माइक्रो जोनिंग से मुंबईकरों को मिलेगी राहत
सुविधाओं और विकास स्तर के आधार पर तय होंगे संपत्ति मूल्य

मुंबई, 10 जून. मुंबई जैसे महानगर में अब गगनचुंबी इमारतों और झोपड़पट्टियों को एक समान रेडी रेकनर दरों का बोझ नहीं उठाना पड़ेगा। राज्य सरकार ने मुंबई में माइक्रो जोनिंग सर्वेक्षण शुरू करने का निर्णय लिया है, जिसके तहत क्षेत्र में उपलब्ध सुविधाओं, विकास की स्थिति और जमीन के वास्तविक उपयोग को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग रेडी रेकनर दर तय किए जाएंगे। इससे लाखों मुंबईकरों, विशेष रूप से मध्यम वर्ग और झोपड़पट्टी में रहने वाले नागरिकों को संपत्ति लेन-देन में राहत मिलने की उम्मीद है।
मुंबई में शुरू हुआ माइक्रो जोनिंग सर्वेक्षण
राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने जानकारी दी कि मुंबई शहर में माइक्रो जोनिंग सर्वेक्षण के लिए महाराष्ट्र रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशन सेंटर (एमआरएसएसी) की नियुक्ति की गई है। यह संस्था जीआईएस आधारित तकनीक के माध्यम से शहर के विभिन्न क्षेत्रों का विस्तृत अध्ययन कर विकास और उपलब्ध सुविधाओं के अनुसार संपत्ति मूल्यांकन की नई प्रणाली तैयार करेगी।
एक ही इलाके में अलग-अलग विकास को मिलेगा न्याय
अब तक कई स्थानों पर एक ही क्षेत्र में स्थित झोपड़पट्टियों, चॉलों और आलीशान सोसायटियों पर समान रेडी रेकनर दर लागू होने से आम नागरिकों को नुकसान उठाना पड़ता था। नई माइक्रो जोनिंग व्यवस्था के बाद संपत्ति की वास्तविक स्थिति और आसपास की सुविधाओं के आधार पर अधिक सटीक और न्यायसंगत दरें निर्धारित की जाएंगी।
अगले आर्थिक वर्ष से लागू करने की तैयारी
राजस्व विभाग सर्वेक्षण पूरा होने के बाद अगले आर्थिक वर्ष से इस नई व्यवस्था को लागू करने की तैयारी कर रहा है। मुंबई में इसे लागू करने के बाद अगले दो चरणों में महाराष्ट्र के अन्य महानगरों और क्षेत्रों में भी माइक्रो जोनिंग व्यवस्था लागू की जाएगी।
मुख्यमंत्री की पहल पर लिया गया फैसला
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के सुझाव पर यह महत्वाकांक्षी अभियान शुरू किया गया है। राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा कि इस निर्णय से रेडी रेकनर दरों में पारदर्शिता आएगी और मुंबई सहित पूरे राज्य में आम नागरिकों को संपत्ति व्यवहार के दौरान बड़ी राहत मिलेगी।

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