आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में थकान और सुस्ती आम समस्या बन गई है। इसका मुख्य कारण अनियमित दिनचर्या, गलत खान-पान, नींद की कमी और शारीरिक गतिविधि का अभाव है। यदि उम्र के अनुसार काम और खान-पान का संतुलन रखा जाए, तो शरीर में ऊर्जा बनी रहती है और कई बीमारियों से बचाव भी होता है।
थकान क्यों होती है?
शरीर को पर्याप्त नींद, सही पोषण और नियमित व्यायाम नहीं मिलता, तो थकान महसूस होती है। पानी की कमी, तनाव, जंक फूड और देर रात तक स्क्रीन देखने की आदत भी सुस्ती बढ़ाती है। कभी-कभी यह एनीमिया, विटामिन की कमी या थायरॉइड जैसी समस्याओं का संकेत भी हो सकती है।
ऊर्जा के लिए रोज़ाना की जरूरी आदतें
सुबह उठते ही गुनगुना पानी पिएँ
5–10 मिनट स्ट्रेचिंग या वॉक करें
पौष्टिक नाश्ता लें
दिनभर में 2–3 लीटर पानी पिएँ
रोज़ 20–30 मिनट व्यायाम करें
समय पर और हल्का भोजन करें
सोने से पहले स्क्रीन टाइम कम रखें
ये छोटी-छोटी आदतें दिनभर शरीर को सक्रिय और दिमाग को तरोताजा रखती हैं।
उम्र के अनुसार सही रूटीन
15–25 वर्ष: ऊर्जा और विकास का समय
इस उम्र में शरीर तेजी से विकसित होता है, इसलिए प्रोटीन और पोषण जरूरी है।
रोज़ खेल या व्यायाम करें
दूध, अंडा, दाल, फल और सब्जियाँ खाएँ
जंक फूड कम करें
7–8 घंटे नींद लें
25–40 वर्ष: काम और स्वास्थ्य का संतुलन
इस उम्र में काम का दबाव ज्यादा होता है, इसलिए शरीर का ध्यान रखना जरूरी है।
रोज़ 30 मिनट एक्सरसाइज
संतुलित आहार लें
तला-भुना और मीठा कम करें
तनाव को नियंत्रित रखें
40–60 वर्ष: सावधानी और संतुलन की जरूरत
इस उम्र में जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ता है।
रोज़ वॉक या योग करें
कम नमक और कम तेल वाला भोजन लें
नियमित हेल्थ चेकअप कराएँ
फाइबर और प्रोटीन बढ़ाएँ
60 वर्ष से ऊपर: हल्की दिनचर्या, मजबूत सेहत
वरिष्ठ अवस्था में शरीर को हल्का और सुपाच्य भोजन चाहिए।
हल्की वॉक और प्राणायाम करें
खिचड़ी, सूप और उबली सब्जियाँ खाएँ
पर्याप्त नींद और आराम लें
कैल्शियम और विटामिन-D का ध्यान रखें
स्वस्थ जीवन के पाँच सरल नियम
रोज़ 7–8 घंटे नींद लें
कम से कम 30 मिनट शारीरिक गतिविधि करें
दिनभर पर्याप्त पानी पिएँ
जंक फूड और मीठा कम करें
तनाव कम करने के लिए योग या ध्यान करें
निष्कर्ष : स्वास्थ्य कोई एक दिन का काम नहीं, बल्कि रोज़ की आदतों का परिणाम है। उम्र के अनुसार सही खान-पान और दिनचर्या अपनाकर न सिर्फ थकान और सुस्ती से बचा जा सकता है, बल्कि लंबी और स्वस्थ जिंदगी भी जी जा सकती है। छोटे-छोटे बदलाव ही बड़े स्वास्थ्य लाभ देते हैं।

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