विधानसभा में नागपुर की संस्था का मामला उठा
मुंबई। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने विधानसभा में कहा कि नागपुर की एक स्वयंसेवी संस्था में कार्यरत महिला कर्मचारियों के कथित उत्पीड़न मामले में दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी, जबकि किसी निर्दोष पर कार्रवाई नहीं होगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार महिलाओं के लिए ‘भरोसा सेल’ के माध्यम से समुपदेशन की व्यवस्था कर रही है। साथ ही, धार्मिक स्वतंत्रता विधेयक केंद्र सरकार की मंजूरी के लिए भेजा गया है और मंजूरी मिलते ही जबरन धर्मांतरण तथा धर्मांतरण के लिए दबाव डालने जैसी घटनाओं पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
निर्दोषों को नहीं होगी परेशानी
मुख्यमंत्री ने भाजपा विधायक सुधीर मुनगंटीवार के प्रश्न का उत्तर देते हुए कहा कि जांच में महिला के मानसिक उत्पीड़न की बात सामने आई है। हालांकि, संबंधित संस्था की वेबसाइट पर स्थानीय दानदाताओं से निधि मिलने की जानकारी मिली है, लेकिन विदेश से धन प्राप्त होने के प्रमाण नहीं मिले हैं।
एफसीआरए कानून के तहत होगी सख्त कार्रवाई
फडणवीस ने कहा कि केंद्र सरकार ने विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (एफसीआरए) को और सख्त बनाया है। यदि कोई संस्था विदेशी निधि का उपयोग धर्मांतरण या अन्य अवैध गतिविधियों के लिए करती है तो उसका एफसीआरए प्रमाणपत्र रद्द किया जा सकता है।
महिलाओं के शोषण-धर्मांतरण पर सरकार सतर्क
मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2023 से मई 2026 तक राज्य में स्वयंसेवी संस्थाओं से जुड़े महिलाओं के शोषण और यौन उत्पीड़न के चार तथा जबरन धर्मांतरण का एक मामला दर्ज हुआ है। सभी मामले न्यायालय में विचाराधीन हैं।
प्रवीण दटके ने उठाए कई मुद्दे
भाजपा विधायक प्रवीण दटके ने महिलाओं के यौन उत्पीड़न के बाद धर्मांतरण के प्रयासों पर चिंता जताई। उन्होंने ऐसे मामलों में संगठित अपराध कानून के तहत कार्रवाई, संदिग्ध संस्थाओं की जांच तथा धर्मांतरण के लिए निधि के दुरुपयोग पर बैंक खाते फ्रीज करने की मांग की। उन्होंने कुछ मदरसों में बाहरी राज्यों से आने वाले छात्रों और विदेशी धन के उपयोग की भी जांच कराने की मांग की।
सरकार ने जांच और सख्त कानून का भरोसा दिया
मुख्यमंत्री ने कहा कि धर्मांतरण के प्रयासों का सामना करने वाली महिलाओं का समुपदेशन किया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसी संस्था द्वारा निधि का दुरुपयोग पाया गया तो एफसीआरए के तहत कार्रवाई होगी। साथ ही, बाहरी राज्यों से मदरसों में आने वाले छात्रों की गतिविधियों की भी जांच कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि धार्मिक स्वतंत्रता विधेयक को केंद्र की मंजूरी मिलने के बाद महाराष्ट्र में इसे सख्ती से लागू किया जाएगा, जिससे जबरन धर्मांतरण और उससे जुड़े अपराधों पर प्रभावी कार्रवाई की जा सके।
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