नवरात्रि में मां दुर्गा के नव स्वरूपों की उपासना की जाती है. इसमें पहले दिन मां शैलपुत्री की आराधना की जाती है. इसलिए कलश स्थापना के बाद देवी के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री का ध्यान करें. मां शैलपुत्री को सफेद रंग अत्यंत प्रिय है, इसलिए उन्हें सफेद पुष्प (जैसे चमेली) या लाल गुड़हल का फूल अर्पित करें. भोग के रूप में उन्हें गाय के घी से बने मिष्ठान्न या पकवान अर्पित करना सर्वोत्तम माना जाता है. इसके बाद घी का दीपक जलाकर नीचे दिए गए मंत्रों का जाप करें और अंत में मां की आरती करें.

मां दुर्गा को सर्वप्रथम शैलपुत्री के रूप में पूजा जाता है. हिमालय के वहां पुत्री के रूप में जन्म लेने के कारण उनका नामकरण हुआ शैलपुत्री. इनका वाहन वृषभ है, इसलिए यह देवी वृषारूढ़ा के नाम से भी जानी जाती हैं. इस देवी ने दाएं हाथ में त्रिशूल धारण कर रखा है और बाएं हाथ में कमल सुशोभित है. यही देवी प्रथम दुर्गा हैं. इन्हें सती के नाम से भी जाना जाता है.
पहली शक्ति मां शैलपुत्री की कथा
एक बार जब प्रजापति ने यज्ञ किया तो इसमें सारे देवताओं को निमंत्रित किया, लेकिन भगवान शंकर को नहीं. सती यज्ञ में जाने के लिए विकल हो उठीं. शंकरजी ने कहा कि सारे देवताओं को निमंत्रित किया गया है, उन्हें नहीं, इसलिए वहां जाना उचित नहीं है.
सती की जिद के कारण भगवान भोलेनाथ ने उन्हें यज्ञ में जाने की अनुमति दे दी. सती जब घर पहुंचीं तो सिर्फ मां ने ही उन्हें स्नेह दिया. बहनों की बातों में व्यंग्य और उपहास के भाव थे. भगवान शंकर के प्रति भी तिरस्कार का भाव है. दक्ष ने भी उनके प्रति अपमानजनक वचन कहे. इससे सती व्यथित हो गईं. वह अपने पति का यह अपमान न सह सकीं और योगाग्नि कूद कर उन्होंने आत्मदाह कर लिया. इससे क्रोधित शिव शंकर ने दक्ष के उस यज्ञ का विध्वंस करा दिया. यही सती अगले जन्म में शैलराज हिमालय की पुत्री के रूप में जन्मीं और शैलपुत्री कहलाईं. पार्वती और हेमवती भी इसी देवी के अन्य नाम हैं. शैलपुत्री का विवाह एक बार फिर से भगवान शंकर से हुआ. शैलपुत्री शिवजी की अर्द्धांगिनी बनीं. इनका महत्व और शक्ति अनंत है.


इन मंत्रों का करें जाप
मां शैलपुत्री की पूजा के दौरान मंत्रों का जाप करने से वे जल्दी प्रसन्न होती हैं और जीवन में स्थिरता व दृढ़ता का आशीर्वाद देती हैं.
बीज मंत्र:
ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः॥

स्तुति मंत्र:
या देवी सर्वभूतेषु मां शैलपुत्री रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
इन मंत्रों के साथ अपनी पूजा संपन्न कर देवी से परिवार की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना करें.

डिस्क्लेमर : इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं एवं धार्मिक ग्रंथों पर आधारित है. ‘तह की बात’ यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता की जिम्मेदारी नहीं लेता है. कोई भी अनुष्ठान स्वविवेक के आधार पर अथवा किसी जानकार से परामर्श के बाद करें. तह की बात किसी नुकसान के लिए उत्तरदायी नहीं होगा.

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