‘मुंबई. ठाकरे गुट के छह सांसदों के एकनाथ शिंदे की शिवसेना में शामिल होने के बाद उठ रहे सवालों पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पहली बार विस्तार से प्रतिक्रिया दी. उन्होंने स्पष्ट किया कि भाजपा ने अपने दरवाजे नहीं खोले थे, इसलिए सांसदों ने अपने मूल दल शिवसेना के शिंदे गुट का रास्ता चुना.
‘मुंबई तक बैठक’ कार्यक्रम में फडणवीस ने कहा कि भाजपा का दरवाजा किसी के लिए खुला नहीं था. उन्होंने बताया कि ये सभी सांसद मूल रूप से शिवसेना के टिकट पर चुने गए थे, इसलिए महायुति की राय थी कि उन्हें शिवसेना में ही जाना चाहिए. उन्होंने यह भी खुलासा किया कि छह में से एक-दो सांसद भाजपा में आना चाहते थे, लेकिन उन्हें साफ बता दिया गया कि फिलहाल भाजपा में प्रवेश की व्यवस्था नहीं है.
मित्र दल को दिया आवश्यक सहयोग’
फडणवीस ने कहा कि राजनीतिक घटनाक्रम में सहयोगी दल ने जो निर्णय लिया, उसमें भाजपा ने केवल आवश्यक सहयोग दिया. उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों के सभी विवरण सार्वजनिक करना उचित नहीं होता और राजनीतिक शिष्टाचार भी इसकी अनुमति नहीं देता.
उद्धव ठाकरे के आरोपों का जवाब
उद्धव ठाकरे के ‘ऑपरेशन टाइगर’ संबंधी आरोपों पर फडणवीस ने कहा कि यदि सहयोगी दल कोई राजनीतिक अभियान चला रहा है तो उसे रोकने का कोई कारण नहीं है. उन्होंने कहा कि राजनीति में लोग वहीं जाते हैं, जहां उन्हें अपना भविष्य सुरक्षित दिखाई देता है. भाजपा विपक्ष में रहते हुए भी अपने विधायकों को एकजुट रखने में सफल रही क्योंकि उन्हें नेतृत्व पर भरोसा था.
2019 में हुआ प्रेमभंग’
फडणवीस ने उद्धव ठाकरे पर तंज कसते हुए कहा कि उन्हें यह राजनीतिक “प्यार” वर्ष 2019 में चाहिए था. उन्होंने कहा, “2019 में हमारा प्रेमभंग हो गया. उसके बाद हमने दूसरा विवाह कर लिया, गृहस्थी बसा ली. अब पीछे लौटने का सवाल नहीं है.” उन्होंने यह भी कहा कि उनके और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के बीच बेहतर तालमेल है तथा दोनों के संबंधों को लेकर लगाए जा रहे कयास निराधार हैं.

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