मुंबई : मराठा आरक्षण की मांग को लेकर आंदोलनकारी मनोज जरांगे पाटिल ने शनिवार (30 मई) सुबह 10 बजे से जालना के अंतरवाली सराटी में एक बार फिर अपना आमरण अनशन शुरू कर दिया है. हमेशा टेंट की छांव में आंदोलन करने वाले जरांगे इस बार खेत में चिलचिलाती धूप के बीच खाट डालकर अनशन पर बैठ गए हैं, जिससे सरकार के पसीने छूट गए हैं. जरांगे ने दो टूक कहा है कि जब तक उन्हें धूप नहीं लगेगी, तब तक सरकार को चटके महसूस नहीं होंगे. उनके इस कड़े रुख से बैकफुट पर आई सरकार ने आनन-फानन में एक विशेष ड्राफ्ट (मसुदा) तैयार किया, जिसे लेकर मराठा आरक्षण उपसमिति के अध्यक्ष और मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल स्वयं आंदोलन स्थल पर पहुंचे.
सरकारी ड्राफ्ट में मांगों पर आश्वासन
राधाकृष्ण विखे पाटिल और भाजपा नेता प्रसाद लाड द्वारा की गई डेढ़ घंटे की मिन्नतें बेकार जाने के बाद सरकार ने जरांगे के सामने कुल 12 प्रमुख मुद्दों का एक लिखित प्रस्ताव रखा है. इस ड्राफ्ट में सरकार ने आश्वासन दिया है कि 58 लाख कुणबी क्रेडेंशियल्स की जानकारी सभी जिलों की सरकारी वेबसाइटों पर उपलब्ध करा दी गई है. इसके साथ ही हैदराबाद गजट के अनुसार कुणबी प्रमाण पत्र जारी करने के लिए विभागीय आयुक्त द्वारा एक एसओपी (SOP) तैयार की गई है, जिसके तहत अगले 3 महीनों में विशेष शिविर लगाए जाएंगे. लापरवाह अधिकारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी.
इसके अलावा, सरकार ने एक महीने के भीतर ‘मराठा आरक्षण कक्ष’ स्थापित करने, कुणबी प्रमाण पत्रों के त्वरित वितरण के लिए 8 दिनों में कलेक्टर कार्यालयों में हेल्पलाइन शुरू करने और आंदोलन में जान गंवाने वाले शेष 31 प्रदर्शनकारियों के परिवारों को 15 दिनों के भीतर वित्तीय सहायता देने का वादा किया है. मोडी भाषा के दस्तावेजों के अनुवाद के लिए विशेषज्ञों का एक पैनल भी बनाया गया है. जरांगे पाटिल ने स्पष्ट किया है कि वे इस मसुदे पर अपने कानूनी विशेषज्ञों से चर्चा करने के बाद ही अनशन वापस लेने पर विचार करेंगे.
विखे पाटिल की छांव में आने की अपील
आंदोलन स्थल पर भीषण गर्मी को देखते हुए मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल ने जरांगे से छांव में आकर चर्चा करने और तब तक अनशन स्थगित करने का अनुरोध किया. उन्होंने कहा कि जरांगे की तबीयत ठीक नहीं है, इसलिए वे छांव में बैठें और यदि चर्चा से समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन का रास्ता खुला है. हालांकि, जरांगे ने धूप में ही डटे रहने का फैसला किया. जरांगे ने गृह मंत्री देवेंद्र फडणवीस को चेतावनी भरे लहजे में कहा कि वे न्याय देने की भूमिका में आएं और पुलिस लाठीचार्ज के चक्कर में न पड़ें, अन्यथा राज्य में सरकार के लिए स्थिति कठिन हो जाएगी.
सीएम फडणवीस का रुख: ओबीसी पर अन्याय नहीं
इस पूरे घटनाक्रम पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने अपनी पहली प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सरकार मराठा आरक्षण को लेकर पूरी तरह पारदर्शक और सकारात्मक है. सरकार ने मराठा समाज के हित में कई ऐतिहासिक फैसले लिए हैं और आगे भी लिए जाएंगे, लेकिन सभी निर्णय संविधान तथा कानून के दायरे में रहकर ही किए जाएंगे ताकि वे अदालत में टिक सकें. फडणवीस ने स्पष्ट किया कि सरकार किसी एक समाज का आरक्षण छीनकर दूसरे को नहीं देगी. ओबीसी समाज को डरने की कोई जरूरत नहीं है, उनके साथ कोई अन्याय नहीं होने दिया जाएगा.
