महाराष्ट्र को मिलेगा 10 टीएमसी पानी
नई दिल्ली. केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की उपस्थिति में दिल्ली में हुई एक महत्वपूर्ण बैठक के दौरान नर्मदा परियोजना का 20 साल पुराना विवाद सुलझ गया है. इस ऐतिहासिक फैसले के बाद अब महाराष्ट्र को उसके हिस्से का 10 टीएमसी पानी मिलने का रास्ता साफ हो गया है. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस बैठक की सफलता की जानकारी देते हुए बताया कि इससे राज्य के बकाये की बड़ी रकम भी माफ हो गई है.
मुख्यमंत्री फडणवीस के अनुसार, परियोजना पूरी होने के बाद महाराष्ट्र को केवल बिजली मिल रही थी, पानी नहीं. अब तय समझौते के तहत महाराष्ट्र कुल 10 टीएमसी पानी में से 5 टीएमसी पानी नर्मदा-तापी डायवर्जन स्कीम से लेगा. इसके साथ ही शेष 5 टीएमसी पानी उकाई बांध से उठाने पर भी सहमति बन गई है. गुजरात सरकार ने बारिश के दिनों में उकाई बांध से पानी देने पर अनुकूलता जताई है, जिससे उत्तर महाराष्ट्र के जिलों को सिंचाई और पेयजल का बड़ा लाभ मिलेगा.
करोड़ों का बकाया हुआ माफ
सहकारी संघवाद के इस बेहतरीन उदाहरण के चलते महाराष्ट्र पर इस परियोजना से जुड़ा जो करीब 3,000 करोड़ रुपए का बकाया निकाला गया था, वह अब पूरी तरह खत्म हो गया है. नए निर्णय के तहत राज्य को अब केवल 27 करोड़ रुपये का भुगतान करना होगा.
कुसुम योजना में मिला सर्वाधिक फंड
दिल्ली दौरे के दौरान केंद्रीय ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद जोशी के साथ हुई बैठक में भी महाराष्ट्र को बड़ी कामयाबी मिली. केंद्र सरकार ने पीएम-कुसुम योजना के तहत देश के कुल बजट का 51 प्रतिशत हिस्सा अकेले महाराष्ट्र को दिया है. इसके अलावा प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना में भी राज्य को आगे बढ़ने के लिए नया लक्ष्य दिया गया है.

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