मुंबई. गणपति विसर्जन जुलूसों में इस बार अधिकांश गणेश मंडलों ने डीजे और वाहनों पर लगे तेज ध्वनि यंत्रों से परहेज किया, लेकिन कुछ राजनीतिक दलों के मंडपों में देर रात तक तेज आवाज में ध्वनि यंत्र बजने का दावा किया गया है। आवाज फाउंडेशन (Awaaz Foundation) के अनुसार, 25 और 26 सितंबर को मुंबई में किए गए ध्वनि स्तर के माप में अधिकतम 107.8 डेसिबल आवाज दर्ज हुई। संस्था की संस्थापक सुमैरा अब्दुलअली (Sumaira Abdulali) ने इस संबंध में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis), मुख्य सचिव और मुंबई पुलिस आयुक्त को पत्र भेजा है।
गिरगांव चौपाटी में देर रात तक तेज आवाज
आवाज फाउंडेशन के अनुसार, 25 सितंबर को शाम 4.41 बजे गिरगांव चौपाटी पर राजनीतिक मंडपों के पास 80.4 से 91.4 डेसिबल तक आवाज दर्ज हुई। रात 11.15 बजे यह स्तर 92 से 103 डेसिबल तक पहुंच गया। 26 सितंबर को रात 12.18 बजे 87 से 94 डेसिबल और 12.30 बजे 82 से 90 डेसिबल तक आवाज दर्ज की गई। इस दौरान मंडपों में ध्वनि यंत्रों के इस्तेमाल का उल्लेख रिपोर्ट में किया गया है।
बांद्रा और वरली में भी ऊंचा स्तर
बांद्रा पश्चिम में 25 सितंबर को रात 10.03 बजे बैंजो और ध्वनि यंत्रों के इस्तेमाल से 91 से 107.8 डेसिबल तक आवाज दर्ज हुई। वरली में रात 10.28 बजे बिना ध्वनि यंत्र के ढोल-ताशों की आवाज 94 से 107 डेसिबल रही। ऑपेरा हाउस में रात 12.06 बजे बिना ध्वनि यंत्र के चल रहे जुलूस में 84.9 से 87 डेसिबल तक आवाज दर्ज हुई।
रात में ध्वनि सीमा में छूट नहीं
आवाज फाउंडेशन के मुताबिक, नियमों के तहत सरकार साल में अधिकतम 15 दिन ध्वनि यंत्रों के इस्तेमाल की अवधि आधी रात तक बढ़ा सकती है। हालांकि, रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक निर्धारित ध्वनि सीमा में छूट नहीं दी जा सकती। इस अवधि में आवासीय क्षेत्र के लिए 45 और शांत क्षेत्र के लिए 40 डेसिबल की सीमा है।
सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के आदेश का हवाला
अब्दुलअली ने पत्र में सुप्रीम कोर्ट के 18 जुलाई 2005 के आदेश और मुंबई हाईकोर्ट के अगस्त 2016 के निर्देशों का हवाला दिया है। संस्था के अनुसार, धार्मिक आयोजनों के नाम पर स्वास्थ्य से जुड़े ध्वनि प्रदूषण नियमों का उल्लंघन नहीं किया जा सकता। फाउंडेशन ने कहा कि 2026 में हाईकोर्ट ने भी इस विषय का स्वतः संज्ञान लिया है।
आवाज फाउंडेशन 2003 से गणपति विसर्जन के दौरान ध्वनि स्तर माप रहा है। संस्था के अनुसार, 2024 में ऑपेरा हाउस में 115, 2023 में 114.7 और 2022 में 120.2 डेसिबल की अधिकतम आवाज दर्ज हुई थी। इस वर्ष अधिकांश जुलूसों में ध्वनि यंत्रों का इस्तेमाल नहीं हुआ।
विसर्जन में 107.8 डेसिबल तक शोर : राजनीतिक मंडपों में देर रात तक तेज आवाज का आरोप
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