मुंबई. महानगर की झुग्गी-झोपड़ियों और उपेक्षित बस्तियों में स्वच्छता क्रांति का नया अध्याय लिखा जा रहा है. ‘सुविधा केंद्र’ परियोजना ने न केवल शहर को चकाचक बनाया है, बल्कि लाखों लोगों के जीवन में स्वच्छता, स्वास्थ्य और सम्मान का नया अर्थ भी जोड़ा है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस अनूठी पहल की जमकर सराहना करते हुए इसे पूरे शहरी महाराष्ट्र के लिए आदर्श मॉडल बताया है।
स्वच्छ महाराष्ट्र अभियान को नई ऊंचाई
मुख्यमंत्री फडणवीस की संकल्पना से शुरू हुआ स्वच्छ महाराष्ट्र अभियान अब मुंबई महानगर क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री के आह्वान पर देश की प्रमुख कंपनियां और सामाजिक संस्थाएं इस मुहिम से जुड़ रही हैं। हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड, एचएसबीसी और जेएसडब्ल्यू फाउंडेशन जैसी संस्थाओं ने बृहन्मुंबई महानगरपालिका के साथ मिलकर इस परियोजना को जमीन पर उतारा है।
23 केंद्रों ने बदली मुंबई की तस्वीर
वर्तमान में मुंबई में 23 सुविधा केंद्र पूरी तरह से चालू हो चुके हैं और 24वां केंद्र जल्द ही खुलने वाला है। दो और केंद्रों का निर्माण कार्य जोरों पर है, जबकि सात केंद्रों के प्रस्ताव प्रगतिपथ पर हैं। इस तरह आने वाले समय में कुल 33 सुविधा केंद्र मुंबई को और अधिक स्वच्छ और स्वस्थ बनाने की दिशा में काम करेंगे।
5.5 लाख लोगों की जिंदगी में आया बदलाव
यह परियोजना महज आंकड़ों की कहानी नहीं है, बल्कि लाखों लोगों की बदलती जिंदगियों की दास्तान है। अब तक 5.5 लाख नागरिकों को सुविधा केंद्रों का प्रत्यक्ष लाभ मिला है। इन केंद्रों में सुरक्षित शौचालय, स्नानगृह और अन्य स्वच्छता सुविधाएं उपलब्ध हैं। साथ ही, 7.5 लाख नागरिकों को स्वच्छता के बारे में विशेष शिक्षा प्रदान की गई है, जिससे उनकी सोच और आदतों में सकारात्मक परिवर्तन आया है।
महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान को प्राथमिकता
झुग्गी-झोपड़ी क्षेत्रों में रहने वाली महिलाओं के लिए ये केंद्र वरदान साबित हुए हैं। सुविधा केंद्रों में महिलाओं की सुरक्षा और गोपनीयता का विशेष ध्यान रखा गया है। अलग से महिला शौचालय, पर्याप्त रोशनी, साफ-सफाई और सुरक्षित वातावरण ने महिलाओं को सम्मानपूर्वक इन सुविधाओं का उपयोग करने का अवसर दिया है। बच्चों के लिए स्वच्छ और सुरक्षित स्थान तथा दिव्यांगों के लिए विशेष रूप से डिजाइन की गई सुलभ संरचना इन केंद्रों को वाकई में जन-अनुकूल बनाती है।
300 महिलाओं ने संभाली जिम्मेदारी
इस परियोजना में महिला सशक्तिकरण का अद्भुत उदाहरण देखने को मिला है। 300 स्थानीय महिलाओं को विशेष प्रशिक्षण देकर व्यवहार परिवर्तन अभियान चलाने की जिम्मेदारी सौंपी गई। इन महिलाओं ने घर-घर जाकर, चौपालों में और सामुदायिक कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को स्वच्छता का महत्व समझाया। उनकी मेहनत का ही नतीजा है कि 7.5 लाख लोगों तक स्वच्छता की शिक्षा पहुंची और समुदाय में स्वच्छता के प्रति जागरूकता का स्तर काफी बढ़ा।
स्वास्थ्य में आया 50% सुधार
सुविधा केंद्रों का सबसे बड़ा प्रभाव सार्वजनिक स्वास्थ्य पर पड़ा है। झुग्गी-झोपड़ी क्षेत्रों में जहां पहले दूषित पानी और अस्वच्छता के कारण गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल बीमारियां, डायरिया और मूत्र मार्ग के संक्रमण आम थे, वहां अब इन बीमारियों में 50 प्रतिशत की भारी कमी दर्ज की गई है। यह स्वास्थ्य सुधार न केवल लोगों के जीवन की गुणवत्ता बढ़ा रहा है, बल्कि उनके चिकित्सा खर्च में भी कमी ला रहा है।
CM फडणवीस की प्रशंसा
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस परियोजना की विशेष समीक्षा करते हुए कहा, “मुंबई जैसे विशाल जनसंख्या वाले महानगर में ‘सुविधा केंद्र’ मॉडल ने सार्वजनिक-निजी भागीदारी के माध्यम से शानदार काम का उदाहरण प्रस्तुत किया है। ये केंद्र शहर की स्वास्थ्य सुरक्षा में अमूल्य योगदान दे रहे हैं।”
उन्होंने आगे कहा, “इन सुविधा केंद्रों में उत्कृष्ट सुविधाएं, लोगों की सक्रिय भागीदारी, व्यवहार परिवर्तन, आर्थिक और पर्यावरणीय स्थिरता तथा कुशल प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया गया है। यह सब अत्यंत सराहनीय है और यह परियोजना पूरे शहरी महाराष्ट्र के लिए आदर्श बन सकती है।”
