11 अगस्त की सुनवाई पर टिकी सभी की नजरें
नई दिल्ली/मुंबई : शिवसेना के नाम और चुनाव चिन्ह ‘धनुष-बाण’ को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिखाई दे रही है। सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) में हुई सुनवाई के दौरान उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) गुट की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल (Kapil Sibal) ने चुनाव आयोग (Election Commission of India) के फैसले पर गंभीर सवाल उठाए। संवैधानिक विशेषज्ञ एडवोकेट भास्करराव आव्हाड (Bhaskarrao Awhad) का मानना है कि मामले की संवैधानिक जटिलता को देखते हुए इसे सुप्रीम कोर्ट की बड़ी या पूर्ण पीठ के पास भेजा जा सकता है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 11 अगस्त को होगी, जिस पर सभी की निगाहें टिकी हैं।
चुनाव आयोग के फैसले पर उठाए सवाल
सुनवाई के दौरान कपिल सिब्बल ने दलील दी कि चुनाव आयोग ने अपने अधिकार क्षेत्र से आगे बढ़कर एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) के पक्ष में फैसला दिया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2018 के शिवसेना संविधान के अनुसार पार्टी के अधिकांश प्रमुख पदाधिकारी और राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य उद्धव ठाकरे के साथ थे। इसके बावजूद आयोग ने संगठनात्मक बहुमत और लाखों कार्यकर्ताओं के शपथपत्रों की अनदेखी करते हुए केवल विधायकों की संख्या को आधार बनाया।
‘विधायक दल और राजनीतिक दल अलग’
कपिल सिब्बल ने अदालत के सामने कहा कि विधायक दल और मूल राजनीतिक दल दोनों अलग-अलग संवैधानिक इकाइयां हैं। कुछ विधायकों के अलग होने से पूरी राजनीतिक पार्टी विभाजित नहीं मानी जा सकती। उन्होंने तर्क दिया कि एकनाथ शिंदे के पास जो बहुमत बना, वह सत्ता में आने के बाद का ‘परिस्थितिजन्य बहुमत’ था, इसलिए उसे पार्टी का वास्तविक बहुमत नहीं माना जा सकता।
अयोग्यता पर फैसला लंबित रहने का मुद्दा
सिब्बल ने यह भी कहा कि शिंदे गुट के विधायकों की अयोग्यता का मामला लंबित रहने के बावजूद चुनाव आयोग ने जल्दबाजी में पार्टी का नाम और चुनाव चिन्ह शिंदे गुट को सौंप दिया। उनका कहना था कि यदि पहले अयोग्यता पर फैसला आता, तो पूरे मामले की कानूनी स्थिति अलग होती।
बड़ी पीठ को भेजे जाने की संभावना
संवैधानिक विशेषज्ञ एडवोकेट भास्करराव आव्हाड ने कहा कि सुनवाई के दौरान उठे संवैधानिक प्रश्न बेहद महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में वर्तमान खंडपीठ इस मामले को सुप्रीम कोर्ट की पूर्ण पीठ के पास भेज सकती है। यदि ऐसा होता है तो यह मामला देश की संवैधानिक व्यवस्था और राजनीतिक दलों से जुड़े कानूनों के लिए ऐतिहासिक महत्व का बन सकता है।
राहुल नार्वेकर के फैसले को भी चुनौती
विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर (Rahul Narwekar) के विधायकों की अयोग्यता संबंधी फैसले को चुनौती देते हुए सुनील प्रभु (Sunil Prabhu) ने सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की है। इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति सूर्यकांत (Justice Surya Kant) की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ कर रही है। सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची (Justice Joymalya Bagchi) ने टिप्पणी की कि विधायक दल कभी भी राजनीतिक दल से पूरी तरह स्वतंत्र होकर कार्य नहीं कर सकता।
संजय राऊत का पलटवार
सुनवाई के बाद शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के नेता और सांसद संजय राऊत (Sanjay Raut) ने सोशल मीडिया पर कहा कि उन्हें संविधान और न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है। उन्होंने दावा किया कि कानून के दायरे में सभी सवालों का जवाब मिलेगा और पार्टी को न्याय मिलने का विश्वास है।
दिल्ली पहुंचे एकनाथ शिंदे
सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई के बीच महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) दिल्ली पहुंचे। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) से मुलाकात की। इस दौरान हाल ही में शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) छोड़कर शिंदे गुट में शामिल हुए सांसद भी उनके साथ मौजूद रहे। राजनीतिक हलकों में इस दौरे को मौजूदा कानूनी और राजनीतिक परिस्थितियों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
11 अगस्त की सुनवाई पर सबकी नजर
शिवसेना के नाम और ‘धनुष-बाण’ चुनाव चिन्ह को लेकर चल रही यह कानूनी लड़ाई अब निर्णायक चरण में पहुंच गई है। 11 अगस्त को होने वाली अगली सुनवाई में अदालत की टिप्पणियां और संभावित आदेश महाराष्ट्र की राजनीति की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं। यदि मामला बड़ी पीठ को भेजा जाता है या कोई महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश आता है, तो उसके दूरगामी राजनीतिक और संवैधानिक प्रभाव देखने को मिल सकते हैं।

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