मुंबई: महाराष्ट्र की महायुति सरकार ने राज्य में अवैध शराब और हाथभट्टी के बढ़ते जाल को जड़ से मिटाने के लिए दारूबंदी कानून को और अधिक मजबूत बनाने का निर्णय लिया है। जहरीली शराब के सौदागरों के खिलाफ अब पूरे राज्य में ‘ऑपरेशन क्लीन’ चलाया जाएगा। इस अभियान के तहत गांव-गांव में छापेमारी और कड़ी निगरानी रखी जाएगी ताकि अवैध शराब के निर्माण और बिक्री पर पूर्ण विराम लगाया जा सके। सरकार का यह कदम राज्य में जन स्वास्थ्य और कानून व्यवस्था को सुधारने की दिशा में एक निर्णायक प्रहार माना जा रहा है।

तहसील स्तर पर गठित होंगी हाई-पावर कमेटियां
प्रशासनिक कामकाज को गति देने के लिए सरकार ने तहसील स्तर पर हाई-पावर कमेटियों के पुनर्गठन का शासनादेश जारी किया है। इन समितियों की कमान उपविभागीय दंडाधिकारी (एसडीएम) के हाथों में होगी। इस विशेष समिति में पुलिस, आबकारी विभाग, स्वास्थ्य विभाग और महिला जनप्रतिनिधियों को भी शामिल किया गया है। यह समिति हर महीने अनिवार्य रूप से समीक्षा बैठक करेगी और गांवों में शराबबंदी की स्थिति का जायजा लेगी। जिलाधिकारी को यह अधिकार भी दिया गया है कि वे स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार पालकमंत्री से चर्चा कर समिति में अतिरिक्त सदस्यों को जोड़ सकते हैं।

अधिकारियों की जवाबदेही और सख्त कार्रवाई
सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अवैध शराब पर अंकुश लगाने में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अब सीधे तौर पर संबंधित थाना प्रभारी और आबकारी निरीक्षकों की जवाबदेही तय की गई है। यह निर्णय छत्रपति संभाजीनगर की अध्ययन समिति की सिफारिशों के आधार पर लिया गया है। पुलिस महानिदेशक और राज्य उत्पादन शुल्क आयुक्त को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने अधीनस्थ अधिकारियों से जमीनी स्तर पर कार्रवाई सुनिश्चित कराएं। लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की गाज गिरना तय है।

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