250 करोड़ के बजट पर ठेकेदारों की नजर, बोरिवली में खुला भ्रष्टाचार का मामला
बोरिवली में नाला सफाई का चौंकाने वाला खुलासा
मुंबई : बीएमसी मानसून के दौरान मुंबई महानगर को जलभराव से बचाव के लिए हर साल करोड़ों रुपए खर्च करती है लेकिन फिर भी पहली बारिश में नाला सफाई काम की पोल खुल जाती है। इसकी वजह का खुलासा आगामी मानसून के मद्देनजर मुंबई में की जा रही नाला सफाई के दौरान हुआ है। नालासफाई में ठेकेदारों द्वारा की जाने वाली गड़बड़ी का राजफाश हो गया है। बोरिवली इलाके में नाले से गाद निकालने के बजाय उसमें सिमेंट सड़क के स्लैब और डिवाइडर जैसे भारी मलबे को दबाया जा रहा था।
गाद की जगह मलबा डालकर बनाई जा रही परत
जांच में सामने आया कि ठेकेदार नाले की सफाई करने की बजाय सड़क खुदाई से निकला मलबा उसमें डालकर एक नई परत बना दी। यह काम नाला सफाई के नाम पर किया जा रहा था, जिससे साफ तौर पर फर्जीवाड़े की आशंका जताई जा रही है।
250 करोड़ के बजट पर सवाल
इस साल बड़े नालों की सफाई के लिए लगभग 160 करोड़ और छोटे नालों के लिए 90 करोड़ रुपए का बजट रखा गया है। बावजूद इसके, जमीन पर काम के बजाय केवल कागजी खानापूर्ति कर जनता के पैसे का दुरुपयोग किए जाने के आरोप लग रहे हैं।
अधिकारियों की भूमिका पर भी उठे सवाल
आरोप है कि ठेकेदार मलबे का वजन बढ़ाकर बिल बना रहे हैं और अधिकारी एसी दफ्तरों में बैठकर इसे नजरअंदाज कर रहे हैं। इस पूरे मामले में प्रशासन की भूमिका भी संदेह के घेरे में है।
बारिश में फिर डूबेगी मुंबई?
अगर इतनी बड़ी राशि खर्च होने के बावजूद सही तरीके से नाला सफाई नहीं हुई, तो मानसून में मुंबई के फिर से जलमग्न होने की आशंका बढ़ गई है। इससे आम नागरिकों में नाराजगी देखी जा रही है।
दोषियों पर कार्रवाई की मांग
भाजपा विधायक संजय उपाध्याय ने मौके पर पहुंचकर इस मामले को उजागर किया। उन्होंने कहा, “यह खुला भ्रष्टाचार है। नाले में गाद की जगह सड़क का मलबा डाला गया है और उसे छुपाने के लिए ऊपर से गाद की परत चढ़ाई गई है। जब तक दोषियों पर आपराधिक कार्रवाई नहीं होती, तब तक इस मलबे को हटाने नहीं दिया जाएगा।”
जनता के पैसे पर ‘स्लैब’ घोटाला
पूरे मामले ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर 250 करोड़ रुपए खर्च होने के बावजूद अगर नालों की सफाई सही से नहीं हो रही, तो इसकी जवाबदेही कौन तय करेगा। मुंबईकर अब इस कथित घोटाले पर सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
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