मुंबई. गोवंडी के एक बाल रोग अस्पताल में बिना वैध लाइसेंस के एलोपैथिक दवाओं की बिक्री का मामला सामने आने के बाद महाराष्ट्र खाद्य एवं औषध प्रशासन (एफडीए) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 9.09 लाख रुपए मूल्य का दवा स्टॉक और बिक्री से जुड़े बिल बुक जब्त किए हैं। जांच में यह भी सामने आया कि अस्पताल में तकनीकी रूप से अयोग्य व्यक्ति के माध्यम से मरीजों को दवाएं बेची जा रही थीं, जिसके चलते एफडीए ने संबंधित कानूनों के तहत आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।
गोवंडी के अस्पताल पर छापा
एफडीए राज्यभर में दवाओं की सुरक्षित और कानूनी बिक्री सुनिश्चित करने के लिए विशेष जांच अभियान चला रहा है। इसी अभियान के तहत 18 जून को अधिकारियों ने गोवंडी (पूर्व) स्थित मुस्कान एनआईसीयू एंड चिल्ड्रन्स हॉस्पिटल की जांच की। निरीक्षण के दौरान अस्पताल के दो कमरों में बड़ी मात्रा में एलोपैथिक दवाओं का भंडार मिला।
रिसेप्शनिस्ट बेच रही थी दवाएं
जांच में पता चला कि अस्पताल में वैध औषधि बिक्री लाइसेंस के बिना दवाएं बेची जा रही थीं। मरीजों को दवाएं 12वीं पास रिसेप्शनिस्ट के माध्यम से बिल बनाकर दी जा रही थीं। संबंधित कर्मचारी के पास फार्मेसी या दवा बिक्री से जुड़ी कोई वैधानिक या तकनीकी योग्यता नहीं थी, जो औषधि एवं प्रसाधन अधिनियम, 1940 के प्रावधानों का उल्लंघन है।
बिलों में जरूरी जानकारी भी नहीं
एफडीए ने दवा बिक्री में उपयोग की जा रही बिल बुक भी जब्त कर ली। जांच में पाया गया कि बिलों में केवल मरीज का नाम, तारीख, दवा का नाम और राशि दर्ज थी, जबकि बैच नंबर, निर्माण तिथि, एक्सपायरी डेट, निर्माता का नाम और अन्य अनिवार्य विवरण नहीं दिए गए थे। इसे उपभोक्ता संरक्षण और दवा बिक्री नियमों का गंभीर उल्लंघन माना गया है। के
कड़ी कार्रवाई की चेतावनी
एफडीए ने अस्पताल से 9,09,215.28 रुपए मूल्य की दवाएं जब्त कर ली हैं और मामले की विस्तृत जांच के बाद संबंधित सभी लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि वे केवल लाइसेंसधारी मेडिकल स्टोर से ही दवाएं खरीदें और हर खरीद पर सभी वैधानिक विवरण वाला बिल अवश्य लें।

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