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दीपावली पर बन रहा है कई दुर्लभ और शुभ योगों का अद्भुत संयोग!

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चमकेगी मां लक्ष्मी के भक्तों की कीस्मत
मुंबई. हिंदू पंचांग के अनुसार, हर साल कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को दीपों का यह महापर्व पर्व मनाया जाता है। इस वर्ष दीपावली का पर्व 8 नवंबर 2026, रविवार को मनाया जा रहा है। इस दिन घरों में मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की विधि-विधान से पूजा की जाती है। इस साल दिवाली पर शुक्रादित्य और बुधादित्य योग का खास संयोग बनेगा। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, इन शुभ योगों से मेष समेत 4 राशि वालों को करियर, नौकरी और कारोबार में लाभ मिल सकता है। इस खास अवसर पर स्वाति नक्षत्र के साथ आयुष्मान और सौभाग्य योग का संयोग भी रहेगा। शुक्रादित्य योग तुला राशि में सूर्य और शुक्र की युति से तो वहीं सूर्य और बुध की युति से बुधादित्य योग का निर्माण होगा। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, ग्रहों का यह खास संयोग कई वर्षों बाद बन रहा है। इसका प्रभाव कुछ राशि वालों के लिए विशेष रूप से शुभ रह सकता है। इन जातकों को करियर में बड़ी सफलता, नौकरी के नए अवसर और धन-धान्य की प्राप्ति हो सकती है। ऐसे में आइए जानते हैं कि दिवाली पर किन राशि वालों के लिए यह समय खास रहने वाला है।
इसलिए खास हैं ये शुभ संयोग

  • बुधादित्य राजयोग: सूर्य और बुध की युति से तुला राशि में बुधादित्य राजयोग का निर्माण हो रहा है, जो बुद्धि, मान-सम्मान और कारोबार में वृद्धि का कारक माना जाता है।
  • शुक्रादित्य योग: सूर्य और शुक्र की युति से तुला राशि में शुक्रादित्य योग बन रहा है।
  • अमावस्या योग: सूर्य और चंद्रमा की युति से तुला राशि में अमावस्या योग बन रहा है, जो मां लक्ष्मी की आराधना के लिए अत्यंत फलदायी है।
  • अमृत सिद्धि योग और लक्ष्मी नारायण योग: पंचांग के अनुसार इस दिन अमृत सिद्धि योग तथा लक्ष्मी नारायण योग का भी संयोग है, जिससे जीवन में सुख, संपन्नता और सौभाग्य प्राप्त होता है।
  • अन्य योग: इस दिन त्रिग्रह योग, चतुर्ग्रही योग, षष्ठ ग्रह योग, साथ ही स्वाति नक्षत्र के साथ आयुष्मान और सौभाग्य योग का भी सुंदर मेल रहेगा।
    ऐसे करें लक्ष्मी-गणेश की पूजा
    दीपावली का त्योहार मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। इस दिन विधि-विधान से पूजा करने पर सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। आइए जानते हैं दिवाली की संपूर्ण पूजा विधि, मंत्र और शुभ दिशा।
    पूजा विधि
  1. चौकी सजाकर करें कलश स्थापना
    दिवाली की पूजा शुरू करने से पहले एक साफ चौकी लें और उस पर लाल या पीले रंग का स्वच्छ कपड़ा बिछाएं। इसके सामने दीवार पर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की तस्वीर लगाएं या चौकी पर उनकी प्रतिमाएं स्थापित करें। इसके बाद पूजा स्थल पर कलश स्थापित करें और एक लोटे या कलश में शुद्ध जल भरें। उसमें सुपारी, सिक्का, फूल, अक्षत और हल्दी डालें। अब कलश के मुंह पर आम के पांच पत्ते लगाएं। एक नारियल पर तिलक करके उस पर कलावा बांधें और उसे कलश के ऊपर रख दें।
  2. मां लक्ष्मी के लिए बनाएं अष्टदल कमल
