मुंबई : BMC चुनाव ने महाराष्ट्र की राजनीति में एक नया अध्याय शुरू किया है। भले ही भाजपा ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की है, लेकिन शिवसेना के विभाजन का प्रभाव और दलबदल की संभावना से उपजे ‘अगर’ के चक्कर ने राजनीतिक अनिश्चितता बरकरार रखी है। अब नजर महाराष्ट्र में आगे के राजनीतिक रुख पर टिकी है। इस बीच पूर्व मुख्यमंत्री व शिवसेना उद्धव बालासाहेब ठाकरे (यूबीटी) पार्टी के पक्ष प्रमुख उद्धव ठाकरे ने शनिवार को बीएमसी चुनाव के परिणामों को लेकर मीडिया के समक्ष अपना पक्ष रखा।
एकजुट रहती शिवसेना…
शिवसेना भवन में आयोजित पत्रकार परिषद में उद्धव ने कहा कि शिवाजी पार्क मैदान पर हुई हमारी सभा में कुर्सियां और मैदान खचाखच भरा था लेकिन अगले दिन वहीं हुई महायुति की सभा के दौरान कुर्सियां खाली थी। उसके बावजूद हमें 65 और उन्हें (89+29) सीटें! ऐसे में सवाल उठता है कि खाली कुर्सियों ने मतदान कैसे किया? इस चुनाव में एकनाथ शिंदे की शिवसेना को 29 सीटें मिलीं। इस पर उद्धव ने कहा कि अगर दोनों गुट एकजुट होते, तो हमारे पास पास 94 सीटें होतीं, जो भाजपा से अधिक होतीं। इससे बीएमसी में उनका दबदबा कायम रहता।
“जमीन पर शिवसेना अभी मजबूत”
नतीजों के बाद पत्रकारों को संबोधित करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कहा, “भाजपा ने कागज पर शिवसेना खत्म कर दी हो, लेकिन जमीन पर वह हमें खत्म नहीं कर सकती।” उन्होंने मुंबईकरों का आभार जताया, लेकिन यह भी कहा कि उन्हें और समर्थन की उम्मीद थी। उन्होंने कोविड काल के ‘मुंबई मॉडल’ का हवाला देते हुए अपनी सेवाओं को याद दिलाया।
“महाराष्ट्र की रक्षा का संघर्ष जारी रहेगा”: आदित्य ठाकरे
इससे पहले यूबीटी नेता आदित्य ठाकरे ने सोशल मीडिया पर एक भावुक संदेश में कहा कि “असीम धनशक्ति और सत्ता के बावजूद, गठबंधन ने जो चुनौती पेश की और जीत हासिल की, वह बेहद मूल्यवान है।” उन्होंने आरोप लगाया कि पूरी व्यवस्था विरोधियों के पक्ष में थी, फिर भी उनके 65 उम्मीदवार जीते। उन्होंने कहा, “चुनाव खत्म हुआ, लेकिन महाराष्ट्र की रक्षा का संघर्ष जारी रहेगा।”
बहुमत का गणित और दलबदल की आशंका
भाजपा और शिंदे गुट के पास मिलाकर 118 सीटें हैं, जो बहुमत से अधिक हैं। वहीं, उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले महा विकास आघाडी (मविआ) के पास 96 सीटें हैं। इस अस्पष्ट स्थिति के बीच, एकनाथ शिंदे द्वारा अपने पार्षदों को एक होटल में रोककर रखना दलबदल की आशंका को इंगित करता है, जिससे सत्ता का समीकरण फिर से बदल सकता है। फिलहाल बीएमसी मुंबई महानगरपालिका के चुनाव के नतीजों ने एक बात स्पष्ट कर दी है कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने ठाकरे परिवार की बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) पर 25 साल की पकड़ तोड़ दी है। यह भारत की आर्थिक राजधानी की राजनीति में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है। भाजपा 89 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। हालांकि, इन आंकड़ों के पीछे कई ‘अगर’ और राजनीतिक समीकरण छिपे हैं।

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