं करने की अपील की।

महिला किसानों को अधिकार और सम्मान दिलाने के लिए सरकार प्रतिबद्ध
उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा अजित पवार ने कहा कि महिला किसानों को उनका अधिकार और सम्मान दिलाना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि इसी उद्देश्य से महिला किसानों को कानूनी रूप से किसान का दर्जा देने वाला विधेयक मानसून सत्र में पेश किया जाएगा। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र द्वारा वर्ष 2026 को अंतरराष्ट्रीय महिला किसान वर्ष के रूप में मनाए जाने की पृष्ठभूमि में यह कदम बेहद महत्वपूर्ण है। सुनेत्रा पवार ने कहा कि विधानमंडल जनता की अपेक्षाओं और समस्याओं को सामने रखने का सर्वोच्च मंच है। सरकार किसान, श्रमिक, महिला, युवा, उद्योग, शिक्षा, स्वास्थ्य और आधारभूत संरचना से जुड़े मुद्दों पर सकारात्मक चर्चा कर ठोस समाधान निकालने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने विश्वास जताया कि सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच संवाद के माध्यम से मानसून सत्र सकारात्मक और जनहितकारी वातावरण में संपन्न होगा।

10 महत्वपूर्ण विधेयक होंगे पेश
सरकार मानसून सत्र में लगभग 10 विधेयक पेश करेगी। इनमें महिला किसानों को कानूनी दर्जा देने के अलावा अनुसूचित जाति एवं जनजाति आयोग संशोधन, विश्वविद्यालय, औद्योगिक विकास, रोजगार गारंटी, महानगरपालिका कानून, निजी कौशल विश्वविद्यालय, जीएसटी संशोधन और अनुपूरक विनियोग विधेयक जैसे महत्वपूर्ण प्रस्ताव शामिल हैं।

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