मुंबई: महाराष्ट्र विधान परिषद के 9 सदस्यों का कार्यकाल 13 मई को समाप्त होने से पहले मंगलवार को सदन में भावनिक विदाई समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर राजनीतिक कड़वाहट को दरकिनार कर सत्ता पक्ष और विपक्ष ने एक-दूसरे के प्रति आत्मीयता और सम्मान का परिचय दिया। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के भाषणों ने सदन का माहौल भावुक और गरिमामय बना दिया।
पु. ल. देशपांडे के बाद ठाकरे ही ‘कोट्याधीश’ -फडणवीस
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने अपने संबोधन में उद्धव ठाकरे के हाजिरजवाब स्वभाव की जमकर प्रशंसा की। उन्होंने ठाकरे को प्रसिद्ध साहित्यकार पु. ल. देशपांडे की तरह ‘कोट्याधीश’ (हाजिरजवाब) की उपाधि देते हुए कहा कि उनके बोलने में एक विशेष प्रकार का विनोद और सहजता होती है। फडणवीस ने कहा, “राजनीति में मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन हमारा सह-प्रवास बहुत पुराना है। उद्धव जी का व्यक्तित्व मूलतः एक राजनेता का नहीं, बल्कि एक संवेदनशील कलाकार का है।”
संवेदनशील फोटोग्राफर और ‘संस्कृति के रक्षक’
फडणवीस ने उद्धव ठाकरे के फोटोग्राफी कौशल का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ठाकरे एक निष्णात छायाचित्रकार हैं, जिन्होंने महाराष्ट्र के किलों, प्रकृति और वारकरी परंपरा को अपने कैमरे में कैद कर राज्य की संस्कृति को सहेजने का बड़ा काम किया है। वारी के दौरान हेलिकॉप्टर के खुले दरवाजे से जोखिम उठाकर की गई फोटोग्राफी उनके काम के प्रति समर्पण और संवेदनशील मन को दर्शाती है।
“राजनीति में कभी पूर्ण विराम नहीं होता” -एकनाथ शिंदे
उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने भी भावुक स्वर में विदाई प्रस्ताव रखा। उन्होंने उद्धव ठाकरे को ‘साहेब’ कहकर संबोधित किया और उनके दीर्घायु होने की कामना की। शिंदे ने कहा, “आज का क्षण भले ही विदाई का है, लेकिन राजनीति में कभी पूर्ण विराम नहीं होता। यह केवल एक पड़ाव है, अंत नहीं।” उन्होंने सदन की उपसभापति डॉ. नीलम गोऱ्हे को ‘रणरागिणी’ बताते हुए उनके 24 वर्षों के कार्यकाल का गौरव किया और अन्य सभी सदस्यों को भविष्य की शुभकामनाएं दीं।
‘यह विदाई नहीं, पुनरागमन की शुभकामना है’ -सभापती
विधान परिषद के अध्यक्ष प्रा. राम शिंदे ने कहा कि सदन की परंपरा केवल औपचारिक विदाई की नहीं, बल्कि सदस्यों के पुनरागमन की शुभकामनाएं देने की है। उन्होंने सभी निवृत्त सदस्यों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि उनका अनुभव सार्वजनिक जीवन में आगे भी समाज के काम आता रहेगा।
उद्धव ठाकरे का शायराना जवाब और सवाल
पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने फडणवीस की तारीफों का जवाब चुटीले अंदाज में दिया। उन्होंने फडणवीस द्वारा उन्हें ‘करीबी मित्र’ बताने पर चुटकी लेते हुए पूछा, “यदि मेरा स्वभाव इतना ही अच्छा था और आप मुझे इतना जानते थे, तो फिर ऐसी कौन सी बात हो गई कि आपको (शिंदे का) हाथ पकड़कर चलना पड़ा?” उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान लिए गए बड़े फैसलों का जिक्र करते हुए प्रशासन और सभी सहयोगियों का आभार व्यक्त किया।
इन प्रमुख सदस्यों को दी गई विदाई
इस अवसर पर उद्धव ठाकरे के साथ ही उपसभापति डॉ. नीलम गोऱ्हे, शशिकांत शिंदे, अमोल मिटकरी, रणजीतसिंह मोहिते-पाटील, राजेश राठोड, संदीप जोशी, दादाराव केचे और संजय केणेकर को विदाई दी गई। सभापति राम शिंदे ने उम्मीद जताई कि ये सभी अनुभवी नेता जल्द ही दोबारा सदन में लौटकर जनसेवा करेंगे।

