CM देवेंद्र ने दिए स्कूली शिक्षा तथा महिला एवं बाल विकास विभाग को संयुक्त नीति बनाने के निर्देश
मुंबई : प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना (Pradhan Mantri Poshan Shakti Nirman Yojana) के तहत छात्रों को ताजा, पौष्टिक और गुणवत्तापूर्ण भोजन समय पर उपलब्ध कराने के लिए स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार निर्णय लेने के अधिकार जिला स्तर पर प्रदान किए जाने चाहिए। इसके लिए स्कूली शिक्षा और महिला एवं बाल विकास विभाग मिलकर एक संयुक्त नीति तैयार करें और आवश्यक दिशानिर्देश जारी करें। यह निर्देश महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) ने दिए। इसके साथ ही उन्होंने वर्तमान में आठवीं कक्षा तक दिए जाने वाले पोषण आहार के लाभ को दसवीं कक्षा तक के छात्रों के लिए विस्तारित करने की व्यावहारिकता की जांच कर प्रस्ताव प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए।
समीक्षा बैठक और उपस्थित अधिकारी
सह्याद्री अतिथि गृह (Sahyadri Guest House) में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) की अध्यक्षता में प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना की एक समीक्षा बैठक संपन्न हुई। इस बैठक में स्कूली शिक्षा मंत्री दादाजी भुसे (Dadaji Bhuse), महिला एवं बाल विकास मंत्री आदिती तटकरे (Aditi Tatkare), राज्य मंत्री मेघना साकोरे-बोर्डीकर (Meghna Sakore-Bordikar), मुख्य सचिव राजेश अग्रवाल (Rajesh Aggarwal), स्कूली शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव रणजीत सिंह देओल (Ranjitsinh Deol), महिला एवं बाल विकास विभाग के सचिव अनुप कुमार (Anoop Kumar), स्कूली शिक्षा आयुक्त सचिंद्र प्रताप सिंह (Sachindra Pratap Singh), नगर परिषद प्रशासन निदेशालय के निदेशक अभिषेक कृष्णा (Abhishek Krishna), एकीकृत बाल विकास कार्यक्रम (ICDS) आयुक्त माधवी सरदेशमुख (Madhavi Sardeshpande / Sardeshmukh) तथा इस्कॉन (ISKCON) के प्रतिनिधि उपस्थित थे। इसके अलावा सभी महानगरपालिकाओं के आयुक्त, जिलाधिकारी और जिला परिषदों के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) ऑनलाइन माध्यम से जुड़े।
केंद्रीय रसोईघर और स्थानीय विकल्पों पर निर्देश
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) ने कहा कि भोजन की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए शहरी क्षेत्रों के साथ-साथ उन ग्रामीण क्षेत्रों में भी केंद्रीय रसोईघर (Central Kitchen) का विकल्प अपनाया जाए जहाँ यह व्यावहारिक हो। दुर्गम और आदिवासी क्षेत्रों के स्कूलों तक केंद्रीय रसोईघर से भोजन पहुँचने में होने वाली देरी को ध्यान में रखते हुए ग्राम पंचायतों के माध्यम से अन्य विकल्प अपनाए जाएँ। केंद्रीय रसोईघर का विकल्प लागू करते समय स्थानीय स्तर पर यह जाँच की जाए कि भोजन समय पर और ताजा पहुँच पा रहा है या नहीं। जहाँ संभव हो, भोजन वितरण की जिम्मेदारी स्थानीय महिला बचत समूहों (Self-Help Groups) को दी जाए। संबंधित जिलाधिकारियों, जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों और महानगर पालिका आयुक्तों को स्थानीय जरूरतों तथा व्यावहारिकता को ध्यान में रखकर इस पर निर्णय लेने के अधिकार दिए जाएँ।
संयुक्त नीति और प्रशासनिक समन्वय
