मुंबई : राज्य सरकार ने जमीन माप प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाने के लिए बड़े बदलाव किए हैं। अब पारिवारिक बंटवारे की जमीन की माप मात्र 200 रुपए में कराई जा सकेगी, जबकि नियमित माप 90 दिनों और त्वरित माप 30 दिनों के भीतर पूरी करना अनिवार्य होगा। राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले (Chandrshekhar Bawankule) ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (CM Devendra Fadanvis) के निर्देश पर इस महत्वपूर्ण फैसले की घोषणा की है।
जमीन माप में देरी और भ्रष्टाचार पर लगेगी रोक
राज्य सरकार का मानना है कि नए नियमों से जमीन माप की प्रक्रिया में होने वाली अनावश्यक देरी और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा। नए शुल्क और समय सीमा तय होने से आम नागरिकों को अधिक पारदर्शी और तेज सेवा मिल सकेगी।
पारिवारिक बंटवारे की माप के लिए विशेष रियायत
परिवार के भीतर सहमति से हुए बंटवारे या न्यायालय के आदेश के अनुसार होने वाली जमीन माप के लिए प्रति हिस्से केवल 200 रुपए शुल्क निर्धारित किया गया है। इससे ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के हजारों परिवारों को आर्थिक राहत मिलेगी।
ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के लिए नए शुल्क
नई दरों के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में 2 हेक्टेयर तक की नियमित जमीन माप के लिए 2,000 रुपए और त्वरित माप के लिए 8,000 रुपए शुल्क देना होगा। वहीं शहरी क्षेत्रों में 1 हेक्टेयर तक की नियमित माप के लिए 3,000 रुपए तथा त्वरित माप के लिए 12,000 रुपए शुल्क निर्धारित किया गया है।
अनुपस्थिति पर दंड और अधिकारियों की जवाबदेही
यदि आवेदक निर्धारित दिन पर माप के लिए उपस्थित नहीं रहता है तो उसे मूल शुल्क का 50 प्रतिशत या अधिकतम 10,000 रुपए तक पुनःभेंट शुल्क देना होगा। हालांकि यदि संबंधित भूमापक या अधिकारी अनुपस्थित रहता है तो आवेदक से कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा।
गुंठेवारी और उच्च जांच के लिए अलग नियम
महाराष्ट्र गुंठेवारी विकास अधिनियम के अंतर्गत आने वाले भूखंडों की माप के लिए सामान्य शुल्क से डेढ़ गुना शुल्क लिया जाएगा। वहीं कनिष्ठ भूमापक द्वारा की गई माप पर आपत्ति होने पर उच्च स्तर की जांच के लिए तीन से पांच गुना अधिक शुल्क निर्धारित किया गया है।
सरकारी संस्थाओं को मिलेगी रियायत
नए निर्णय के तहत अर्ध-सरकारी संस्थाओं को जमीन माप शुल्क में 50 प्रतिशत और पूरी तरह सरकारी जमीनों की माप के लिए 75 प्रतिशत तक की छूट प्रदान की जाएगी।

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