मुंबई: महाराष्ट्र विधानसभा के मानसून सत्र में बढ़ते बाल अपराध (juvenile crime) का मुद्दा प्रमुखता से उठा। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि गंभीर अपराधों में शामिल बाल अपराधियों के लिए आयु सीमा 18 वर्ष से घटाकर 16 वर्ष करने का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा जाएगा। साथ ही, अपराधों और मादक पदार्थों की तस्करी में बच्चों का इस्तेमाल करने वालों के खिलाफ कानून और अधिक कठोर बनाया जाएगा।
विधानसभा में उठा बढ़ते बाल अपराध का मुद्दा
जालना के विधायक अर्जुन खोतकर (Arjun Khotkar) ने कहा कि जिन हाथों में किताब और कलम होनी चाहिए, उनमें अब हथियार दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि रेत तस्करी, अवैध शराब, ड्रग्स और अन्य अपराधों में गिरोह नाबालिगों का इस्तेमाल कर रहे हैं, क्योंकि मौजूदा कानून का दुरुपयोग कर उन्हें जल्दी राहत मिल जाती है।
मुख्यमंत्री ने सख्त कानून का दिया संकेत
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadanvis) ने माना कि कुछ आपराधिक गिरोह बाल न्याय कानून की व्यवस्था का दुरुपयोग कर नाबालिगों से अपराध करा रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों के लिए सजा बढ़ाने, संगठित अपराध कानून के तहत कार्रवाई करने तथा कानून में आवश्यक संशोधन करने पर सरकार काम करेगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि 16 वर्ष से कम आयु के बच्चों द्वारा भी गंभीर अपराध किए जाने के मामले सामने आए हैं।
सुधीर मुनगंटीवार ने जताई चिंता
भाजपा विधायक सुधीर मुनगंटीवार (Sudhir Mungantiwar) ने बाल अपराधों के बढ़ते स्वरूप पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि उनके जिले में 12 वर्षीय लड़के द्वारा 21 वर्षीय युवती से दुष्कर्म का मामला सामने आया था। उन्होंने कहा कि यदि कम उम्र में इस तरह के जघन्य अपराध हो रहे हैं तो केवल उम्र के आधार पर मामले को नहीं देखा जा सकता। उन्होंने पिछले दो दशकों की तुलना में बाल अपराधों का वैज्ञानिक अध्ययन कराने और समिति गठित करने की मांग की।
उच्चस्तरीय समिति करेगी वैज्ञानिक अध्ययन
मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि बाल अपराध की बढ़ती प्रवृत्ति का वैज्ञानिक विश्लेषण करने के लिए उच्चस्तरीय समिति गठित की जाएगी। समिति की सिफारिशों के आधार पर राज्य स्तर पर आवश्यक कदम उठाए जाएंगे और जिन विषयों पर केंद्र सरकार के स्तर पर निर्णय जरूरी होगा, उनके लिए प्रस्ताव भेजा जाएगा।
जागरूकता और पुनर्वास पर भी जोर
राज्य मंत्री योगेश कदम ने बताया कि राज्य में स्कूलों और कॉलेजों में जागरूकता अभियान, साइबर सुरक्षा, नशामुक्ति और परामर्श कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। बाल न्याय अधिनियम, 2015 के तहत विशेष बाल पुलिस इकाइयों और CARE (Counselling and Reformative Education) कार्यक्रम के माध्यम से विधि-संघर्षित बच्चों के पुनर्वास और उन्हें मुख्यधारा में लाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

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