मुंबई: मुंबई में भाषाई विवाद को लेकर हुई 19 वर्षीय युवक अर्णव खैरे की कथित आत्महत्या के मामले ने राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है। भाजपा मुंबई अध्यक्ष अमित साटम के नेतृत्व में आज शिवाजी पार्क स्थित बालासाहेब ठाकरे स्मारक पर किए गए आंदोलन के बाद मनसे और भाजपा के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली।
कुछ दिन पहले लोकल ट्रेन में अर्णव खैरे हिंदी में बात कर रहे थे, जिस पर कुछ युवकों ने “तुम्हें मराठी नहीं आती क्या?” कहते हुए उनकी पिटाई कर दी थी। इस घटना के बाद अवसाद में चले गए अर्णव ने आत्महत्या कर ली। इस मामले को लेकर भाजपा ने ‘सद्बुद्धि दो’ आंदोलन किया, जिसकी मनसे ने कड़ी आलोचना की है।
मनसे का पलटवार
मनसे नेता संदीप देशपांडे ने मीडिया से बातचीत में कहा, “अभी तक इस मामले की जांच पूरी नहीं हुई है। पिटाई करने वाले युवक अभी तक पकड़े नहीं गए हैं। यह स्पष्ट नहीं है कि अर्णव ने सिर्फ पिटाई के कारण ही आत्महत्या की या कोई और कारण भी था। ऐसे में भाजपा को इतनी जल्दबाजी में आंदोलन करने की क्या जरूरत थी?”
देशपांडे ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा, “लोकल ट्रेन से गिरकर रोज लोग मरते हैं, महाराष्ट्र भूषण कार्यक्रम में अमित शाह के सामने भगदड़ में मौतें हुईं, तब आंदोलन करना क्यों नहीं सूझा? भाजपा को महापौर बनवाने की इतनी जल्दी क्यों है?”
उन्होंने आगे कहा, “यदि हम गुजरात दंगों का विषय उठाएं, तो क्या अमित साटम नरेंद्र मोदी और अमित शाह के लिए ‘सद्बुद्धि दो’ आंदोलन करेंगे?”
भाजपा का जवाब
भाजपा प्रवक्ता केशव उपाध्ये ने पलटवार करते हुए कहा, “मराठी लोगों ने ठाकरे बंधुओं को भरपूर प्यार, सत्ता और सम्मान दिया, लेकिन बदले में क्या मिला? बर्बाद मुंबई और उनकी स्वार्थी राजनीति से पैदा हुआ द्वेष। अर्णव खैरे की मृत्यु के पाप से ठाकरे बंधुओं को छुटकारा नहीं मिल सकता। उन्होंने जो भाषाई द्वेष के कारखाने चलाए, उसी का यह परिणाम है।”
उद्धव ठाकरे का बयान
शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के प्रमुख उद्धव ठाकरे ने कहा, “हमें अपने राज्य और भूमिपुत्रों को संभालना है। लोगों को विश्वास हो गया है कि यह काम केवल शिवसेना ही कर सकती है।”
देशपांडे ने भाजपा पर भाषाई प्रांतवाद फैलाने का भी आरोप लगाते हुए कहा, “ठाणे में कोई कहता है ‘मराठी मेरी मां है और मां मर भी जाए तो चलेगा’, घाटकोपर में संघ के जोशी कहते हैं ‘मेरी मातृभाषा गुजराती है’। यह भाषाई विष भाजपा फैला रही है।”
यह मामला अभी भी जांच के दायरे में है और राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है।

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