    मां लक्ष्मी को कमल का पुष्प विशेष प्रिय माना जाता है। इसलिए पूजा की चौकी पर चावल की सहायता से अष्टदल कमल की आकृति बना सकते हैं। यदि आपके पास पूजन के लिए कमल का फूल उपलब्ध है, तो चावल से अष्टदल कमल बनाने की आवश्यकता नहीं है।
  3. लक्ष्मी-गणेश और कुबेर देव को करें स्थापित
    अब चौकी पर चावल के छोटे-छोटे आसन बनाकर भगवान गणेश, मां लक्ष्मी और कुबेर देव की प्रतिमाएं या तस्वीरें स्थापित करें। अब मां लक्ष्मी के पास सुपारी को भगवान विष्णु का प्रतीक मानकर रखें।
    इसके साथ ही धनतेरस पर खरीदी गई सोने-चांदी की वस्तुएं और नए बर्तन भी पूजा स्थल पर रखें। यदि इस साल आपने कोई नई वस्तु नहीं खरीदी है, तो घर में पहले से मौजूद सोने-चांदी के आभूषण और बर्तनों को भी पूजन में शामिल कर सकते हैं। इनके साथ कुछ रुपये भी रखें। इस तरह पूजा की चौकी तैयार हो जाएगी।
  4. देवी-देवताओं को स्नान और वस्त्र अर्पित करें
    पूजा के दौरान फूलों की सहायता से देवी-देवताओं पर जल के छींटे डालकर प्रतीकात्मक स्नान कराएं। इसके बाद सरसों के तेल का एक बड़ा दीपक प्रज्वलित करें। कई परिवारों में इस दीपक को पूरी रात जलाए रखने की परंपरा है। अब हाथ जोड़कर मां लक्ष्मी से प्रार्थना करें कि वे आपकी पूजा स्वीकार करें और परिवार पर अपनी कृपा बनाए रखें।
  5. तिलक, जनेऊ और चुनरी करें अर्पित
    भगवान गणेश और विष्णु जी को वस्त्र के प्रतीक के रूप में जनेऊ और मौली अर्पित करें। मां लक्ष्मी को लाल रंग की चुनरी चढ़ाएं। इसके बाद सभी देवी-देवताओं को रोली या कुमकुम से तिलक लगाएं और तिलक के ऊपर अक्षत चढ़ाएं। अब उन्हें ताजे फूल अर्पित करें। मां लक्ष्मी को कमल का पुष्प और श्रृंगार की सामग्री चढ़ाना भी शुभ माना जाता है।
  6. मां लक्ष्मी को अर्पित करें प्रिय पूजन सामग्री
    मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने के लिए पूजा में कमल गट्टा, गोमती चक्र, सुपारी, कौड़ी और हल्दी की गांठ अर्पित कर सकते हैं। इसके बाद देवी को सप्तधान यानी सात प्रकार के अनाज चढ़ाएं। इसमें गेहूं, चावल, धनिया, धान, पीली सरसों, काली उड़द और मूंग की दाल शामिल हैं।
  7. भोग और दक्षिणा चढ़ाएं
    अब मां लक्ष्मी को भोग लगाने की तैयारी करें। पान के पत्ते पर खील-बताशे रखकर देवी को अर्पित करें। इसके अलावा पांच प्रकार के मौसमी फल और पंचमेवा का भोग लगाएं। पूजा में एक लोटा शुद्ध जल भी रखें। अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार देवी-देवताओं के समक्ष दक्षिणा अर्पित करें।
  8. व्रत कथा सुनें और करें आरती
    यदि आपने दीपावली का व्रत रखा है, तो पूजा के दौरान लक्ष्मी जी की व्रत कथा या दीपावली से जुड़ी धार्मिक कथा का श्रवण करें। इसके बाद दो घी के दीपक और अन्य सरसों के तेल के दीपक प्रज्वलित करें। परंपरा के अनुसार मां लक्ष्मी को धान अर्पित करें। अंत में भगवान गणेश और माता लक्ष्मी की आरती करें। परिवार के सभी सदस्यों को आरती और प्रसाद वितरित करें। इस तरह आपकी दीपावली की पूजा संपन्न हो जाएगी।
    दिवाली पूजा मंत्रः
  9. गणेश जी बीज मंत्र ॐ गं गणपतये नमः ॥
  10. गणेश वंदना मंत्र वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा ॥
  11. माता लक्ष्मी बीज मंत्र ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः ॥
  12. महालक्ष्मी मंत्र नमस्तेस्तु महामाये श्रीपीठे सुरपूजिते। शङ्खचक्रगदाहस्ते महालक्ष्मि नमोऽस्तुते ॥
    दिवाली की पूजा किस दिशा में करनी चाहिए?
