मुंबई: पुलिस ने एक ऐसे शातिर ठग को गिरफ्तार किया है, जिसने शादी का झांसा देकर एक-दो नहीं बल्कि 25 से अधिक महिलाओं को अपना शिकार बनाया। आरोपी वर्षों तक महिलाओं को शादी का वादा कर अपने प्रेम जाल में फंसाता रहा और उनका विश्वास जीतने के बाद उनसे लाखों-करोड़ों रुपए ठगता था। पुलिस अब इस पूरे मामले की गहन जांच कर रही है। (Miscreants dupe 25 women on pretext of marriage)
वैवाहिक वेबसाइटों के जरिए बनाता था शिकार
पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी अनुज कुमार चंद्रप्रकाश त्रिवेदी वैवाहिक वेबसाइटों पर खुद को एक आदर्श वर के रूप में पेश करता था। इसके बाद वह अलग-अलग राज्यों की महिलाओं से संपर्क कर उन्हें शादी का भरोसा देता और भावनात्मक रूप से अपने जाल में फंसा लेता था। अब तक उसके खिलाफ 25 से अधिक महिलाओं से ठगी करने की बात सामने आई है।
तलाकशुदा और असहाय महिलाओं को बनाता था निशाना
जांच अधिकारियों के अनुसार, अनुज कुमार खासतौर पर तलाकशुदा और असहाय महिलाओं को अपना निशाना बनाता था। वह नकली पहचान और झूठी कहानियों के सहारे महिलाओं का भरोसा जीतता और फिर उनसे पैसे ऐंठता था।
ग्रेटर नोएडा से हुई गिरफ्तारी
मीरा-भायंदर वसई-विरार पुलिस (Mira Bhayander Vasai Virar Police) के उपायुक्त संदीप डोईफोडे ने बताया कि आरोपी की तलाश उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा तक पहुंची। वह वहां फर्जी पहचान के साथ रह रहा था। पुलिस ने 24 मई को उसे गिरफ्तार किया। जांच में पता चला कि वह अजय अग्रवाल, अजय संतोष सिंह और जयप्रकाश रमेशचंद गुप्ता जैसे कई फर्जी नामों का इस्तेमाल करता था।
75 वर्षीय महिला की शिकायत से खुला मामला
इस ठगी का पर्दाफाश मार्च 2022 में तब हुआ, जब 75 वर्षीय एक महिला ने नयानगर पुलिस स्टेशन (Naya nagar Police station) में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के अनुसार, उनकी 45 वर्षीय बेटी के लिए दिए गए वैवाहिक विज्ञापन के जवाब में आरोपी ने संपर्क किया था। खुद को अजय अग्रवाल बताकर उसने महिला की बेटी से नजदीकियां बढ़ाईं और मार्च 2019 में उससे शादी करने का दावा किया। इसके बाद उसकी ठगी की परतें धीरे-धीरे खुलती चली गईं।
अन्य पीड़ित महिलाओं की तलाश जारी
पुलिस का मानना है कि आरोपी के जाल में फंसी महिलाओं की संख्या और भी अधिक हो सकती है। इसी कारण पुलिस उसके पुराने रिकॉर्ड, बैंक लेन-देन और विभिन्न राज्यों में उसके संपर्कों की जांच कर रही है, ताकि सभी पीड़ितों तक पहुंचा जा सके और ठगी की पूरी रकम का पता लगाया जा सके।

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