मुंबई सेशन कोर्ट ने सुनाया फैसला
मुंबई: वर्ष 2021 में नए साल की पूर्व संध्या पर खार में हुई हत्या के मामले में 26 वर्षीय आरोपी को मुंबई की एक सेशन कोर्ट ने दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इस मामले में कोर्ट ने सह आरोपी महिला को बरी कर दिया।
वर्ष 2021 की पहली भोर अर्थात 1 जनवरी 2021 की मध्य रात्रि के बाद सामने आए सनसनीखेज जानवी कुकरेजा हत्याकांड केस में सेशन कोर्ट ने शनिवार को अपना फैसला सुनाया। कोर्ट ने जानवी के दोस्त श्री जोगदणकर को दोषी माना और उम्र कैद की सजा सुनाई, जबकि दूसरी आरोपी दिया पडलकर को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया।
क्या है मामला?
19 वर्षीय जानवी की 1 जनवरी 2021 की मध्य रात्रि के दौरान खार पश्चिम स्थित एक 5 मंजिलों वाली इमारत में हत्या कर दी गई थी। बाद में जानवी की लाश को दूसरी मंजिल की सीढ़ियों से नीचे फेंक कर वारदात को हादसा बताने का प्रयास किया गया था।
पीएम रिपोर्ट से गहराया शक
जान्हवी की पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने इस हत्याकांड की क्रूरता दुनिया के सामने आई. उसके शरीर पर चोट के 48 निशान पाए गए थे. पीड़ित की मां निधि कुकरेजा के वकील त्रिवनकुमार करनानी ने कोर्ट में दलील दी कि यह हत्या अत्यंत जघन्य और बर्बर तरीके से की गई थी. निधि कुकरेजा ने अदालत के सामने भावुक होते हुए कहा था कि वह बदला नहीं, बल्कि अपनी बेटी के लिए न्याय और गरिमा चाहती हैं, ताकि समाज को यह संदेश मिले कि जान्हवी की जिंदगी कानून की नजर में कीमती थी.
सीसीटीवी और डीएनए रिपोर्ट ने खोला राज
इस मामले में कोई चश्मदीद गवाह मौजूद नहीं था. पुलिस ने परिस्थितिजन्य साक्ष्यों का सहारा लिया. अभियोजन पक्ष ने मामले को साबित करने के लिए 49 गवाहों के बयान दर्ज कराए. फुटेज में आरोपी जोगदणकर को फटी हुई शर्ट और उस पर खून के धब्बों के साथ बदहवास हालत में बिल्डिंग से बाहर निकलते देखा गया था. फॉरेंसिक लैब की रिपोर्ट और डीएनए प्रोफाइलिंग ने घटना स्थल पर जोगदणकर की मौजूदगी की पुष्टि हुई. आरोपी की शर्ट पर जान्हवी के खून के निशान भी मिले.
कोर्ट ने माना जोगदणकर को दोषी
अतिरिक्त सेशन जज सत्यनारायण नवंदर ने जोगदणकर को भारतीय दंड संहिता के प्रासंगिक प्रावधानों के तहत हत्या का दोषी पाया। अदालत ने कहा कि आरोपी के घटना के बाद के कृत्य उसकी दोषी साबित करते हैं और ऐसी कोई परिस्थिति नहीं है, जो उसकी बेगुनाही की ओर इशारा करती हो। पुलिस के अनुसार, जोगदणकर और पडलकर ने एक इमारत की छत पर नए साल की पूर्व संध्या पार्टी के बाद कुकरेजा पर हमला कर उनकी हत्या कर दी और उन्हें पांचवीं मंजिल से सीढ़ियों के नीचे घसीटा। पुलिस ने दावा किया था कि लड़ाई जोगदणकर और पडलकर के बीच कथित नजदीकी को लेकर हुई थी।
अभियोजन पक्ष के तर्क
विशेष लोक अभियोजक प्रदीप घरत के नेतृत्व में अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि कुकरेजा के शरीर पर 40 से अधिक चोटें थीं। अभियोजन पक्ष ने इमारत की सीसीटीवी फुटेज पर भी भरोसा किया, जिसमें जोगदणकर को घटनास्थल से “शांत और चुपचाप” निकलते हुए दिखाया गया था, जहां कुकरेजा का शव पड़ा था।
घरत ने आगे कहा कि जोगदणकर ने अपनी चोटों के बारे में विरोधाभासी बयान दिए थे।
बचाव पक्ष का तर्क
हालांकि बचाव पक्ष ने दावा किया कि जोगदणकर के पार्टी छोड़ने के बाद कुकरेजा की मृत्यु हुई और उसकी सुबह करीब 2.05 बजे उनसे बातचीत भी हुई थी। अपनी चोटों के बारे में जोगदणकर ने दावा किया कि अंधेरे में सीढ़ियों पर किसी ने पीछे से उस पर हमला किया था, जिसे वह देख नहीं सका।
अदालत का निर्णय
चूंकि घटनास्थल पर कोई प्रत्यक्षदर्शी मौजूद नहीं था, इसलिए अदालत ने परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर भरोसा किया। मामले के तथ्यों को ध्यान में रखते हुए अदालत ने नोट किया कि मृतका पार्टी के दौरान जोगदणकर के “फ्लर्ट करने वाले व्यवहार” से गहरा आघात पहुंचा था। परेशानी की स्थिति में वह समारोह छोड़कर इमारत की सीढ़ियों पर चली गई। अदालत ने कहा कि दूसरी मंजिल की सीढ़ियों पर जोगदणकर और मृतका के बीच झगड़ा हुआ। बहस शारीरिक हाथापाई में बदल गई और गुस्से में आरोपी ने कुकरेजा पर हमला किया और उन्हें दूसरी मंजिल से धक्का दे दिया, जिससे उनकी मृत्यु हो गई।
घटना के बाद का व्यवहार निर्णायक
अदालत ने नोट किया कि जोगदणकर के घटना के बाद के आचरण ने मामले में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अदालत ने बताया कि आरोपी ने चोटों का विवरण नहीं दिया और अस्पताल में डॉक्टर को घावों के बारे में गलत जानकारी दी। घटना के बाद जब दोस्तों ने संपर्क किया तो जोगदणकर “शांत और उदासीन” रहा और पीड़िता के गिरने का उल्लेख करने में विफल रहा।
दिया पडलकर को मिला संदेह का लाभ
दिया पडलकर की भूमिका पर सेशन जज ने कहा कि अभियोजन पक्ष ने अपराध स्थल पर उसकी उपस्थिति साबित की है, लेकिन “अपराध करने में उसकी संलिप्तता” संदिग्ध है। अदालत ने कहा कि हत्या करने के लिए दोनों आरोपियों के बीच कोई सामान्य इरादा स्थापित नहीं हुआ है। इसलिए उसे संदेह का लाभ देना उचित है।
पीड़ित परिवार की प्रतिक्रिया
कुकरेजा की मां निधि ने बाद में कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर भरोसा है, लेकिन वह पडलकर की बरी होने से खुश नहीं हैं। उनके वकील त्रिवनकुमार करनानी ने कहा, “अदालत ने घटनास्थल पर पडलकर की उपस्थिति को स्वीकार किया है, फिर भी उसे संदेह का लाभ दिया गया है। हम फैसले का अध्ययन करेंगे और उसके अनुसार निर्णय लेंगे।”
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