स्कूली शिक्षा और महिला एवं बाल विकास विभाग जिला स्तर पर मांग का मूल्यांकन करें और दोनों विभागों के संसाधनों का समन्वित उपयोग करके योजना का लाभ छात्रों तक अधिक प्रभावी ढंग से पहुँचाएँ। इसके लिए आवश्यक प्रशासनिक लचीलापन और अधिकार क्षेत्रीय स्तर पर प्रदान किए जाएँ। संयुक्त नीति तैयार करने से पहले जिलाधिकारियों और जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों के सुझावों पर विचार किया जाए ताकि स्थानीय समस्याओं और आवश्यक बदलावों को समझा जा सके। इन व्यावहारिक सुझावों को शामिल करते हुए दोनों विभाग मंत्रिमंडल के समक्ष संयुक्त प्रस्ताव प्रस्तुत करें।
स्थानीय पोषण और स्वास्थ्य संबंधी योजनाएँ
जिलाधिकारी जिला स्तरीय पोषण आहार समिति की बैठक आयोजित कर स्थानीय स्तर पर उपलब्ध प्रोटीन से भरपूर खाद्य पदार्थों को आहार में शामिल करने की योजना बनाएँ। जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी इस प्रक्रिया में समन्वय स्थापित करें। स्थानीय खान-पान की आदतों और छात्रों की पसंद को ध्यान में रखते हुए बाजरा (Millet) आधारित और पौष्टिक विकल्पों पर विचार किया जाए। स्कूली शिक्षा मंत्री दादाजी भुसे (Dadaji Bhuse) ने केंद्रीय रसोईघर का दायरा बढ़ाने तथा ग्राम पंचायतों को फंड देकर स्थानीय स्तर पर भोजन उपलब्ध कराने का सुझाव दिया। उन्होंने केंद्र सरकार से चावल का कोटा घटाकर अन्य अनाजों का कोटा बढ़ाने का अनुरोध करने की बात भी कही। इसके अलावा उन्होंने बताया कि छात्रों का हेल्थ कार्ड तैयार किया जा रहा है और अब अभिभावकों की उपस्थिति में स्वास्थ्य जाँच की जाएगी।
महिला एवं बाल विकास विभाग और अन्य सुझाव
महिला एवं बाल विकास मंत्री आदिती तटकरे (Aditi Tatkare) ने बताया कि शहरी क्षेत्रों की 30 आंगनवाड़ियों में पोषण आहार प्रदान करने का कार्य इस्कॉन (ISKCON) को सौंपा जा रहा है और इसकी प्रभावशीलता की जाँच के बाद आंगनवाड़ियों की संख्या बढ़ाई जाएगी। उन्होंने स्थानीय जरूरतों के अनुसार फोर्टिफाइड पदार्थों के बजाय खुले और ताजा पदार्थ देने का सुझाव दिया। मुख्य सचिव राजेश अग्रवाल (Rajesh Aggarwal) ने पोषण आहार में मैदा (Refined Flour) का उपयोग न करने का निर्देश दिया। बैठक के दौरान स्कूली शिक्षा विभाग की ओर से आयुक्त सचिंद्र प्रताप सिंह (Sachindra Pratap Singh), महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से माधवी सरदेशमुख (Madhavi Sardeshmukh) तथा अनामृत फाउंडेशन (Annamrita Foundation) एवं इस्कॉन (ISKCON) के प्रतिनिधियों ने प्रस्तुतीकरण (Presentation) दिया।
योजना की वर्तमान स्थिति और मानक
स्कूली शिक्षा विभाग के माध्यम से राज्य, केंद्र शासन, स्थानीय निकायों और निजी अनुदानित 85,206 पात्र स्कूलों में पहली से आठवीं कक्षा तक के छात्रों को प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना का लाभ दिया जा रहा है। केंद्र सरकार के मानकों के अनुसार पहली से पांचवीं कक्षा के छात्रों को 450 कैलोरी तथा 12 ग्राम प्रोटीन और छठी से आठवीं कक्षा के छात्रों को 700 कैलोरी तथा 20 ग्राम प्रोटीनयुक्त दोपहर का भोजन दिया जाता है। आहार में विविधता लाने के लिए पुलाव, खिचड़ी, उसल और वरण-भात सहित 12 प्रकार के व्यंजन निर्धारित किए गए हैं।
स्कूली छात्रों को समय पर ताजा पौष्टिक भोजन
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