मुंबई: मुंबई महानगरपालिका चुनाव में कांग्रेस के साथ गठबंधन में रही वंचित बहुजन आघाडी (वीबीए) ने शनिवार को कांग्रेस पर आरोप लगाया कि उसने साझा प्रचार नहीं किया, जिसका खामियाजा आघाडी को भुगतना पड़ा और उसे एक भी सीट नहीं मिली। हालांकि, कांग्रेस ने इन आरोपों को खारिज कर दिया है।
वंचित बहुजन आघाडी के प्रवक्ता सिद्धार्थ मोकाटे ने कहा कि नांदेड़ और लातूर में दोनों दलों ने एकजुट होकर चुनाव प्रचार किया, लेकिन मुंबई में ऐसा नहीं हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने अपनी सभाओं में ‘कांग्रेस-वंचित-रासप आघाडी’ को वोट देने का संयुक्त प्रचार नहीं किया, जिससे वीबीए को कांग्रेस के मुस्लिम वोट नहीं मिले और उसे मुंबई में शून्य पर रहना पड़ा। मोकाटे ने इसे ‘कांग्रेस के मुंबई नेतृत्व की विफलता’ बताया।
कांग्रेस ने दिया जवाब
मुंबई कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता सचिन सावंत ने इन आरोपों को गलत ठहराते हुए कहा कि वीबीए को मुंबई में पर्याप्त सीटें आवंटित की गई थीं, लेकिन उन्हें कई सीटों पर उम्मीदवार नहीं मिले और उन्होंने कुछ सीटें वापस भी कर दीं। सावंत ने कहा कि दोनों पक्षों द्वारा बेहतर समन्वय होता तो परिणाम अच्छे हो सकते थे।
मुंबई में, प्रकाश आंबेडकर के नेतृत्व वाली वंचित बहुजन आघाडी ने 45 सीटों पर, जबकि कांग्रेस ने 152 सीटों पर चुनाव लड़ा। कांग्रेस को 24 सीटें मिलीं, जबकि वीबीए एक भी सीट जीतने में विफल रही। गठबंधन में शामिल महादेव जानकर के राष्ट्रीय समाज पक्ष को भी मुंबई में सफलता नहीं मिली। हालांकि, लातूर और नांदेड़ महानगरपालिकाओं में वीबीए को प्रत्येक में 5 सीटें मिली हैं।
कांग्रेस ने परिणाम को ‘संतोषजनक’ बताया
सचिन सावंत ने कहा कि सत्तापक्ष द्वारा प्रशासनिक मशीनरी के इस्तेमाल और विपरीत परिस्थितियों के बावजूद कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने दृढ़ता से चुनाव लड़ा और सफलता प्राप्त की। उन्होंने मुंबई में प्राप्त परिणाम को ‘बड़ा नहीं, लेकिन संतोषजनक’ बताया।
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