    वास्तु शास्त्र के अनुसार, दीपावली पर पूजा के लिए उत्तर दिशा को शुभ माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि उत्तर दिशा धन और कुबेर देव से संबंधित है। यदि किसी कारणवश इस दिशा में पूजा करना संभव न हो, तो दक्षिण दिशा को छोड़कर घर की किसी अन्य सुविधाजनक दिशा में भी पूजा स्थल बनाया जा सकता है। पूजा करते समय स्वच्छता, श्रद्धा और एकाग्रता का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
    दीपावली और लक्ष्मी पूजन से जुड़ी मुख्य कथाएं
  13. समुद्र मंथन की कथा
    पौराणिक कथाओं के अनुसार, कार्तिक मास की अमावस्या के दिन समुद्र मंथन के दौरान क्षीरसागर से मां लक्ष्मी का प्राकट्य हुआ था। मां लक्ष्मी के प्रकट होने से चारों ओर सुख-समृद्धि और आनंद फैल गया। इसीलिए दीपावली की रात मां लक्ष्मी का विधि-विधान से पूजन किया जाता है ताकि घर में हमेशा धन-धान्य और समृद्धि बनी रहे।
  14. भगवान श्री राम की अयोध्या वापसी
    एक अन्य प्रसिद्ध कथा के अनुसार, मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम 14 वर्ष का वनवास पूरा करके और असुर रावण का वध करके माता सीता व लक्ष्मण के साथ अयोध्या लौटे थे। उनके स्वागत में अयोध्यावासियों ने पूरी नगरी को घी के दीयों से जगमगा दिया था। इस विजय और प्रकाश पर्व की खुशी में हर वर्ष कार्तिक अमावस्या पर दीप जलाए जाते हैं और लक्ष्मी-गणेश का पूजन किया जाता है।
  15. साहूकार की बेटी और मां लक्ष्मी की कथा (दीपावली पूजन कथा)
    एक नगर में एक साहूकार रहता था, जिसकी बेटी रोज पीपल के पेड़ पर जल चढ़ाने जाती थी। उस पीपल के पेड़ पर मां लक्ष्मी का वास था। एक दिन मां लक्ष्मी ने प्रकट होकर साहूकार की बेटी से मित्रता की और उसे अपने घर दावत पर बुलाया। मां लक्ष्मी के आशीर्वाद से साहूकार के जीवन से गरीबी दूर हो गई और उसके घर में अपार धन-संपत्ति व सुख-शांति आ गई। तभी से मां लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए यह पूजन परंपरा चली आ रही है।
  16. भगवान श्री कृष्ण और नरकासुर वध
    पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण ने अत्याचारी राक्षस नरकासुर का वध किया था। इस दुष्ट के अंत से लोगों को भय और पीड़ा से मुक्ति मिली, जिसके उपलक्ष्य में दीपक जलाकर खुशियां मनाई गईं।
    लक्ष्मी और गणेश पूजन का साथ में महत्व
    दीपावली पर माता लक्ष्मी के साथ भगवान गणेश की पूजा भी की जाती है। कथाओं के अनुसार, गणेश जी को बुद्धि और विवेक का देवता माना जाता है। धन के साथ यदि विवेक न हो, तो वह टिकता नहीं है; इसलिए धन (लक्ष्मी) के साथ बुद्धि (गणेश) की आराधना की जाती है।
    राशि अनुसार करें ये खास उपाय
    धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, दिवाली की रात राशि के अनुरूप कुछ विशेष उपाय करने से जीवन में सुख-समृद्धि और सकारात्मकता का संचार हो सकता है। आइए जानते हैं कि सभी 12 राशियों के जातक दिवाली पर कौन-से उपाय कर सकते हैं और उनके लिए कौन-सा मंत्र शुभ माना जाता है।
  1. मेष राशि (Aries)
    मेष राशि के जातक दिवाली की रात हनुमान मंदिर में चमेली के तेल का दीपक जलाएं। साथ ही मां लक्ष्मी को लाल गुलाब अर्पित करें। मान्यता है कि इससे साहस बढ़ाने और आर्थिक उन्नति की कामना पूरी करने में सहायता मिलती है।
    मंत्र: ॐ ह्रीं श्रीं नमः
  2. वृषभ राशि (Taurus)
    वृषभ राशि का स्वामी शुक्र है। इस राशि के जातक आर्थिक मजबूती और भौतिक सुखों की प्राप्ति के लिए मां लक्ष्मी को सफेद कमल अर्पित करें। इसके साथ श्री सूक्त का पाठ करना भी शुभ माना जाता है।
