विमान हादसे में अजीत पवार का निधन : प्रशासनिक अनुशासन के पर्याय थे ‘दादा’

 मुंबई/बारामती: महाराष्ट्र की राजनीति के एक युग का दुखद अंत हो गया है। राज्य के उपमुख्यमंत्री और कद्दावर नेता अजीत अनंतराव पवार का बुधवार, 28 जनवरी 2026 की सुबह बारामती में एक विमान दुर्घटना में निधन हो गया। 66 वर्षीय पवार जिला पंचायत चुनाव के प्रचार के लिए जा रहे थे, तभी लैंडिंग के दौरान उनका विमान हादसे का शिकार हो गया। इस दुर्घटना में उनके साथ सवार चार अन्य लोगों की भी मृत्य हो गई।

अजीत पवार को उनकी ‘कड़क’ कार्यशैली और सुबह 6 बजे की बैठकों के लिए जाना जाता था। फाइलों पर उनकी पकड़ और वित्तीय अनुशासन के प्रति उनकी प्रतिबद्धता इतनी मजबूत थी कि तत्कालीन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने एक बार कहा था, “हम शिफ्ट में काम करेंगे—सुबह की ड्यूटी अजीत पवार की और रात की मेरी।”

  • 11 बार बजट: उन्होंने राज्य का 11 बार बजट पेश किया, जो शेषराव वानखेड़े (13 बार) के बाद दूसरा बड़ा रिकॉर्ड है।
  • संकट प्रबंधन: कोविड काल के दौरान महाराष्ट्र की अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए उनकी केंद्रीय स्तर पर प्रशंसा हुई थी।
  • बजट पेश करने का अनोखा रिकॉर्ड
  • अजीत ने वित्त मंत्री के रूप में महाराष्ट्र का 11 बार बजट पेश किया। इस मामले में वे शेषराव वानखेडे (13 बार) के बाद दूसरे स्थान पर रहे. उनके बाद जयंत पाटिल (10 बार) और सुशील कुमार शिंदे (9 बार) का स्थान आता है.
  • स्थान वित्त मंत्री बजट संख्या
  • 1 शेषराव वानखेडे 13
  • 2 अजीत पवार 11
  • 3 जयंत पाटिल 10
  • 4 सुशील कुमार शिंदे 9

6 बार डिप्टी सीएम, पर ‘मुख्यमंत्री’ का सपना रहा अधूरा

अजीत पवार के नाम महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा 6 बार उपमुख्यमंत्री बनने का रिकॉर्ड है, लेकिन नियति ने उन्हें शीर्ष पद तक नहीं पहुंचने दिया। नीचे चार्ट में देखें उपमुख्यमंत्री के रूप में अजीत पवार का कार्यकाल और उस दौर के मुख्यमंत्रियों की जानकारी।

कार्यकालमुख्यमंत्री
2010 – 2012पृथ्वीराज चव्हाण
2012 – 2014पृथ्वीराज चव्हाण
2019 (80 घंटे)देवेंद्र फडणवीस
2019 – 2022उद्धव ठाकरे
2023 – 2024एकनाथ शिंदे
2024 – 2026देवेंद्र फडणवीस

अधूरी हसरत: 2004 में जब एनसीपी के पास कांग्रेस से ज्यादा सीटें थीं, तब अजीत पवार सीएम बन सकते थे, लेकिन शरद पवार ने मौका कांग्रेस को दे दिया। उनकी माता आशा पवार की भी अंतिम इच्छा थी कि वे अपने जीवनकाल में बेटे को मुख्यमंत्री बनते देखें।


सियासी सफर: उतार-चढ़ाव और बगावत

1982 में चीनी सहकारी संस्था से राजनीति शुरू करने वाले अजीत ने 1991 से बारामती विधानसभा पर अपना अभेद्य किला बनाए रखा।

  • बगावत और शक्ति: जुलाई 2023 में उन्होंने अपने चाचा शरद पवार से अलग होकर राकांपा (NCP) का विभाजन किया और चुनाव आयोग से पार्टी का नाम व ‘घड़ी’ चिह्न हासिल किया।
  • अजेय विधायक: 2024 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने अपने सगे भतीजे युगेंद्र पवार को 1 लाख से अधिक वोटों से हराकर अपनी राजनीतिक ताकत का लोहा मनवाया था।

विवादों से नाता

उनका राजनीतिक जीवन विवादों से अछूता नहीं रहा। 2013 का सिंचाई घोटाला और 2024 के लोकसभा चुनाव में बारामती सीट पर पत्नी सुनेत्रा पवार की सुप्रिया सुले के हाथों हार उनके जीवन के कठिन दौर थे। हालांकि, उन्होंने हर बार वापसी की।


किसानों और महिलाओं के मसीहा

अजीत पवार के बजट हमेशा जनोन्मुखी रहे। 2024 की ‘लाडकी बहिन योजना’ ने महायुति की सत्ता में वापसी की राह आसान की। वे अगले महीने 23 फरवरी को अपना 12वां बजट पेश करने की तैयारी कर रहे थे, लेकिन उससे पहले ही काल ने उन्हें हमसे छीन लिया।

महाराष्ट्र की राजनीति में उनकी कमी हमेशा खलेगी। ‘दादा’ का जाना न केवल महायुति बल्कि पूरे राज्य के लिए एक अपूरणीय क्षति है।

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