भूस्खलन के खतरे से सहमे पहाड़ी इलाकों के निवासी
329 सुरक्षा कार्य अब भी अधूरे
मुंबई: मानसून की दस्तक से पहले मुंबई के पहाड़ी ढलानों पर बसे झुग्गी-झोपड़ियों के लाखों निवासी एक बार फिर भय और असुरक्षा के माहौल में जीने को मजबूर हैं। महानगरपालिका के मानसून-पूर्व तैयारियों के दावों के बावजूद शहर के संवेदनशील इलाकों में रहने वाले करीब एक लाख लोगों पर भूस्खलन का गंभीर खतरा मंडरा रहा है। बीएमसी आपदा प्रबंधन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2021 से 2025 के बीच मुंबई में भूस्खलन की 107 घटनाएं दर्ज हुईं, जिनमें 31 लोगों की मौत हुई और कई अन्य घायल हुए। ऐसे में इस वर्ष भी भारी बारिश से पहले सुरक्षा कार्यों के अधूरे रहने से लोगों की चिंता बढ़ गई है।
सुरक्षा परियोजनाओं की धीमी रफ्तार बढ़ा रही चिंता
भारत के भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआई) ने वर्ष 2018 में मुंबई के पहाड़ी क्षेत्रों का अध्ययन कर संवेदनशील ढलानों पर रिटेनिंग वॉल और अन्य सुरक्षात्मक संरचनाएं बनाने की सिफारिश की थी। इसके आधार पर वर्ष 2023 से 2026 के बीच कुल 749 सुरक्षा कार्य शुरू किए गए। हालांकि, इनमें से केवल 440 कार्य ही पूरे हो सके हैं, जबकि 329 महत्वपूर्ण परियोजनाएं अभी भी अधूरी हैं या शुरू होने का इंतजार कर रही हैं। लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) और झुग्गी पुनर्वास प्राधिकरण (एसआरए) की ओर से किए जा रहे इन कार्यों में हो रही देरी को लेकर स्थानीय नागरिकों में नाराजगी और चिंता दोनों बढ़ रही हैं।
बजट संकट और प्रशासनिक अड़चनें बनीं बड़ी चुनौती
विशेषज्ञों और अधिकारियों के अनुसार सुरक्षा कार्यों में देरी का सबसे बड़ा कारण पर्याप्त वित्तीय संसाधनों की कमी और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय का अभाव है। वर्ष 2020 से 2023 के दौरान इस परियोजना के लिए 400 करोड़ रुपये से अधिक का बजट उपलब्ध कराया गया था, लेकिन बाद के वर्षों में धन आवंटन की रफ्तार धीमी पड़ गई। बीएमसी, एसआरए, कलेक्टर कार्यालय और पीडब्ल्यूडी जैसी कई एजेंसियों की भागीदारी के कारण फाइलों की मंजूरी और निधि वितरण की प्रक्रिया भी जटिल हो गई है। इसके अलावा कई संवेदनशील इलाकों में जल निकासी व्यवस्था प्रभावित हो चुकी है। रिटेनिंग वॉल के वीप होल और ड्रेनेज सिस्टम अतिक्रमण या रखरखाव की कमी के कारण बंद हो गए हैं, जिससे बारिश के दौरान पानी का दबाव बढ़ने पर दीवारों के क्षतिग्रस्त होने और भूस्खलन की आशंका और अधिक बढ़ जाती है।
46 स्थान ‘अत्यंत खतरनाक’ श्रेणी में
मुंबई में कुल 249 भूस्खलन-प्रवण ढलानों और 150 से 200 मीटर ऊंची पहाड़ियों की पहचान की गई है। इनमें से 74 स्थानों को खतरनाक तथा 46 स्थानों को ‘अत्यंत खतरनाक’ श्रेणी में रखा गया है। सबसे अधिक जोखिम एस वार्ड (कांजुरमार्ग-विक्रोली) में है, जहां 116 संवेदनशील स्थल चिन्हित किए गए हैं। इसके अलावा घाटकोपर में 32 और कुर्ला में 17 जोखिम वाले क्षेत्र मौजूद हैं। चिंता की बात यह है कि केवल झुग्गी बस्तियां ही नहीं, बल्कि मालाबार हिल जैसे उच्चवर्गीय और प्रतिष्ठित इलाकों में भी भूस्खलन का खतरा बना हुआ है। यहां 15 ऐसे स्थल चिन्हित किए गए हैं जहां चट्टानों के खिसकने की आशंका बनी रहती है।
मानसून से पहले बढ़ी सुरक्षा की मांग
बारिश का मौसम शुरू होने से पहले स्थानीय निवासियों और सामाजिक संगठनों ने प्रशासन से लंबित सुरक्षा कार्यों को युद्धस्तर पर पूरा करने की मांग की है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अधूरी परियोजनाओं को समय पर पूरा नहीं किया गया और जल निकासी व्यवस्था को दुरुस्त नहीं किया गया, तो इस मानसून में भूस्खलन की घटनाएं फिर जान-माल के बड़े नुकसान का कारण बन सकती हैं। मुंबई के संवेदनशील पहाड़ी इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए यह मानसून एक बार फिर बड़ी परीक्षा साबित हो सकता है।
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