मुंबई: बांद्रा पूर्व रेलवे स्टेशन से बिल्कुल सटकर बसी ‘गरीब नगर’ नामक अतिसंवेदनशील झुग्गी बस्ती पर आखिरकार पश्चिम रेलवे ने लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद बड़ी तोड़-फोड़ की कार्रवाई शुरू कर दी है। मंगलवार, 19 मई 2026 को कड़क पुलिस बंदोबस्त के बीच इस इलाके के सैकड़ों अनधिकृत झुग्गियों पर प्रशासन का बुलडोजर चला। कई वर्षों की अदालती लड़ाई के बाद यह अभियान शुरू किया गया है, जो आगामी 23 मई तक जारी रहेगा। इस कार्रवाई के कारण इलाके में तनाव का माहौल देखा गया, वहीं सुरक्षा कारणों से रेलवे का एक फुटओवर ब्रिज बंद कर दिए जाने से हजारों रेल यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
नौ साल की अदालती प्रक्रिया के बाद बड़ी कार्रवाई
पश्चिम रेलवे ने साफ किया है कि यह कार्रवाई अचानक या मनमाने ढंग से नहीं की गई है। इस मामले में कानूनी प्रक्रिया साल 2017 से पहले ही ‘सार्वजनिक परिसर अधिनियम’ के तहत शुरू की गई थी और 27 नवंबर 2017 को बेदखली के आदेश पारित किए गए थे। पिछले नौ सालों में इस मामले की बॉम्बे हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में गहन सुनवाई हुई। आखिरकार, बॉम्बे हाई कोर्ट के 29 अप्रैल 2026 के आदेश और सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी के बाद रेलवे ने यह कदम उठाया है। संयुक्त सर्वे में जिन झुग्गियों को वैध और पात्र पाया गया है, उन्हें बिल्कुल भी नहीं छुआ जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, करीब 400 से 500 झुग्गियों को तोड़ा जा रहा है, जिनमें से केवल 100 झुग्गियां ही वैध पाई गई हैं।

सुरक्षा और भविष्य के विस्तार के लिए जरूरी कदम
रेलवे प्रशासन के अनुसार, यह तोड़-फोड़ मुख्य रूप से सक्रिय रेलवे पटरियों के पास वाले सुरक्षा क्षेत्र (सेफ्टी जोन) में की जा रही है। पटरियों से सटकर बसी इस अनधिकृत बस्ती के कारण मानव जीवन और ट्रेनों के परिचालन को हमेशा गंभीर खतरा बना रहता था। मुंबई में रेल क्षमता बढ़ाने के लिए यह पूरा स्ट्रेच परिचालन की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। भविष्य के बुनियादी ढांचे के विस्तार, नई ट्रेनों की शुरुआत और देश के सबसे व्यस्त रेल गलियारों में से एक की क्षमता बढ़ाने के लिए इस जमीन को अतिक्रमण मुक्त करना अनिवार्य था। रेलवे का कहना है कि रेलवे की जमीन, खासकर सुरक्षा के लिहाज से संवेदनशील परिचालन क्षेत्रों में, हमेशा के लिए अतिक्रमण की भेंट नहीं चढ़ाई जा सकती।
प्रशासनिक लापरवाही पर जनता के तीखे सवाल
गरीब नगर की यह बस्ती हमेशा से ही विवादों के घेरे में रही है। पिछले लगभग डेढ़ दशक में इस बस्ती में तीन बार भीषण आग लग चुकी है, जबकि 4 से 5 बार यहां बड़े पैमाने पर तोड़-फोड़ की कार्रवाई हुई है। पात्र झुग्गीधारकों को अतीत में कम से कम दो बार वैकल्पिक मकान भी दिए गए थे, इसके बावजूद यह बस्ती हर बार पहले से अधिक ऊंची और बड़े क्षेत्रफल में कैसे आबाद हो जाती है, इस पर स्थानीय लोग सवाल उठा रहे हैं। तोड़-फोड़ पर होने वाले लाखों रुपये के खर्च को लेकर लोग पूछ रहे हैं कि जब झुग्गियां दोबारा बनती और बढ़ती हैं, तब प्रशासनिक अधिकारी कहां सोए रहते हैं? इसके साथ ही लोग यह भी पूछ रहे हैं कि अतीत में जो सरकारी मकान दिए गए थे, उनमें आखिरकार आज कौन रह रहा है?
यात्रियों की भारी असुविधा और रेलवे का ढुलमुल रवैया
इस अतिक्रमण विरोधी अभियान को शांतिपूर्ण और सुरक्षित तरीके से निपटाने के लिए करीब 400 कर्मचारी, जेसीबी, दमकल विभाग और एम्बुलेंस को मौके पर तैनात किया गया है। सुरक्षा के मद्देनजर बांद्रा स्टेशन के बीच वाले फुटओवर ब्रिज (FOB) को पूर्व दिशा की ओर से बंद कर दिया गया है। लेकिन रेलवे प्रशासन ने इसकी कोई पूर्व सूचना या स्टेशन पर स्पष्ट बोर्ड नहीं लगाया है, जिससे यात्रियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। यात्री पूरा ब्रिज चढ़कर जब ऊपर पहुंच रहे हैं, तब उन्हें रास्ता बंद होने का पता चल रहा है, जिससे उन्हें वापस उतरकर दूसरे ब्रिज का इस्तेमाल करना पड़ रहा है। इसके अलावा, यात्रियों ने शिकायत की है कि बंदोबस्त पर तैनात कई कर्मचारियों को स्थानीय भाषा समझने में दिक्कत हो रही है और वे पूछताछ करने वाले यात्रियों को गैर-जिम्मेदाराना व रूखा जवाब दे रहे हैं। रेलवे के इस कुप्रबंधन के कारण आम यात्रियों में भारी नाराजगी देखी जा रही है।
किरीट सोमैया ने किया था आंदोलन
इस बस्ती के लोग रेल पटरियों के बीच भेड़ बकरियां पालते थे. बच्चे पटरियों के पास खेलते थे. विवाद व अन्य समारोहों का आयोजन पटरियों के बीच किया जाता था. एक विदेशी यू ट्यूबर ने इसका वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया था. इसके बाद बीजेपी नेता और पूर्व सांसद किरीट सोमैया लगातार इसके खिलाफ आवाज उठाते रहे हैं.

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