260 करोड़ रुपये के एक्शन प्लान को मंजूरी
मुंबई. महाराष्ट्र में मानव और वन्यजीवों के बीच बढ़ते संघर्ष को रोकने के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है. राज्य वन्यजीव बोर्ड की स्थायी समिति की बैठक में वन मंत्री गणेश नाईक ने करीब 260 करोड़ रुपये के एक्शन प्लान को मंजूरी दी है, जिसके तहत पहले चरण में राज्य के 1000 गांवों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) पर आधारित अलर्ट सिस्टम लगाया जाएगा. इस आधुनिक तकनीक से वन्यजीवों की गतिविधियों पर नजर रखी जाएगी और गांवों के पास उनके आने पर तुरंत अलर्ट जारी होगा, जिससे इंसानों पर होने वाले हमलों को रोका जा सके.
पुलिस की तर्ज पर बनेंगे आधुनिक नियंत्रण कक्ष
इस महत्वाकांक्षी परियोजना के अंतर्गत पुलिस कंट्रोल रूम की तर्ज पर राज्य के विभिन्न हिस्सों में 10 अत्याधुनिक डिजिटल नियंत्रण कक्ष स्थापित किए जाएंगे. ये नियंत्रण कक्ष पूरी तरह डिजिटल उपकरणों से लैस होंगे, जिनके माध्यम से वन विभाग के वाहनों, संसाधनों और गश्ती दलों की लाइव ट्रैकिंग की जाएगी. किसी भी आपातकालीन स्थिति में यह कंट्रोल रूम तुरंत संबंधित टीमों को सूचित कर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करेगा.
रेस्क्यू सेंटर और उपचार केंद्रों का होगा निर्माण
वन मंत्री गणेश नाईक ने बताया कि पकड़े गए वन्यप्राणियों की सुरक्षा के लिए दो नए रेस्क्यू सेंटर और घायलों के इलाज के लिए 10 ट्रांजिट ट्रीटमेंट सेंटर (उपचार केंद्र) बनाए जाएंगे. इसके साथ ही वन्यजीवों को सुरक्षित निकालने के लिए 20 जगहों पर ‘रैपिड रेस्क्यू टीम’ तैनात की जाएगी. जंगलों से सटे गांवों में सुरक्षा के लिए स्थानीय ग्रामीणों को शामिल कर 2000 ‘प्राइमरी रिस्पॉन्स टीम’ (प्राथमिक प्रतिक्रिया दल) का गठन भी किया जाएगा.
बंदरों-सूअरों की आबादी पर लगेगी लगाम
किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले जंगली सूअर, बंदर और हिरण जैसे जानवरों को पकड़ने के लिए दो हाई-टेक मोबाइल टीमें बनाई जाएंगी. यह टीमें शिकायत मिलने पर मौके पर जाकर जानवरों को पकड़ेंगी और उन्हें वापस घने जंगलों में छोड़ देंगी. इसके अतिरिक्त, बंदरों और जंगली सूअरों की आबादी को नियंत्रित करने के लिए राज्य में दो नसबंदी केंद्र स्थापित करने का भी प्रस्ताव रखा गया है. वन मंत्री ने इन सभी उपायों को तत्काल प्रभाव से लागू करने के निर्देश दिए हैं.

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