भुसावल: महाराष्ट्र के जलगांव जिले के रावेर तालुका स्थित बोरखेड़ा में हुए दिल दहला देने वाले सामूहिक हत्याकांड मामले में अदालत ने अपना ऐतिहासिक फैसला सुना दिया है। भुसावल के अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश संजय यादव ने गुरुवार (4 जून) को मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्य आरोपी महेंद्र बारेला (26 वर्ष) को दोहरी फांसी की सजा सुनाई। यह फैसला उस दरिंदगी का न्याय है, जिसने पूरे महाराष्ट्र को झकझोर कर रख दिया था, जहां एक 13 वर्षीया बच्ची के साथ दुष्कर्म करने के बाद अपनी हैवानियत को छिपाने के लिए आरोपी ने कुल्हाड़ी से पांच मासूमों के टुकड़े-टुकड़े कर दिए थे।
यह रूह कपां देने वाला क्रूर हत्याकांड 15 अक्टूबर 2020 को रावेर तालुका के बोरखेड़ा गांव में घटित हुआ था। दरिंदे आरोपी महेंद्र बारेला ने पहले एक 13 वर्षीय मासूम बच्ची को अपनी हवस का शिकार बनाया। इसके बाद अपने इस घिनौने पाप को छिपाने के लिए उसने क्रूरता की सारी हदें पार कर दीं। आरोपी ने कुल्हाड़ी से वार कर उस पीड़ित बच्ची और उसके चार छोटे भाई-बहनों की बेरहमी से हत्या कर दी थी। आरोपी ने बच्चों के हाथ-पैर इस तरह काट डाले थे जैसे कोई सूखी लकड़ियां काट रहा हो।
अदालत में उज्ज्वल निकम की दमदार पैरवी
इस बेहद संवेदनशील मामले में पीड़ितों की तरफ से विशेष सरकारी वकील एडवोकेट उज्ज्वल निकम ने अदालत के सामने दमदार दलीलें पेश कीं। अभियोजन पक्ष के तर्कों और सबूतों को देखने के बाद अदालत ने आरोपी महेंद्र बारेला को दो अलग-अलग अपराधों के लिए अलग-अलग फांसी की सजा मुकर्रर की। बच्ची के साथ किए गए अमानवीय अत्याचार और पांच मासूम बच्चों की कुल्हाड़ी से काटकर की गई निर्मम हत्या के लिए अदालत ने यह दोहरी फांसी की सजा सुनाई है।
कोर्ट ने लगाया भारी जुर्माना
फांसी की इस कठोर सजा के साथ ही अदालत ने दोषी महेंद्र बारेला पर आर्थिक दंड भी लगाया है। कोर्ट ने आरोपी को दो अलग-अलग मामलों में 25-25 हजार रुपए का जुर्माना भरने का आदेश दिया है। यदि दोषी इस जुर्माने की राशि को अदा नहीं करता है, तो उसे 3 साल की अतिरिक्त जेल की सजा काटनी होगी।
रेयरेस्ट ऑफ द रेयर’ मामला
अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश संजय यादव ने फैसला सुनाते हुए आरोपी की क्रूरता पर बेहद कड़े शब्दों में टिप्पणी की। न्यायालय ने अपने निरीक्षण में कहा कि जिस तरह कोई इंसान कुल्हाड़ी से लकड़ियां काटता है, ठीक उसी तरह इस दरिंदे ने मासूम बच्चों के टुकड़े-टुकड़े कर दिए। कोर्ट ने बच्चों की इस बेरहम हत्या को क्रूरता की पराकाष्ठा माना और इसे ‘रेयरेस्ट ऑफ द रेयर’ (दुर्लभ से दुर्लभतम) मामला घोषित करते हुए मुजरिम को फांसी के फंदे तक पहुंचाने का आदेश दिया।

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