मुंबई. महाराष्ट्र विधानमंडल का मानसून सत्र सोमवार से शुरू हो रहा है, लेकिन उससे पहले ही राज्य की राजनीति गरमा गई है. महाविकास आघाड़ी (मविआ) ने सरकार की पारंपरिक चाय पार्टी का बहिष्कार कर मुख्यमंत्री को छह पन्नों का पत्र सौंपते हुए 13 प्रमुख जनहित के मुद्दों पर जवाब मांगा है. विपक्ष ने स्पष्ट किया है कि सत्र के दौरान किसानों की कर्जमाफी, सूखे जैसे हालात, कानून-व्यवस्था, भ्रष्टाचार, महंगाई और हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों को लेकर सरकार को कटघरे में खड़ा किया जाएगा. (Monsoon session begins with tea party boycott: Opposition to corner govt on 13 issues including loan waiver)
शिवालय में हुई मविआ की बैठक
सत्र की पूर्व संध्या पर शिवालय में महाविकास आघाड़ी की बैठक हुई. इसमें शिवसेना उद्धव बालासाहेब ठाकरे (यूबीटी) के भास्कर जाधव, अनिल परब और अंबादास दानवे, कांग्रेस के सतेज पाटिल और अमीन पटेल तथा राष्ट्रवादी कांग्रेस (शरद पवार) के जयंत पाटिल, जितेंद्र आव्हाड और शशिकांत शिंदे मौजूद रहे. बैठक के बाद नेताओं ने संयुक्त प्रेस वार्ता कर सरकार की चाय पार्टी का बहिष्कार करने की घोषणा की.
कर्जमाफी फर्जी, किसानों का 7/12 करें कोराभास्कर जाधव
शिवसेना (यूबीटी) के विधायक भास्कर जाधव (Bhaskar Jadhav) ने कहा कि राज्य में सूखे जैसे हालात हैं, बुवाई प्रभावित हो रही है और किसान गंभीर संकट से गुजर रहे हैं. उन्होंने सरकार से तत्काल सूखा घोषित करने की मांग की. जाधव ने आरोप लगाया कि सरकार की घोषित किसान कर्जमाफी “फर्जी” है और किसानों को शर्तों में उलझाया गया है. उन्होंने मांग की कि सरकार सभी किसानों का 7/12 रिकॉर्ड पूरी तरह कर्जमुक्त करे. जाधव ने ‘लाडली बहन’ योजना पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि केवाईसी प्रक्रिया के बाद करीब 81 लाख महिलाओं को अपात्र घोषित कर दिया गया, जिससे योजना की पारदर्शिता पर सवाल खड़े होते हैं.
जल संकट, कानून-व्यवस्था पर ध्यान नहीं- जयंत पाटिल
राष्ट्रवादी कांग्रेस (शरद पवार) के वरिष्ठ नेता जयंत पाटिल (Jayant Patil) ने कहा कि एल-नीनो और संभावित सूखे की चेतावनी के बावजूद सरकार ने जल प्रबंधन की कोई ठोस तैयारी नहीं की. उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में कानून-व्यवस्था चरमरा गई है, महिलाओं पर अत्याचार बढ़े हैं और ड्रग्स का नेटवर्क तेजी से फैल रहा है. पाटिल ने कहा कि नशीले पदार्थों के मामलों में छोटे लोगों पर कार्रवाई होती है, जबकि इसके मास्टरमाइंड खुले घूमते हैं. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पिछले सत्र में उठाए गए देवस्थान जमीन घोटाले पर भी सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की.
56 प्रतिशत कमीशन वाली सरकार- सतेज पाटिल
विधान परिषद में कांग्रेस विधायक दल के नेता सतेज पाटिल (Satej पाटिल) ने महायुति सरकार को “56 प्रतिशत कमीशन सरकार” करार दिया. उन्होंने आरोप लगाया कि ठेकेदारों को अपने बिलों का भुगतान कराने के लिए भारी कमीशन देना पड़ रहा है. उनके अनुसार एक लाख करोड़ रुपए से अधिक के विकास कार्यों के बिल लंबित हैं, जल जीवन मिशन के बजट में कटौती हुई है और कई विकास परियोजनाएं प्रभावित हुई हैं. सतेज पाटिल ने कहा कि राज्य पर करीब साढ़े नौ लाख करोड़ रुपए का कर्ज हो चुका है, जिससे महाराष्ट्र की आर्थिक स्थिति चिंताजनक बन गई है.
मुद्दों का जवाब दे सरकार- जितेंद्र आव्हाड
राष्ट्रवादी कांग्रेस (शरद पवार) के विधायक जितेंद्र आव्हाड ने कहा कि सरकार विपक्ष द्वारा उठाए गए मुद्दों का जवाब देने के बजाय केवल पत्र के व्याकरण पर टिप्पणी करती है. उन्होंने कहा कि सरकार की जिम्मेदारी विपक्ष के पत्र में उठाए गए प्रत्येक मुद्दे का जवाब देने की है, न कि उनका मजाक उड़ाने की.
सदन में उठेंगे कई अहम मुद्दे
विपक्ष ने कहा कि मानसून सत्र में किसानों की कर्जमाफी, सूखे की घोषणा, पानी का संकट, पिंपरी-चिंचवड़ जहरीली शराब कांड, अनुसूचित जाति आरक्षण के उपवर्गीकरण, कानून-व्यवस्था, महिलाओं पर बढ़ते अत्याचार, महंगाई, ईंधन संकट, नीट पेपर लीक, वृक्ष कटाई, शक्तिपीठ महामार्ग परियोजना और हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों को प्रमुखता से उठाया जाएगा. महाविकास आघाड़ी का कहना है कि वह औपचारिक कार्यक्रमों में शामिल होने के बजाय राज्य के 13 करोड़ नागरिकों से जुड़े मुद्दों पर सरकार को सदन के भीतर जवाबदेह बनाएगी.

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