मंत्रियों ने दी इस्तीफे की धमकी
मुंबई: सतारा जिला परिषद अध्यक्ष पद के चुनाव में हुए बवाल ने अब महाराष्ट्र की सियासत को पूरी तरह गर्म कर दिया है। शिंदे गुट के मंत्रियों की नाराजगी खुलकर सामने आ रही है और इस्तीफे की अटकलें तेज हो गई हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने महायुति के भीतर दरार को और गहरा कर दिया है।
मतदान से रोकना लोकतंत्र की हत्या”–शिंदे का तीखा हमला
उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने सोमवार को विधानसभा में कहा कि मतदाताओं को मतदान से रोकना लोकतंत्र की हत्या है। उन्होंने खुलासा किया कि चुनाव से पहले दो मतदाताओं पर अचानक केस दर्ज कर उन्हें हिरासत में लिया गया, जिससे चुनाव की निष्पक्षता पर सवाल उठे।
“मुझे मारा गया”-पालकमंत्री शंभूराज देसाई
पालकमंत्री शंभूराज देसाई ने सदन में भावुक होकर कहा, “मुझे मारा गया, मुझे चोट लगी है।” उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने उन्हें और अन्य सदस्यों को आरोपी की तरह घसीटते हुए रोका। देसाई ने संबंधित अधिकारियों और करीब 100 पुलिसकर्मियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की।
मकरंद पाटील को घेरा, नेताओं को करना पड़ा संघर्ष
चुनाव के दिन हालात इतने बिगड़ गए कि मंत्री मकरंद पाटील को 20-25 पुलिसकर्मियों ने घेर लिया। नेताओं को अपने ही सदस्यों को मतदान केंद्र तक पहुंचाने के लिए जूझना पड़ा। इस दौरान धक्का-मुक्की में देसाई घायल हो गए।
बीजेपी पर प्रशासन के दुरुपयोग का आरोप
शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस ने आरोप लगाया कि बीजेपी ने पुलिस और प्रशासन का इस्तेमाल कर चुनाव का परिणाम प्रभावित किया।
दो मतदाताओं को रोककर बहुमत का समीकरण बदलने की कोशिश का आरोप भी लगाया गया।
चुनाव में कैसे पलटा खेल?
शिवसेना-एनसीपी गठबंधन के पास 35 सदस्य हैं जबकि बीजेपी के पास 27 सदस्य हैं। बहुमत के लिए 33 का आंकड़ा जरूरी है। बीजेपी ने 6 सदस्यों में सेंध लगाई। शिवसेना के 2, एनसीपी के 3 और एक निर्दलीय का समर्थन हासिल किया और अध्यक्ष पद जीत लिया। इस दौरान दो सदस्यों को मतदान से रोके जाने का आरोप भी शिंदे गुट ने लगाया है।
एसपी सहित तीन अधिकारियों के निलंबन पर सियासी संग्राम
विधान परिषद में इस मुद्दे पर जोरदार हंगामा हुआ। उपसभापति डॉ. नीलम गोर्हे ने सतारा के पुलिस अधीक्षक तुषार दोषी समेत तीन अधिकारियों के निलंबन के आदेश दिए। लेकिन, मंत्री जयकुमार गोरे और बीजेपी गटनेता प्रवीण दरेकर ने इस फैसले का कड़ा विरोध किया। इसके बाद सभापति राम शिंदे ने उपसभापति के इस आदेश को फिलहाल रोक (होल्ड) दिया। इस फैसले के कारण शिवसेना (शिंदे गुट) और बीजेपी के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली।
“जब मंत्री सुरक्षित नहीं, तो आम सदस्य कहाँ जाएं?”
विधान परिषद में शिंदे गुट और एनसीपी के विधायकों ने सवाल उठाया कि जब एक मंत्री के साथ ऐसा व्यवहार हो सकता है तो आम जनप्रतिनिधि न्याय के लिए किसके पास जाएं?
यह सवाल पूरे घटनाक्रम की गंभीरता को और बढ़ाता है।
फडणवीस ने दिलाया जांच का भरोसा
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि उपमुख्यमंत्री द्वारा रखे गए तथ्यों के आधार पर जांच की जाएगी और दोषियों पर कार्रवाई होगी। हालांकि, उनके संक्षिप्त बयान से विवाद शांत होता नजर नहीं आ रहा।
विरोधियों का हमला – “2029 की चेतावनी”
राष्ट्रवादी (शरद पवार गुट) की नेता रोहिणी खडसे ने इसे सहयोगी दलों के लिए “खतरे की घंटी” बताया।
रोहित पवार ने भी बीजेपी पर सत्ता के लिए सहयोगियों को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया।
महायुति में दरार गहराई
सतारा विवाद के बाद महायुति के भीतर अविश्वास बढ़ता जा रहा है। शिंदे गुट की नाराजगी और बीजेपी के प्रति आक्रोश गठबंधन की स्थिरता पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
शरद पवार सहित विरोधियों ने लगाया तड़का
सतारा विवाद पर विपक्ष हमलावर है। शरद पवार गुट, कांग्रेस और अन्य दलों ने बीजेपी पर लोकतंत्र को कमजोर करने का आरोप लगाया है। विपक्ष का कहना है कि यह मामला सिर्फ एक चुनाव नहीं, बल्कि सत्ता के दुरुपयोग का उदाहरण है।

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