मुंबई. सत्र न्यायालय ने 34 साल पुराने एक मामले में आरोपी को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया है। 64 वर्षीय डेसमंड मिरांडा पर आरोप था कि उसने 1990 में नतालिन नामक महिला को शादी से इनकार करने पर जिंदा जला दिया था। आरोपी 34 वर्षों से फरार था और पिछले साल सितंबर में गिरफ्तार हुआ था।
क्या है पूरा मामला?
11 नवंबर, 1990 को सांताक्रुज पूर्व स्थित वाकोला इलाके में नतालिन को गंभीर रूप से जलती हुई मिली थी। उसके बहनोई जोसफ काउटिन्हो ने आरोप लगाया कि मिरांडा ने शादी प्रस्ताव ठुकराए जाने पर उसे आग लगा दी।
बयान में विरोधाभास
अस्पताल में नतालिन ने पहले आत्महत्या का बयान दिया, लेकिन बाद में मिरांडा पर आरोप लगाया। 16 नवंबर, 1990 को उनकी मौत हो गई।
जमानत के बाद फरार हुआ था आरोपी
पुलिस ने आरोपी को 15 नवंबर, 1990 को गिरफ्तार किया था लेकिन 6 दिसंबर, 1990 को उसे जमानत मिल गई। नतालिन का 16 नवंबर, 1990 को इलाज के दौरान निधन हो गया। जमानत मिलने के बाद आरोपी फरार हो गया था। 34 साल बाद सितंबर 2023 में पुलिस ने मिरांडा को फिर से गिरफ्तार किया था।
कहां गए सबूत?
अक्टूबर 2025 में जब अदालत ने सुनवाई शुरू करने का फैसला किया, तो पता चला कि अभियोजन पक्ष मूल एफआईआर, पंचनामा, पुलिस कागजात या पोस्टमार्टम रिपोर्ट पेश नहीं कर पाया। मूल दस्तावेजों का पता नहीं चल सका। अभियोजन पक्ष ने काउटिन्हो और नतालिन की बेटी को पेश किया, लेकिन दोनों ही घटना के प्रत्यक्षदर्शी नहीं थे। अदालत ने यह भी नोट किया कि प्रमुख गवाहों की मृत्यु हो चुकी है। अदालत ने कहा कि पीड़िता के ‘मृत्यु पर दिया गया बयान’ साबित नहीं हो सका और बचे सबूत युक्तिसंगत संदेह से परे आरोप साबित करने के लिए अपर्याप्त थे। इसलिए सबूतों की कमी को देखते हुए आरोपी को बरी करने का फैसला सुनाया गया।

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