मुंबई : महाराष्ट्र में विद्यार्थियों के भारी बस्ते का बोझ कम करने के लिए ‘स्कूल बैग पॉलिसी-2020’ को सभी प्रकार के स्कूलों में सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। प्राथमिक शिक्षा संचालनालय ने स्पष्ट किया है कि छात्र के बस्ते का वजन उसके शरीर के वजन के करीब 10 फीसदी से अधिक नहीं होना चाहिए। प्राथमिक शिक्षा निदेशक शरद गोसावी (Sharad Gosavi) ने इस संबंध में परिपत्र जारी किया है।
अनावश्यक किताबें लाने पर रोक
नीति के तहत स्कूलों को विद्यार्थियों से रोजाना अनावश्यक किताबें, कॉपियां और शैक्षणिक सामग्री लाने के लिए नहीं कहना होगा। प्रत्येक कक्षा के लिए ‘बस्ता समय-सारणी’ तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। स्कूलों में सुरक्षित कपाट, शेल्फ या लॉकर की व्यवस्था करने को भी कहा गया है, ताकि विद्यार्थियों को रोज सभी किताबें घर ले जाने की जरूरत न पड़े। छोटे बच्चों के लिए स्कूल में बस्ता लाने की आवश्यकता कम से कम रखने की योजना बनाने के निर्देश हैं।
स्कूल में मिलेगा पीने का पानी
भारी पानी की बोतलें लाने से बचाने के लिए स्कूलों में पर्याप्त और स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने को कहा गया है। स्कूलों को विद्यार्थियों और उनके बस्तों के वजन की नियमित जांच कर रिकॉर्ड रखना होगा। निर्धारित सीमा से अधिक वजन मिलने पर तत्काल सुधार करना होगा। अभिभावक बैठकों में भी अनावश्यक सामान बस्ते में नहीं रखने के लिए जागरूक किया जाएगा।
10 दिन बस्ता-मुक्त गतिविधियां
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत कक्षा 6 से 8 के विद्यार्थियों के लिए साल में 10 दिन बस्ता-मुक्त अवधि आयोजित की जाएगी। इस दौरान स्थानीय कारीगरों और व्यवसायियों के मार्गदर्शन में बढ़ईगीरी, बागवानी, मिट्टी के बर्तन, हस्तकला और कृषि जैसे अनुभव आधारित कार्य कराए जाएंगे। खेल, वाचन, कहानी-कथन, पर्यावरण संरक्षण और क्षेत्र भ्रमण जैसी गतिविधियां भी आयोजित की जाएंगी।
अधिकारियों की होगी निगरानी
इस नीति की प्राथमिक जिम्मेदारी स्कूल के मुख्याध्यापक की होगी। शिक्षा अधिकारी, समूह शिक्षा अधिकारी और विस्तार अधिकारी अचानक स्कूलों का निरीक्षण कर बस्ते का वजन, बस्ता समय-सारणी और पेयजल व्यवस्था जांचेंगे। अनुपालन रिपोर्ट वरिष्ठ कार्यालय को भेजी जाएगी।
स्कूल बैग नीति पर सख्ती : वजन 10 फीसदी से अधिक नहीं
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