मुंबई: महाराष्ट्र में आगामी स्थानीय निकाय चुनावों की सरगर्मियों के बीच, मतदाता सूचियों में गंभीर अनियमितताओं के आरोपों ने राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है। पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के अध्यक्ष राज ठाकरे ने संयुक्त रूप से राज्य चुनाव आयोग (एसईसी) से मतदाता सूचियों को तुरंत दुरुस्त करने की मांग की है।
आदित्य ठाकरे ने सौंपा ज्ञापन
शिवसेना (यूबीटी) के विधायक आदित्य ठाकरे ने सोमवार को राज्य चुनाव आयुक्त दिनेश वाघमारे से मुलाकात की और उन्हें उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे का पत्र सौंपा। इस दौरान उनके साथ शिवसेना यूबीटी के नेता अंबादास दानवे और मनसे के नेता बाला नांदगावकर भी मौजूद थे।मुलाकात के बाद आदित्य ठाकरे ने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार “वोट चुराकर” चुनाव जीतने की कोशिश कर रही है। उन्होंने मुंबई नगर निगम की मतदाता सूची जारी होने में हुई देरी और विसंगतियों पर सवाल उठाए।”मसौदा मतदाता सूची 7 नवंबर को आने वाली थी, फिर 14 को बताया गया लेकिन अंत में 20 नवंबर को आई। हमने जब शुल्क देकर सूची ली, तो उस पर जारी करने की तारीख 14 ही छपी है। यह अपने आप में गड़बड़ी के संकेत हैं।”आदित्य ठाकरे ने विपक्षी दलों द्वारा सूची के अध्ययन के आधार पर दावा किया कि मतदाता सूचियों को जाति और धर्म के आधार पर बदला गया है, विशेष रूप से विपक्षी दलों और बीजेपी के सहयोगी नेताओं के निर्वाचन क्षेत्रों में। उन्होंने आरोप लगाया कि हजारों मतदाताओं के नाम जानबूझकर विरोधियों के क्षेत्रों से हटाकर या जोड़कर ‘वोटरों की अदला-बदली’ की गई है।
चौंकाने वाले आंकड़े और आरोप
आदित्य ठाकरे ने विधानसभा चुनाव 2024 का उदाहरण देते हुए कहा कि एक वार्ड में जहां पहले 48,000 मतदाता थे, अब वहां 42,000 मतदाता बचे हैं, यानी 6,000 नाम या तो हटा दिए गए हैं या अन्य वार्डों में स्थानांतरित कर दिए गए हैं। उन्होंने मतदाता सूची में 18 वर्ष से कम और 100 वर्ष से अधिक उम्र के हजारों मतदाताओं के नाम होने की ओर भी इशारा किया। उन्होंने इन अनियमितताओं को “देशद्रोह के समान” करार दिया।
राज ठाकरे के पत्र में छह बड़ी आपत्तियां
मनसे अध्यक्ष राज ठाकरे ने अपने पत्र में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर विस्तृत सवाल उठाए हैं, जिसमें उन्होंने छह मुख्य गड़बड़ियों का उल्लेख करते हुए आपत्ति जताई है
अद्यतन सूची का अभाव: अंतिम मतदाता सूची 30 अक्टूबर 2024 को प्रकाशित हुई थी। नियमों के अनुसार हर साल जनवरी के पहले सप्ताह में और फिर हर तीन महीने में संशोधित सूची प्रकाशित होनी चाहिए, लेकिन इस साल ऐसा नहीं हुआ।
अपारदर्शी संशोधन: वेबसाइट पर नए पंजीकरण और बदलाव केवल औपचारिकता के लिए हैं। नई संशोधित सूची में यह जानकारी नहीं है कि वे मतदाता कौन हैं, या उनका पता क्या है।
आपत्ति के लिए कम समय: 13 महीने तक कोई नई सूची नहीं आई और सबसे महत्वपूर्ण सूची पर आपत्ति दर्ज करने के लिए केवल 8 दिन दिए गए। इसके अलावा, प्रकाशित सूचियां केवल पढ़ने योग्य हैं, संपादन (Editable Format) योग्य नहीं हैं, जिससे उन पर काम करना मुश्किल है।
वार्डों में विसंगतियां: कई स्थानों पर एक वार्ड के मतदाता दूसरे वार्ड में डाल दिए गए हैं। कुछ इमारतें भी आयोग के नक्शे से बाहर हैं, फिर भी वे वार्ड की सूची में दिखाई दे रही हैं।
गलती आयोग की, सबूत कार्यकर्ता से: आपत्ति दर्ज करते समय आपत्ति करने वाले राजनीतिक कार्यकर्ता से ही मतदाता का आधार कार्ड या अन्य सबूत मांगा जा रहा है। जबकि आयोग ने स्वयं लगभग 10 लाख डुप्लीकेट मतदाताओं की बात स्वीकार की है, लेकिन उन्हें खोजने और नाम हटाने के लिए 7-8 दिन का समय अपर्याप्त है। इसके लिए कम से कम 21 दिन चाहिए।
चुनाव रद्द करने की मांग: राज ठाकरे ने स्पष्ट मांग की कि या तो चुनाव आयोग 21 दिन की मोहलत दे, या चुनाव रद्द करे और सभी सूचियां ठीक करने के बाद ही चुनाव कराए।
मतदाता सूची की अन्य बड़ी विसंगतियां
-एक घर में 10 से ज्यादा वोटरों वाले 26,319 घर, जिनमें कुल 8,32,326 लोग रहते हैं.
-1,500 वोटर डुप्लीकेट एपिक वाले हैं.
-2,500 वोटरों का एपिक नंबर नहीं है.
-6,97,887 लोगों के घर का पता नहीं है.
अदालत जाने की चेतावनी
स्थानीय निकाय चुनावों से पहले, मतदाता सूची को लेकर उठे ये गंभीर सवाल चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगाते हैं। आदित्य ठाकरे ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि मतदाता सूचियों को जल्द ही ठीक नहीं किया गया, तो शिवसेना (यूबीटी) इस मुद्दे को लेकर कोर्ट का दरवाजा खटखटाएगी। इसके अलावा सड़क पर आंदोलन भी करेगी। फिलहाल महाविकास आघाडी ने मंगलवार को एक बार फिर चुनाव आयोग से समय मांगा है।
बीएमसी का स्पष्टीकरण
बीएमसी ने आगामी चुनाव की प्रारूप मतदाता सूची की तिथि को लेकर सोशल मीडिया और विभिन्न प्रसार माध्यमों में किए जा रहे आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए स्पष्टीकरण जारी किया है. बीएमसी के अनुसार प्रारूप मतदाता सूची पर अंकित तारीख को लेकर भ्रम फैलाया जा रहा है, जबकि तथ्यों के अनुसार कोई अनियमितता नहीं हुई है. बीएमसी ने बताया कि राज्य निर्वाचन आयोग ने जो समय सारिणी जारी किया था. बीएमसी ने स्पष्ट किया कि तिथि संबंधी भ्रम फैलाना या अनियमितता के आरोप लगाना सरासर गलत है. प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे सत्यापित जानकारी पर ही भरोसा करें.

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