डीसीएम शिंदे का डबल धक्कातंत्र
मुंबई. महाराष्ट्र विधान परिषद के उप सभापति पद के चुनाव से पहले उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने बड़ा राजनीतिक दांव चलते हुए ठाकरे गुट के विधान परिषद सदस्य सचिन अहीर को अपनी शिवसेना में शामिल कर उन्हें उप सभापति पद का उम्मीदवार बना दिया है. महायुति सरकार में यह पद शिवसेना के हिस्से में आया है. पूर्व उप सभापति नीलम गोर्हे का कार्यकाल समाप्त होने के बाद यह पद रिक्त था. अहीर की उम्मीदवारी को शिंदे का “डबल धक्कातंत्र” माना जा रहा है, क्योंकि इससे ठाकरे गुट को विधान परिषद के साथ-साथ वर्ली की राजनीति में भी बड़ा झटका लगा है.
उप सभापति पद पर शिंदे का बड़ा दांव
विधान परिषद के सभापति राम शिंदे ने 1 जुलाई को उप सभापति पद का चुनाव घोषित किया है. लंबे समय से नीलम गोर्हे, कृपाल तुमाने, मनीषा कायंदे और चंद्रकांत रघुवंशी के नाम चर्चा में थे, लेकिन अंतिम समय में शिंदे ने सचिन अहीर को उम्मीदवार बनाकर सभी को चौंका दिया. अहीर ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की मौजूदगी में नामांकन दाखिल किया.
आदित्य ठाकरे के गढ़ में बढ़ी चुनौती
सचिन अहीर को आदित्य ठाकरे का करीबी माना जाता रहा है. वह पहले वर्ली से तीन बार विधायक रह चुके हैं और 2019 में आदित्य ठाकरे के लिए यह सीट छोड़ दी थी. अब उनके शिंदे गुट में जाने से वर्ली में राजनीतिक समीकरण बदलने की संभावना बढ़ गई है. राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि 2029 के विधानसभा चुनाव में शिंदे अहीर को वर्ली से उतारकर आदित्य ठाकरे के सामने चुनौती खड़ी कर सकते हैं.
ऑफर के बाद बदला राजनीतिक फैसला
सूत्रों के अनुसार, पिछले कुछ दिनों से शिंदे गुट की ओर से अहीर को शामिल होने का प्रस्ताव दिया गया था. उन्हें उप सभापति पद का उम्मीदवार बनाने का आश्वासन मिलने के बाद उन्होंने शिंदे शिवसेना में शामिल होने का फैसला किया. सांसद संजय दीना पाटिल के शिंदे गुट में आने के बाद यह प्रक्रिया तेज हुई बताई जा रही है.
ठाकरे गुट को संगठनात्मक झटका
सचिन अहीर का प्रभाव वर्ली, परेल, लालबाग और दक्षिण-मध्य मुंबई के साथ श्रमिक संगठनों में भी माना जाता है. उनके जाने से ठाकरे गुट को केवल एक विधान परिषद सदस्य का ही नहीं, बल्कि संगठनात्मक स्तर पर भी बड़ा नुकसान माना जा रहा है. वहीं, शिंदे गुट इसे “ऑपरेशन टाइगर” के अगले चरण के रूप में देख रहा है, जिसके जरिए ठाकरे गुट की राजनीतिक ताकत को लगातार चुनौती दी जा रही है.

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