मुंबई. बदलते पारिवारिक माहौल में बुजुर्ग माता-पिता की उपेक्षा, आर्थिक शोषण और प्रताड़ना के बढ़ते मामलों को देखते हुए महाराष्ट्र सरकार ने सख्त कदम उठाया है. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के निर्देश पर राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने आदेश दिया है कि माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों के भरण-पोषण व कल्याण से जुड़ी सभी शिकायतों का अधिकतम 90 दिनों के भीतर निपटारा किया जाए. लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर भी कार्रवाई होगी.
सरकार के अनुसार संयुक्त परिवारों के टूटने और बदलती सामाजिक परिस्थितियों के कारण कई बुजुर्ग माता-पिता अपने ही बच्चों की उपेक्षा, आर्थिक अनदेखी और मानसिक प्रताड़ना का सामना कर रहे हैं. इसके चलते कई बुजुर्ग भोजन, इलाज, रहने की जगह और अन्य जरूरी सुविधाओं से भी वंचित हो रहे हैं. ऐसी शिकायतों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है.
90 दिन में फैसला जरूरी
‘माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण एवं कल्याण अधिनियम, 2007’ के तहत दर्ज हर आवेदन का 90 दिनों के भीतर निपटारा करना अनिवार्य किया गया है. आवेदन मिलने के दिन ही उसका पंजीकरण और रसीद देना होगा. बिना वजह सुनवाई टालने की अनुमति नहीं होगी.
हर जिले में होगी निगरानी
सरकार ने सभी जिला कलेक्टर कार्यालयों में वरिष्ठ नागरिक सहायता कक्ष शुरू करने के निर्देश दिए हैं. संभागीय आयुक्त हर महीने लंबित और निपटाए गए मामलों की समीक्षा करेंगे. जरूरत पड़ने पर भरण-पोषण भत्ता दिलाने के लिए पुलिस की मदद भी ली जाएगी.
लापरवाही पर कार्रवाई
राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा कि बुजुर्ग माता-पिता का सम्मान और सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता है. उन्होंने स्पष्ट किया कि शिकायतों को लंबित रखने या आदेशों के पालन में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक और दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी.

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