मुख्यमंत्री ने मुंबई महानगर क्षेत्र में और अधिक सुविधा केंद्र स्थापित करने के निर्देश भी दिए हैं ताकि स्वच्छता की यह मुहिम और तेज हो सके।
पर्यावरण के अनुकूल अनूठा मॉडल
सुविधा केंद्र सिर्फ स्वच्छता केंद्र नहीं हैं, बल्कि ये पर्यावरण संरक्षण के उत्कृष्ट उदाहरण भी हैं। इन केंद्रों में जल-बचत की आधुनिक तकनीक का उपयोग किया गया है, जिससे पानी की खपत में काफी कमी आई है। ऊर्जा दक्षता के लिए सोलर पैनल और एलईडी लाइट्स का इस्तेमाल किया गया है। कचरे के समुचित प्रबंधन से पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचता। इस तरह ये केंद्र टिकाऊ विकास का बेहतरीन नमूना प्रस्तुत करते हैं।
9 महीने में आत्मनिर्भर बनते हैं केंद्र
इस परियोजना की सबसे बड़ी खासियत इसका आर्थिक मॉडल है। सुविधा केंद्र शुरू होने के केवल 9 महीने के भीतर ही अपना संचालन खर्च स्वयं वहन करने लगते हैं। मुंबई के सभी 23 केंद्र आज पूरी तरह से आत्मनिर्भर और स्व-टिकाऊ हैं। केंद्रों का रखरखाव, कर्मचारियों का वेतन और अन्य खर्च उपयोगकर्ताओं से मिलने वाले मामूली शुल्क से ही पूरा हो जाता है। यह मॉडल साबित करता है कि सामाजिक परियोजनाएं भी आर्थिक रूप से व्यवहार्य हो सकती हैं।
सार्वजनिक-निजी भागीदारी का सफल प्रयोग
यह परियोजना इस बात का जीता-जागता सबूत है कि जब सरकार और निजी क्षेत्र मिलकर काम करते हैं तो कितने बड़े बदलाव लाए जा सकते हैं। बृहन्मुंबई महानगरपालिका ने जमीन और प्रशासनिक सहयोग दिया, जबकि हिंदुस्तान यूनिलीवर, एचएसबीसी और जेएसडब्ल्यू फाउंडेशन ने वित्तीय संसाधन, तकनीकी विशेषज्ञता और प्रबंधन कौशल उपलब्ध कराया। इस सहयोग का परिणाम आज सबके सामने है।
भविष्य की महत्वाकांक्षी योजनाएं
आने वाले वर्षों में इस परियोजना का और विस्तार होगा। वर्तमान में निर्माणाधीन और प्रस्तावित केंद्रों के अलावा, मुंबई के अन्य इलाकों में भी नए सुविधा केंद्र खोले जाएंगे। मुख्यमंत्री की दूरदर्शी सोच के तहत इस मॉडल को मुंबई से बाहर महाराष्ट्र के अन्य शहरों में भी लागू करने की योजना है। पुणे, नागपुर, नासिक और अन्य बड़े शहरों में भी इसी तर्ज पर सुविधा केंद्र स्थापित किए जा सकते हैं।
समाज में आया व्यवहारिक बदलाव
इस परियोजना की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि लोगों की सोच और व्यवहार में बुनियादी बदलाव आया है। पहले जहां स्वच्छता को लेकर लापरवाही बरती जाती थी, वहां अब लोग जागरूक हो गए हैं। बच्चों को बचपन से ही स्वच्छता की आदतें सिखाई जा रही हैं। हाथ धोने, साफ पानी पीने और शौचालय का उपयोग करने जैसी बुनियादी आदतों में सुधार आया है। यह बदलाव ही दीर्घकालिक स्वास्थ्य सुधार की नींव है।
आम लोगों की प्रतिक्रिया
सुविधा केंद्रों का उपयोग करने वाले लोगों ने इसे जीवन बदलने वाला अनुभव बताया है। धारावी की रहने वाली एक महिला ने कहा, “पहले हमें बहुत मुश्किलों का सामना करना पड़ता था। अब यहां साफ-सुथरा और सुरक्षित शौचालय है। हम सम्मान के साथ इसका उपयोग कर सकते हैं।” एक युवक ने बताया, “हमारे इलाके में बीमारियां काफी कम हो गई हैं। बच्चे पहले अक्सर बीमार पड़ते थे, अब वे स्वस्थ रहते हैं।”
शहरी स्वच्छता का नया मानक
‘सुविधा केंद्र’ परियोजना ने शहरी स्वच्छता के क्षेत्र में एक नया मानक स्थापित किया है। यह दिखाता है कि उचित योजना, सही क्रियान्वयन और सामुदायिक भागीदारी के साथ किसी भी बड़ी चुनौती से निपटा जा सकता है। मुंबई का यह प्रयोग न केवल महाराष्ट्र बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणादायक है। मुख्यमंत्री फडणवीस के नेतृत्व में स्वच्छ महाराष्ट्र अभियान अब एक सफल जनआंदोलन का रूप ले चुका है। सुविधा केंद्रों ने साबित कर दिया है कि जब इच्छाशक्ति हो, तो मुंबई जैसे विशाल महानगर को भी चकाचक और स्वस्थ बनाया जा सकता है।
मुख्य बिंदु:
23 केंद्र चालू, 24वां जल्द शुरू होगा
5.5 लाख लोगों को प्रत्यक्ष लाभ
7.5 लाख लोगों को स्वच्छता शिक्षा
बीमारियों में 50% की कमी
300 प्रशिक्षित महिलाएं अभियान में सक्रिय
9 महीने में आत्मनिर्भर बनते हैं केंद्र
पर्यावरण के अनुकूल तकनीक
सार्वजनिक-निजी भागीदारी का सफल मॉडल
