मुंबई : शिवसेना (Shivsena) पार्टी और धनुष-बाण (Bow and Arrow) चुनाव चिन्ह किसके पास रहेगा, इस पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में होने वाली सुनवाई टल गई है। भारत के मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice of India) द्वारा पूर्व में दी गई 30 अक्टूबर (30 October) की समयसीमा समाप्त हो जाने के बाद अब अदालत ने इस मामले की सुनवाई के लिए नई तारीख निर्धारित की है। इसी वजह से शीर्षक के अनुसार, 30 अक्टूबर तक फैसला आने का मुहूर्त फिलहाल टल गया है और अब हर किसी की निगाहें अगले हफ्ते होने वाली सुनवाई पर टिक गई हैं।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई की वर्तमान स्थिति
सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में पिछले दो महीनों से शिवसेना (Shivsena) पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह को लेकर सुनवाई जारी है। बीते हफ्ते युक्तिवाद न होने के कारण इस हफ्ते लगातार सुनवाई का निर्णय लिया गया था। बुधवार की सुनावणी के दौरान मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) के पक्ष के वकीलों ने कोर्ट में अपना पक्ष मजबूती से रखा। इसके बाद गुरुवार को भी मामले की सुनावणी प्रस्तावित थी, लेकिन यह टल गई और अब कोर्ट में इस मामले पर अगले हफ्ते विचार किया जाएगा।
शिंदे गुट के वकीलों की दलीलें
बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) गुट की ओर से वरिष्ठ वकील मनिंदर सिंह (Maninder Singh) ने जोरदार पैरवी की। उन्होंने मुख्य रूप से पार्टी के संगठनात्मक ढांचे में हुए चुनावों का मुद्दा उठाया। साथ ही व्हिप (Whip) जारी करने और पार्टी के भीतर के चुनावों से जुड़े विषयों को कोर्ट के सामने रखा। मनिंदर सिंह (Maninder Singh) के बाद वकील ध्रुव मेहता (Dhruv Mehta) ने शिंदे गुट की ओर से पक्ष प्रस्तुत किया।
पूर्व में हुए युक्तिवाद और आगे की प्रक्रिया
इस मामले की सुनवाई की शुरुआत में उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) की शिवसेना (Shivsena) की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल (Kapil Sibal) ने दमदार तरीके से दलीलें पेश की थीं। इसके जवाब में एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) के वकील नीरज कौल (Neeraj Kaul) ने भी जोरदार युक्तिवाद किया था। गुरुवार को वकील ध्रुव मेहता (Dhruv Mehta) विधायक अयोग्यता मामले में विधानसभा अध्यक्ष (Assembly Speaker) द्वारा दिए गए निर्णय पर अपना पक्ष रखने वाले थे। अब यह सुनवाई टलने के बाद अगले हफ्ते ध्रुव मेहता (Dhruv Mehta) अपनी दलीलें आगे बढ़ाएंगे।
शिवसेना पार्टी-चुनाव चिन्ह मामला : सुप्रीम कोर्ट 30 अक्टूबर को फैसले का मुहूर्त टला!
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