मुंबई. अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सचिव और तेलंगाना के सह-प्रभारी सचिन सावंत ने स्पष्ट किया है कि आगामी मुंबई महानगरपालिका चुनाव में पार्टी विकास को सर्वोपरि मानते हुए समविचारी दलों के साथ स्वतंत्र रूप से गठबंधन करके चुनाव लड़ेगी. उन्होंने जोर देकर कहा कि मुंबई के भविष्य के लिए समझौते के बजाय विकास और नफरत के बजाय सर्वसमावेशी सहकार आवश्यक है, जिसे मानवीय चेहरे के साथ लागू किया जाएगा.
राजीव गांधी भवन में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में सावंत ने बीजेपी और मनसे की विभाजनकारी राजनीति को मुंबई के लिए घातक बताया और स्पष्ट किया कि कांग्रेस अपनी संविधानवादी, लोकतंत्र और सर्वधर्म समभाव की मूल विचारधारा से कोई समझौता नहीं करेगी. उन्होंने कहा कि आज देश में दो विचारधाराओं का संघर्ष स्पष्ट है: राहुल गांधी के नेतृत्व वाली कांग्रेस जो एकता-अखंडता पर टिकी है और भाजपा-आरएसएस जो सत्ता के लिए धर्म और जाति में फूट डालकर नफरत फैलाती है. कांग्रेस की सकारात्मक विचारधारा को हर बूथ तक पहुंचाने के लिए पार्टी का स्वतंत्र रूप से लड़ना आवश्यक है.
ध्रुवीकरण और हिंसा अस्वीकार्य
सावंत ने भाजपा पर मुंबई में धार्मिक ध्रुवीकरण कर राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि भाजपा नेताओं के भड़काऊ बयान जैसे “मुंबई में मुसलमान मेयर बनेगा” या “मस्जिदों में घुसेंगे” शहर के सामाजिक माहौल को जहरीला बना रहे हैं. उन्होंने चेतावनी दी कि इस प्रदूषित वातावरण के कारण उद्योग मुंबई से बाहर जा रहे हैं. इसी तरह, उन्होंने मनसे की नफरत और हिंसा की राजनीति का भी कड़ा विरोध किया. उन्होंने कहा कि मराठी गौरव के नाम पर मनसे द्वारा फैलाई जाने वाली नफरत, हिंसा और डर – जैसे टैक्सी चालकों या परप्रांतीय परीक्षार्थियों पर हमले, मुंबई के बहुसांस्कृतिक सद्भाव को बिगाड़ते हैं. राज ठाकरे के “पत्थर को पत्थर, तलवार को तलवार” जैसे भड़काऊ बयान मुंबई के सहिष्णु माहौल के लिए पूरी तरह से अस्वीकार्य हैं, जिसे कांग्रेस स्पष्ट रूप से खारिज करती है। सावंत ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस मुंबई के वास्तविक और जमीनी मुद्दों को केंद्र में रखकर चुनाव लड़ेगी. धर्म, भाषा या जाति के नाम पर राजनीति करने वाले दलों को इन समस्याओं से कोई सरोकार नहीं है.
पार्टी की प्राथमिकताएं हैं
मूलभूत सुविधाएं: गड्ढा मुक्त सड़कें, स्वच्छ जल, कचरा प्रबंधन और बाढ़ का स्थायी समाधान.
सामाजिक न्याय: परवडने योग्य घर, गुणवत्तापूर्ण बीएमसी स्कूल और उत्तम स्वास्थ्य सेवाएं.
पारदर्शिता: भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन और ठेकेदारों-बिल्डरों के भ्रष्ट गठजोड़ से मुक्ति.
पर्यावरण: प्रदूषण मुक्त, सुरक्षित और हरी-भरी मुंबई.
सावंत ने यह भी बताया कि मुंबई भाषा, धर्म और जाति की दीवारों को लांघकर खड़ी हुई है और शांति एवं सामाजिक सौहार्द निवेश तथा रोजगार के लिए अनिवार्य है. उन्होंने कहा कि परप्रांतीयों की आलोचना करते समय अक्सर अपने ही महाराष्ट्र के लोगों को निशाना बनाया जाता है. कांग्रेस ने स्वतंत्र रूप से लड़कर, मुंबई के संसाधनों को विशेष लोगों के हाथों में बिकने से रोकने और विकास को एक मानवीय चेहरा देने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई.
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