    मंत्र: ॐ ऐं श्रीं नमः
  3. मिथुन राशि (Gemini)
    मिथुन राशि के जातक दिवाली पर भगवान गणेश को दूर्वा और हरी इलायची चढ़ाएं। इसके अलावा जरूरतमंद लोगों को हरी वस्तुओं का दान करें। इसे व्यापार और नौकरी में आने वाली रुकावटें दूर करने का उपाय माना जाता है।
    मंत्र: ॐ श्रीं क्लीं नमः
  4. कर्क राशि (Cancer)
    धन संचय और मानसिक शांति की कामना के लिए कर्क राशि के जातक चांदी के पात्र में कच्चा दूध और चावल रखकर मां लक्ष्मी के चरणों में अर्पित करें।
    मंत्र: ॐ ह्रीं नमः
  5. सिंह राशि (Leo)
    सिंह राशि के जातक दिवाली के दिन तांबे के लोटे से सूर्य देव को जल चढ़ाएं। शाम को घर के मुख्य द्वार पर दीपक जलाएं और जरूरतमंदों को मिठाई बांटें। इससे मान-सम्मान और कार्यक्षेत्र में सफलता की कामना की जाती है।
    मंत्र: ॐ ह्रीं सूर्याय नमः
  6. कन्या राशि (Virgo)
    नौकरी और कारोबार में तरक्की की इच्छा रखने वाले कन्या राशि के जातक कमलगट्टे की माला से मां लक्ष्मी के बीज मंत्र का जाप करें। साथ ही मंदिर में हरी मूंग की दाल का दान करें।
    मंत्र: ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः
  7. तुला राशि (Libra)
    तुला राशि के जातक मां लक्ष्मी को इत्र और सफेद मिठाई अर्पित करें। घर की उत्तर दिशा को साफ-सुथरा रखकर वहां दीपक जलाएं। मान्यता है कि इससे धन और ऐश्वर्य की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है।
    मंत्र: ॐ श्रीं कमले नमः
  8. वृश्चिक राशि (Scorpio)
    वृश्चिक राशि के जातक दिवाली की रात हनुमान चालीसा का पाठ करें और मां लक्ष्मी को लाल गुड़हल के फूल चढ़ाएं। इसे करियर की बाधाएं दूर करने और भाग्य मजबूत बनाने से जोड़कर देखा जाता है।
    मंत्र: ॐ ह्रीं क्लीं नमः
  9. धनु राशि (Sagittarius)
    धनु राशि के जातक भगवान विष्णु के मंदिर में पीले वस्त्र या हल्दी की गांठ का दान करें। इसके अलावा पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाना भी शुभ माना जाता है। इससे ज्ञान और कार्यक्षेत्र में प्रगति की कामना की जाती है।
    मंत्र: ॐ शं शनैश्चराय नमः
  10. मकर राशि (Capricorn)
    मकर राशि के जातक दिवाली पर काले कुत्ते को मीठी रोटी खिलाएं और शनि मंदिर में सरसों के तेल का दीपक जलाएं। मान्यता है कि इन उपायों से नौकरी और कारोबार में स्थिरता आती है।
    मंत्र: ॐ श्रीं क्लीं नमः
  11. कुंभ राशि (Aquarius)
    कुंभ राशि के जातक पीपल के पेड़ की जड़ में जल अर्पित करें और शाम को जरूरतमंदों को अनाज दान करें। इसे कर्ज से राहत और आमदनी के नए अवसरों की कामना से जोड़ा जाता है।
    मंत्र: ॐ ऐं श्रीं नमः
  12. मीन राशि (Pisces)
    मीन राशि के जातक दिवाली पर भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी को केसर वाली खीर का भोग लगाएं। इसके बाद जरूरतमंद लोगों को पीले रंग की वस्तुओं का दान करें। इससे धन-धान्य और करियर में उन्नति की कामना की जाती है।
    मंत्र: ॐ श्रीं पद्मायै नमः
    पूजन का शुभ मुहूर्त
    मुंबई में 8 नवंबर 2026 (कल) को लक्ष्मी-गणेश पूजन का शुभ मुहूर्त शाम 6:27 बजे से रात 8:27 बजे तक (कुल अवधि 2 घंटे) रहेगा।
    विस्तृत जानकारी के अनुसार:
  • शुभ मुहूर्त: शाम 6:27 PM से रात 8:27 PM
  • प्रदोष काल: शाम 6:02 PM से रात 8:34 PM
  • वृषभ लग्न (स्थिर लग्न): शाम 6:28 PM से रात 8:28 PM
  • डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए ‘तह की बात’ उत्तरदायी नहीं है।
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