मुंबई : महाराष्ट्र की राजनीति में चर्चित ‘ऑपरेशन टाइगर’ को लेकर सरगर्मी लगातार तेज हो रही है। शिवसेना के 19 जून को होने वाले वर्धापन दिन पर शिवसेना उद्धव बालासाहेब ठाकरे (यूबीटी) के कुछ सांसदों और विधायकों की संभावित बगावत की चर्चाओं ने राजनीतिक माहौल गर्म कर दिया है। इसी बीच केंद्र में मंत्री पद की मांग और उसे लेकर अंदरूनी खींचतान के कारण कथित ऑपरेशन टाइगर की रफ्तार धीमी पड़ने की बात भी सामने आ रही है। वहीं, यूबीटी (Shivsena Uddhav Balasaheb Thackeray- UBT) सांसद अरविंद सावंत (Arvind Sawant) ने संभावित बागी सांसदों को कड़ा संदेश देते हुए संवैधानिक कार्रवाई की चेतावनी दी है।
वर्धापन दिन पर बड़े सियासी झटके की अटकलें
19 जून को शिवसेना के वर्धापन दिन पर महाराष्ट्र की राजनीति में बड़े सियासी घटनाक्रम की चर्चा जोरों पर है। राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, इसी दिन ऑपरेशन टाइगर (Operation Tiger) को अंतिम रूप दिए जाने की योजना हो सकती है। दावा किया जा रहा है कि ठाकरे गुट के कुछ सांसद लोकसभा में अलग समूह बनाने की तैयारी में हैं, जबकि कुछ विधायकों के भी शिंदे गुट (Eknath Shinde) के संपर्क में होने की चर्चाएं हैं। हालांकि, इस संबंध में अब तक किसी भी पक्ष की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
मंत्री पद की मांग पर फंसा पेंच
सूत्रों के अनुसार, ठाकरे गुट से अलग होने की तैयारी में जुटे सांसदों के समूह ने केंद्र सरकार में एक राज्यमंत्री पद की मांग की है। मंत्री पद को लेकर सकारात्मक संकेत मिलने की चर्चा है, लेकिन एक ही पद के लिए तीन से चार सांसदों के दावेदार होने के कारण समूह के भीतर मतभेद पैदा हो गए हैं। यही वजह है कि संभावित दल-बदल का समीकरण फिलहाल अटका हुआ बताया जा रहा है।
छह सांसदों का समूह और मराठवाड़ा की चर्चा
राजनीतिक सूत्रों के मुताबिक, ठाकरे गुट के छह सांसदों का एक समूह उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ( Eknath Shinde) की शिवसेना के संपर्क में है। इस समूह का नेतृत्व मराठवाड़ा के एक वरिष्ठ सांसद के पास होने की चर्चा है। मराठवाड़ा से यूबीटी के तीन सांसद संजय आष्टिकर पाटिल, संजय जाधव और ओमराजे निंबालकर हैं। ऐसे में इसी क्षेत्र के किसी सांसद को केंद्र में मंत्री पद मिलने की संभावना जताई जा रही है।
शिंदे की अनंत कलसे से मुलाकात ने बढ़ाईं अटकलें
सोमवार शाम उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने महाराष्ट्र विधानमंडल के पूर्व सचिव और संसदीय नियमों के जानकार अनंत कलसे से मुलाकात की। इसके बाद ऑपरेशन टाइगर को लेकर राजनीतिक चर्चाएं और तेज हो गईं। माना जा रहा है कि शिंदे गुट सांसदों के साथ-साथ विधायकों को भी अपने साथ जोड़ने की रणनीति पर काम कर रहा है।
16 विधायक और 7 सांसद संपर्क में
शिंदे गुट के विधायक कृपाल तुमाने (Kripal Tumane) ने दावा किया है कि उद्धव ठाकरे ( Uddhav Thackeray) की कार्यशैली से नाराज 16 विधायक और 7 सांसद एकनाथ शिंदे के संपर्क में हैं। उन्होंने कहा कि इन जनप्रतिनिधियों के साथ अंतिम दौर की बातचीत पूरी हो चुकी है और जल्द ही महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिल सकता है।
16 विधायकों के दावे पर उठ रहे सवाल
कृपाल तुमाने के दावे के बाद यह सवाल भी उठ रहे हैं कि आखिर ठाकरे गुट के कौन से विधायक शिंदे गुट में जाएंगे। फिलहाल यूबीटी के पास 20 विधायक हैं, जिनमें मुंबई के 10 विधायक शामिल हैं। आदित्य ठाकरे, वरुण सरदेसाई, सुनील प्रभू, महेश सावंत, बाला नर, सुनील राऊत, मनोज जामसुतकर, संजय पोतनीस, अजय चौधरी और हारून खान जैसे नेताओं को ठाकरे खेमे का मजबूत समर्थक माना जाता है। इसके अलावा कैलास पाटिल और नितीन देशमुख जैसे विधायक पहले शिंदे की बगावत के बाद वापस ठाकरे के साथ आ चुके हैं। भास्कर जाधव के नाराज होने की चर्चाएं जरूर होती रही हैं, लेकिन उन्होंने भी उद्धव ठाकरे का साथ नहीं छोड़ने की बात कही है। ऐसे में 16 विधायकों के टूटने के दावे पर राजनीतिक गलियारों में सवाल उठ रहे हैं।
अरविंद सावंत की कानूनी कार्रवाई की चेतावनी
शिवसेना यूबीटी ( Shivsena UBT) सांसद अरविंद सावंत ने संभावित बगावत की खबरों पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ही मूल और वैध राजनीतिक दल है। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर किसी भी कथित बागी समूह को मान्यता नहीं देने की मांग की है। सावंत ने संविधान की दसवीं अनुसूची और सुप्रीम कोर्ट के सुभाष देसाई बनाम महाराष्ट्र राज्यपाल मामले के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि केवल अलग समूह बनाने का दावा कानूनी रूप से मान्य नहीं है। उनके अनुसार मूल राजनीतिक दल और उसका अधिकृत नेतृत्व ही सर्वोच्च है और पार्टी विरोधी कदम उठाने वाले सांसदों के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ी जाएगी।
दावों और चर्चाओं के बीच आधिकारिक घोषणा का इंतजार
फिलहाल ऑपरेशन टाइगर को लेकर राजनीतिक दावे और चर्चाएं तेज हैं, लेकिन ठाकरे गुट के सांसदों और विधायकों के शिंदे गुट में शामिल होने को लेकर अब तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। इसलिए पूरे घटनाक्रम पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं और 19 जून का वर्धापन दिन महाराष्ट्र की राजनीति के लिए अहम माना जा रहा है।
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