मुंबई. राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के स्थाई कैंपस के लिए भूमि पूजन बुधवार को सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश भूषण गवई के कर कमलों से संपन्न हुआ. इस मौके पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, बॉम्बे हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश चंद्रशेखर, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, अजीत पवार सहित कई अन्य मान्यवर मंच पर तथा कार्यक्रम में मौजूद थे. सुप्रीम कोर्ट के सीजेआई गवई ने कहा कि भारत का संविधान स्वतंत्रता, न्याय और समानता के सिद्धांतों पर आधारित है. न्यायपालिका के पास न तो हथियारों की शक्ति है और न ही शब्दों का सामर्थ्य है. उन्होंने यह भी कहा कि कार्यपालिका के सहयोग के बिना अदालतों और कानूनी शिक्षा संस्थानों को आवश्यक बुनियादी ढांचा प्रदान करना मुश्किल है.
मुख्य न्यायाधीश गवई ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार द्वारा प्रदान किए गए न्यायिक बुनियादी ढांचे की देश में सर्वश्रेष्ठ में से एक के रूप में प्रशंसा की और कहा कि लोकतंत्र के तीनों स्तंभों, प्रशासन, न्यायपालिका और विधायिका को नागरिकों के कल्याण के लिए मिलकर काम करने की आवश्यकता है, क्योंकि कोई भी स्तंभ अपनी पूरी क्षमता से इस कार्य को नहीं कर सकता है.
सामाजिक न्याय के सपने को साकार करें
इससे पहले महाराष्ट्र राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के स्थाई परिसर के लिए भूमि पूजन बुधवार को सीजेआई गवई द्वारा किया गया. इस अवसर पर गवई को विशेष रूप से सम्मानित किया गया. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने गवई को प्रशस्ति पत्र प्रदान करते हुए इसे महाराष्ट्र में कानूनी शिक्षा के इतिहास में एक ऐतिहासिक क्षण बताया. अपने संबोधन में सीजेआई गवई ने गुरु नानक जयंती की बधाई दी और डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि एक वकील एक सामाजिक इंजीनियर होता है, जो सामाजिक न्याय के सपने को साकार करता है और छात्रों से सामाजिक परिवर्तन की किरण बनने का आग्रह करता है.
कानूनी शिक्षा में व्यावहारिक प्रशिक्षण पर जोर देते हुए सीजेआई गवई ने कहा कि इस क्षेत्र की बदलती जरूरतों के अनुसार गुणवत्तापूर्ण बुनियादी ढांचा महत्वपूर्ण है. उन्होंने कहा देश भर घूमने के बाद यह कह सकता हूं कि महाराष्ट्र सरकार द्वारा प्रदान किया गया अदालत का बुनियादी ढांचा देश में सर्वश्रेष्ठ में से एक है.
महाराष्ट्र राष्ट्रीय विश्वविद्यालय को अंतर्राष्ट्रीय मान्यता मिलेगी!
इस मौके पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि महाराष्ट्र में अब तीन राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय काम कर रहे हैं और उनकी स्थापना में मुख्य न्यायाधीश गवई के समर्थन का योगदान महत्वपूर्ण है. उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि महाराष्ट्र राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय जल्द ही अंतर्राष्ट्रीय मान्यता प्राप्त करेगा, और नवी मुंबई में शिक्षा परियोजना में दुनिया के शीर्ष विश्वविद्यालयों के परिसर होंगे, जिनमें से सात अगले दो से तीन वर्षों में चालू हो जाएंगे. इस समारोह में बंबई उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति चंद्रशेखर, भारती डांगरे, जस्टिस संदीप मार्ने, लोक निर्माण मंत्री शिवेंद्रराजे भोसले, महाधिवक्ता डॉ. बीरेंद्र सराफ, मुंबई विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. दिलीप उके उपस्थित थे.

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