मुंबई : नाशिक (Nashik) की पावन भूमि पर आयोजित सिंहस्थ कुंभ (Simhastha Kumbh) पर्व के धर्मध्वजारोहण समारोह के अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू (Droupadi Murmu) ने गोदावरी (Godavari) नदी के तट पर देश और दुनिया को एकता, आस्था और पर्यावरण संरक्षण का अनूठा संदेश दिया है। राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में कहा कि यह ऐतिहासिक आयोजन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति के शाश्वत मूल्यों, सामाजिक समरसता और आधुनिकता के समन्वय का एक जीवंत प्रतीक है। गोदाघाट पर आयोजित भव्य महागोदा आरती के दौरान राष्ट्रपति ने गोदावरी नदी का पूजन कर राष्ट्र की सुख-समृद्धि की कामना की।
1,400 वर्षों की आस्था की विरासत और आधुनिकता का नया अध्याय
भारत में धार्मिक और आध्यात्मिक आयोजनों की प्राचीन परंपरा रही है, जिसका उल्लेख लगभग 1,400 वर्ष पुराने ऐतिहासिक अभिलेखों में भी मिलता है। समय और पीढ़ियों के बदलने के बावजूद देशवासियों के मन में आस्था का प्रवाह निरंतर और अटूट बना हुआ है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू (Droupadi Murmu) ने विश्वास व्यक्त किया कि आगामी नाशिक-त्र्यंबकेश्वर (Nashik-Trimbakeshwar) सिंहस्थ कुंभ (Simhastha Kumbh) पर्व में स्वच्छता, प्रभावी कचरा प्रबंधन और आधुनिकता का समावेश कर एक नया राष्ट्रीय आदर्श स्थापित किया जाएगा। इस अवसर पर राष्ट्रपति ने महाराष्ट्र (Maharashtra) की ऐतिहासिक, क्रांतिकारी और सामाजिक भूमि को नमन करते हुए साल्हेर किले (Salher Fort), स्वातंत्र्यवीर सावरकर ( स्वातंत्र्यवीर सावरकर – Swatantryaveer Savarkar), चाफेकर बंधु (Chapekar Brothers) और महात्मा ज्योतिराव फुले (Mahatma Jyotirao Phule) के योगदान का स्मरण किया।
सूखाग्रस्त किसानों को सहायता और पर्यावरण संरक्षण
राज्य में सूखे की गंभीर स्थिति का संवेदनशीलता से उल्लेख करते हुए राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि संकट की इस घड़ी में केंद्र और राज्य सरकार अन्नदाता किसानों के साथ पूरी मजबूती से खड़ी हैं। सूखाग्रस्त किसानों के सम्मान और स्वाभिमान को सुरक्षित रखते हुए उन्हें हरसंभव आवश्यक सहायता प्रदान की जाएगी। इसके साथ ही, सिंहस्थ कुंभ (Simhastha Kumbh) के इस महाआयोजन में नदियों, जलस्रोतों और प्राकृतिक संपदा का संरक्षण करने तथा पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करने का विशेष आह्वान किया गया। समारोह के दौरान आदिवासी बहुल क्षेत्रों से हजारों जनजातीय समुदाय के सदस्यों की सहभागिता ने भारतीय संस्कृति की विविधता में एकता के दर्शन कराए।
विकास कार्यों से नाशिक-त्र्यंबकेश्वर को मिलेगी वैश्विक पहचान
राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा (Governor Jishnu Dev Varma) ने अपने संबोधन में गोदामाई की कृपा से महाराष्ट्र (Maharashtra) पर छाया सूखे का संकट दूर होने और राज्य के सुजलाम्-सुफलाम् बनने की कामना की। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Chief Minister Devendra Fadnavis) ने घोषणा की कि आगामी सिंहस्थ कुंभ (Simhastha Kumbh) पर्व को भव्य और दिव्य बनाते हुए नाशिक (Nashik) और त्र्यंबकेश्वर (Trimbakeshwar) क्षेत्र का संपूर्ण कायाकल्प किया जाएगा। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे (Deputy Chief Minister Eknath Shinde) ने जानकारी दी कि क्षेत्र में लगभग 35 हजार करोड़ रुपये के विकास कार्य किए जा रहे हैं, जिससे इस ऐतिहासिक आयोजन में आने वाले अनुमानित 12 करोड़ श्रद्धालुओं को विश्वस्तरीय सुविधाएं मिल सकेंगी। इस गरिमामयी समारोह में राष्ट्रपति महोदया के करकमलों द्वारा सिंहस्थ कुंभ मेले के आधिकारिक गीत, वेबसाइट और विशेष डाक टिकटों का विमोचन भी संपन्न हुआ।
