‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट-2026’ में महिला समृद्धि का संकल्प
नई दिल्ली: आज के तेजी से बदलते तकनीकी युग में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) सिर्फ एक तकनीकी उपकरण नहीं, बल्कि शिक्षा, प्रशासन और उद्योग जगत का केंद्र बिंदु बन गया है। राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया रहाटकर ने कहा कि यदि महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण को एआई से जोड़ा जाए, तो उनका सतत विकास संभव है। उन्होंने महिलाओं से एआई तकनीक की केवल उपयोगकर्ता न बनकर, शोधकर्ता और निर्माता बनने का आह्वान किया।
एआई साक्षरता और डिजिटल सुरक्षा पर जोर
दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट’ के तहत ‘एआई और आर्थिक शक्ति – महिला नेतृत्व में समृद्धि की रूपरेखा’ विषय पर विशेष सत्र आयोजित किया गया। इसकी मेजबानी राष्ट्रीय महिला आयोग, अंतर्राष्ट्रीय दूरसंचार संघ (आईटीयू) और संयुक्त राष्ट्र प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्था (यूनिटार) ने संयुक्त रूप से की। श्रीमती रहाटकर ने कहा कि महिलाओं को एआई साक्षरता की आवश्यकता है, जिसमें डेटा संरक्षण, डिजिटल नैतिकता और साइबर सुरक्षा की गहरी समझ शामिल होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि केवल घोषणाओं से काम नहीं चलेगा, बल्कि सूक्ष्म और लघु उद्योगों को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला से जोड़ने के लिए ठोस प्रयास करने होंगे।
डिजिटल खतरे और प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी
सत्र में सूचना एवं जनसंपर्क महानिदेशालय के प्रधान सचिव ब्रिजेश सिंह ने महिलाओं पर बढ़ते डिजिटल खतरों पर चिंता जताई। उन्होंने बताया कि वर्तमान एआई सिस्टम मुख्य रूप से पुरुष-प्रधान डेटा पर आधारित हैं, जिसमें संवेदनशीलता और समानता का अभाव है। चौंकाने वाले आंकड़ों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि डीपफेक तकनीक के 91 प्रतिशत शिकार महिलाएं हैं। उन्होंने सोशल मीडिया कंपनियों से ‘सेफ हार्बर’ नियमों के पीछे छिपने के बजाय जिम्मेदारी लेने और एआई-जनित सामग्री पर वॉटरमार्क अनिवार्य करने की मांग की।
महिला सशक्तिकरण के लिए वैश्विक सहयोग
यूनिटार की निदेशिका मिहोको कुमामोटो ने क्षमता निर्माण और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग पर जोर दिया। उन्होंने विश्वास जताया कि भारत सरकार के सहयोग से चलाए जाने वाले कार्यक्रम वैश्विक दक्षिण (ग्लोबल साउथ) के देशों के लिए मिसाल बनेंगे। आईटीयू की क्षेत्रीय निदेशिका अत्सुको ओकुदा ने दूसरे और तीसरे दर्जे के शहरों में डिजिटल असमानता को कम करने की आवश्यकता पर बल दिया। वहीं, संगीत निर्माता कार्तिक शाह ने कहा कि एआई रचनात्मक क्षेत्रों में महिलाओं के लिए नई संभावनाएं लेकर आया है। सत्र की शुरुआत एआई-आधारित लघु फिल्म से हुई, जिसमें महिला सशक्तिकरण के विभिन्न आयामों को दर्शाया गया।

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