मुंबई. महिला एवं बाल विकास मंत्री aditi तटकरे ने कहा है कि बच्चों के लिए सुरक्षित डिजिटल वातावरण बनाने हेतु ‘डिजिटल कवच’ खड़ा करना आज की सबसे बड़ी जरूरत है। तकनीक के जिम्मेदार और सुरक्षित उपयोग को सुनिश्चित करना इस दिशा में पहला कदम होगा।
बच्चों की सुरक्षा और डिजिटल युग की चुनौतियों से निपटने के लिए “महा-संकल्प : सुरक्षा, शिक्षा और टिकाऊ डिजिटल भारत” विषयक नेतृत्व संवाद का आयोजन मुंबई के जिओ वर्ल्ड कन्वेंशन सेंटर में किया गया। यह कार्यक्रम महिला एवं बाल विकास विभाग, महाराष्ट्र राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग और चाइल्डफंड इंडिया के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित हुआ। कार्यक्रम में आयोग की अध्यक्षा नंदिनी आवड़े, सचिव लक्ष्मण राउत, अवर सचिव वंदना जैन और चाइल्डफंड इंडिया के कार्यकारी निदेशक आनंद विश्वकर्मा सहित विभिन्न कॉर्पोरेट संस्थाओं, सामाजिक संगठनों, वकीलों, प्राध्यापकों, फिल्मकारों और विशेषज्ञों ने भाग लिया।
44 करोड़ बच्चे, विकसित भारत का भविष्य
मंत्री तटकरे ने अपने संदेश में कहा कि भारत में लगभग 44 करोड़ बच्चे 18 वर्ष से कम आयु के हैं। ‘विकसित भारत @2047’ के लक्ष्य की ओर बढ़ते हुए बच्चों का सर्वांगीण विकास सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
इंटरनेट के अवसर और नए खतरे
इंटरनेट, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल प्लेटफॉर्म जहाँ बच्चों को शिक्षा और नवाचार के नए अवसर दे रहे हैं, वहीं साइबर बुलिंग, ऑनलाइन ग्रूमिंग, हानिकारक सामग्री और गेमिंग की लत जैसे खतरे भी बढ़ रहे हैं। मंत्री ने विश्वास जताया कि इस संवाद से ठोस और प्रभावी समाधान सामने आएंगे।
चाइल्ड-फ्रेंडली मोबाइल वैन स्क्वॉड की शुरुआत
महिला एवं बाल विकास विभाग ने बाल संरक्षण के लिए चाइल्ड-फ्रेंडली मोबाइल वैन स्क्वॉड शुरू किया है। यह दल सड़कों पर रहने वाले और असुरक्षित बच्चों तक पहुँचकर उन्हें परामर्श, शिक्षा और पुनर्वास की सेवाओं से जोड़ने का काम कर रहा है।
वेब सेफ एंड वाइज’ पायलट योजना में महाराष्ट्र अग्रणी
महाराष्ट्र को ‘वेब सेफ एंड वाइज इनिशिएटिव’ का पायलट राज्य बनाया गया है। इस योजना के तहत 12 से 18 वर्ष की आयु के विद्यार्थियों को ऑनलाइन सुरक्षा, गोपनीयता, साइबर धोखाधड़ी और जिम्मेदार डिजिटल उपयोग के बारे में मार्गदर्शन दिया जा रहा है। इसमें छात्र, शिक्षक, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, आशा कार्यकर्ता, पुलिस और सामुदायिक प्रतिनिधि सक्रिय रूप से जुड़े हैं। भविष्य में स्कूलों में डिजिटल साक्षरता बढ़ाना, अभिभावकों को जागरूक करना, तकनीकी कंपनियों द्वारा ‘सेफ्टी बाय डिज़ाइन’ सिद्धांत अपनाना और CSR के माध्यम से कॉर्पोरेट सहभागिता को प्रोत्साहित करने पर विशेष जोर दिया जाएगा।
साइबर अपराध के खिलाफ मिलकर लड़ें -यशस्वी यादव
अपर पुलिस महानिदेशक (साइबर क्राइम) यशस्वी यादव ने कहा कि नागरिकों को साइबर अपराध रोकने के लिए साइबर सुरक्षा विभाग को सक्रिय सहयोग देना होगा। उन्होंने बताया कि AI और आने वाले समय में क्वांटम कंप्यूटिंग तकनीकी क्षेत्र में बड़े बदलाव ला रहे हैं।
हेल्पलाइन नंबर 1930 करें याद
उन्होंने बताया कि ई-पुलिसिंग प्रणाली के जरिए नागरिकों को त्वरित पुलिस सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। साइबर अपराध या बच्चों से संबंधित ऑनलाइन शोषण की शिकायत हेल्पलाइन नंबर 1930 पर दर्ज कराई जा सकती है।
‘पुलिस दीदी’ से स्कूलों में जागरूकता -अश्वती दोरजे
अपर पुलिस महानिदेशक (महिला व बाल अत्याचार निवारण) अश्वती दोरजे ने बताया कि ‘पुलिस दीदी’ उपक्रम के तहत स्कूलों, कोचिंग क्लासों और शेल्टर होम में जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इसके अंतर्गत बच्चों को ‘गुड टच-बैड टच’, साइबर सुरक्षा और सोशल मीडिया के सुरक्षित उपयोग की जानकारी दी जाती है। उन्होंने कहा कि कोविड के बाद बच्चों के हाथ में स्मार्टफोन का चलन बढ़ने से ऑनलाइन बाल शोषण की घटनाओं में भी वृद्धि हुई है। बच्चों की सुरक्षा के लिए पुलिस, स्कूल, अभिभावक और सामाजिक संगठनों को मिलकर काम करना होगा, तभी एक सुरक्षित साइबर वातावरण बनाना संभव होगा।

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