मुंबई : महाराष्ट्र की प्रशासनिक सेवा के सबसे बड़े केंद्र अर्थात मुंबई स्थित मंत्रालय (Mantralaya) की कैंटीन की स्वच्छता को लेकर खाद्य एवं औषधि प्रशासन (Food and Drug Administration-FDA) के दावों पर मुंबई उच्च न्यायालय (Bombay High Court) ने कड़ी आपत्ति जताई है। एफडीए ने सात घंटे के निरीक्षण के बाद कैंटीन को 98 प्रतिशत स्वच्छ बताया था, लेकिन अदालत द्वारा नियुक्त वकीलों ने महज आधे घंटे की जांच में कई गंभीर खामियां उजागर कर दीं। दोनों रिपोर्टों में भारी अंतर मिलने पर हाईकोर्ट ने एफडीए की जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए पूछा कि जब इतनी स्पष्ट कमियां मौजूद थीं तो सात घंटे की जांच में FDA को क्यों नहीं दिखाई दीं।
सात घंटे की जांच पर उठे सवाल
सुनवाई के दौरान एफडीए ने अदालत को बताया कि उसकी टीम ने सात घंटे तक मंत्रालय कैंटीन का निरीक्षण किया और उसे 98 प्रतिशत स्वच्छ पाया। विभाग ने यह भी दावा किया कि निरीक्षण के दौरान कैंटीन में किसी प्रकार के कीट नहीं मिले। हालांकि, इस रिपोर्ट के तुरंत बाद न्यायालय के वकीलों ने मौके पर पहुंचकर वास्तविक स्थिति का निरीक्षण किया।
वकीलों ने पकड़ी गंभीर कमियां
न्यायालय के वकीलों ने मात्र आधे घंटे के निरीक्षण में कई खामियां दर्ज कीं। रिपोर्ट के अनुसार पानी की निकासी वाली ड्रेनेज की जालियां खुली मिलीं। रेफ्रिजरेटर में साफ-सफाई का अभाव था। बेसिन के आसपास गंदगी पाई गई और रसोई में गंदा पानी जमा मिला। इन कमियों के सामने आने के बाद अदालत ने एफडीए की रिपोर्ट की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए।
हाईकोर्ट का सीधा सवाल
मुंबई उच्च न्यायालय ने एफडीए से पूछा कि जब न्यायालय के वकीलों को आधे घंटे में इतनी कमियां दिखाई दे गईं तो सात घंटे तक जांच करने वाली एफडीए टीम उन्हें क्यों नहीं देख सकी। अदालत ने कहा कि निरीक्षण रिपोर्ट और वास्तविक स्थिति के बीच इतना बड़ा अंतर गंभीर चिंता का विषय है।
मंत्रालय कैंटीन को अलग रियायत क्यों?
अदालत ने यह भी पूछा कि यदि अन्य होटल, रेस्तरां और खाद्य कारोबारियों के खिलाफ छोटी-छोटी कमियों पर कड़ी कार्रवाई की जाती है, तो मंत्रालय कैंटीन के मामले में अलग मानदंड क्यों अपनाए गए। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि कानून सभी के लिए समान है और किसी भी संस्थान को विशेष दर्जा नहीं दिया जा सकता।
या तो लाइसेंस निलंबित करें या समानता बरतें’
हाईकोर्ट ने कहा कि यदि मंत्रालय कैंटीन में पाई गई कमियों पर कार्रवाई नहीं की जाती, तो अन्य खाद्य कारोबारियों के खिलाफ मामूली कारणों से की गई कार्रवाई पर भी पुनर्विचार करना होगा। अदालत ने एफडीए से पूछा कि क्या वह मंत्रालय कैंटीन का लाइसेंस निलंबित करेगा या फिर अन्य मामलों में अपनाए गए कठोर रुख पर भी विचार करेगा।
वीआईपी संस्कृति पर अदालत की सख्त टिप्पणी
अदालत ने स्पष्ट किया कि मंत्रालय राज्य प्रशासन का केंद्र जरूर है, लेकिन वहां संचालित कैंटीन कानून से ऊपर नहीं हो सकती। न्यायालय ने कहा कि वीआईपी संस्कृति के नाम पर अलग नियम या रियायत स्वीकार नहीं की जा सकती। कानून का समान रूप से पालन ही न्याय व्यवस्था की मूल भावना है।
एफडीए की कार्यप्रणाली पर बढ़ा दबाव
एफडीए की रिपोर्ट और न्यायालय के निरीक्षण में सामने आए तथ्यों के बीच स्पष्ट विरोधाभास ने विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस मामले में अगली सुनवाई के दौरान एफडीए क्या स्पष्टीकरण देता है और मंत्रालय कैंटीन के खिलाफ क्या कार्रवाई होती है, इस पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।

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