मुंबई. नाशिक कुंभ मेले की तैयारियों को लेकर मनसे अध्यक्ष राज ठाकरे ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने आरोप लगाया कि गुजरात के ठेकेदारों को नाशिक में होनेवाले कुंभ मेला के कामों का ठेका दिया गया है. इसे महाराष्ट्र के ठेकेदारों पर अन्याय करार देते हुए उन्होंने ठेके में भारी कमीशनखोरी के आरोप भी लगाए हैं. इसी के साथ उन्होंने शहर की बदहाल सड़कों, गड्ढों, वृक्षों की कटाई और प्रशासन की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए.
राज ठाकरे ने कहा कि नाशिक में 2003 और 2015 के कुंभ मेले के दौरान विकास कार्य बेहतर ढंग से हुए थे. उनके अनुसार उस समय बिना शोर-शराबे के सड़कें और अन्य काम पूरे हुए. लेकिन इस बार पूरे शहर में गड्ढे हैं और लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है. उन्होंने शहर की मौजूदा स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि प्रशासन कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है.
गुजरात के ठेकेदारों पर सवाल
ठाकरे ने दावा किया कि कुंभ मेले के कई ठेके गुजरात के ठेकेदारों को दिए गए हैं. उन्होंने पूछा कि क्या महाराष्ट्र में योग्य ठेकेदार नहीं हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि विकास कार्यों से ज्यादा कमीशन पर ध्यान दिया जा रहा है.
स्मार्ट सिटी और वृक्ष कटाई पर नाराजगी
राज ठाकरे ने कहा कि बोटैनिकल गार्डन और म्यूजियम जैसी पुरानी अच्छी परियोजनाओं को बर्बाद किया जा रहा है. उन्होंने पूछा कि सरकार की बहुचर्चित ‘स्मार्ट सिटी’ योजना आखिर कहां गायब हो गई? बड़े पैमाने पर पेड़ काटे जा रहे हैं लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है. उन्होंने निराशा व्यक्त करते हुए कहा कि अगर इतनी अव्यवस्था और भ्रष्टाचार के बाद भी जनता बीजेपी को ही चुनकर देती है, तो फिर उन्हें यह सब भुगतना ही पड़ेगा.
शिक्षा के धंधे का भी किया पोस्टमार्टम
पत्रकार परिषद में राज ठाकरे ने कोचिंग क्लासों की मनमानी और नीट (एनईईटी) पेपर लीक मामले पर भी सरकार की क्लास ली. ठाकरे ने कोचिंग संस्थानों की बढ़ती भूमिका पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि आज कॉलेज से ज्यादा कोचिंग क्लास तय कर रहे हैं कि छात्र कहां पढ़ेंगे. उन्होंने नीट पेपर लीक का जिक्र करते हुए शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग की. उन्होंने कहा कि आज कॉलेज से ज्यादा कोचिंग क्लासेस हावी हैं, जहां लाख-डेढ़ लाख रुपए ऐंठे जा रहे हैं. पेपर लीक के कारण युवाओं में भारी निराशा है. उन्होंने नाशिक के छात्र यश गोसावी की आत्महत्या का जिक्र करते हुए कहा कि प्रशासन संवेदनहीन हो चुका है. यदि कोचिंग क्लासों पर लगाम नहीं कसी गई तो युवाओं का आक्रोश सड़कों पर फूटेगा.

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