मुंबई: राज्य के स्कूलों को लेकर एक महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। जल्द ही सभी स्कूलों में छात्रों की एक ही दिन प्रत्यक्ष जाँच (फिजिकल वेरिफिकेशन) की जाएगी। यदि इस विशेष टीम को कहीं भी छात्रों को गलत तरीके से दाखिल किया गया, नाम बढ़ाए गए, या छात्रों की उपस्थिति में कोई गड़बड़ी मिली, तो संबंधित लोगों पर सीधे कार्रवाई होगी। प्राथमिक शिक्षा निदेशक शरद गोसावी और माध्यमिक शिक्षा निदेशक डॉ. महेश पालकर ने यह चेतावनी दी है।
इस वर्ष से क्या बदलेगा?
शैक्षणिक वर्ष 2025-26 से स्कूलों की मंजूरी (संचमान्यता) यू-डायस प्लस (U-DISE+) प्रणाली में भरी गई जानकारी के आधार पर दी जाएगी। प्रधानाध्यापकों ने अपने लॉगिन से छात्रों की जानकारी इस प्रणाली में भर दी है, और यही जानकारी अगली प्रक्रिया के लिए उपयोग की जाएगी। इस जानकारी की पुष्टि करने और यह जांचने की जिम्मेदारी कि यह सही है या नहीं, केंद्र प्रमुख और समूह शिक्षा अधिकारी की है। यह जांच कब शुरू होगी, इस बारे में अभी तक स्पष्ट जानकारी नहीं मिली है।
क्या जांच की जाएगी?
केंद्र प्रमुख और समूह शिक्षा अधिकारी की जिम्मेदारी है कि वे यह सुनिश्चित करें कि स्कूलों द्वारा दी गई जानकारी 100% सही है।
केंद्र प्रमुख स्कूलों का प्रत्यक्ष दौरा करेंगे और उस दिन की छात्रों की उपस्थिति देखेंगे।
छात्रों के रोजाना हाजिरी रिकॉर्ड की जांच की जाएगी।
परीक्षा के दिन उपस्थित छात्रों की संख्या कितनी थी?
इसके अलावा, स्कूल के पिछले दौरे की उपस्थिति भी देखी जाएगी। जिन छात्रों के नाम फर्जी हैं या जो लगातार अनुपस्थित रहते हैं, उन्हें केंद्र प्रमुख स्वयं प्रणाली से हटा सकेंगे।
गलती पाए जाने पर सीधी कार्रवाई की जाएगी।
निम्नलिखित बातें पाई गईं तो कार्रवाई:
फर्जी नाम दाखिल किए गए हों।
छात्रों की स्कूल में अनियमितता हो।
जानबूझकर छात्रों की संख्या बढ़ाकर दिखाई गई हो।
या कर्मचारी लगातार अनुपस्थित हों तो प्रधानाध्यापक, केंद्र प्रमुख, विस्तार अधिकारी, समूह शिक्षा अधिकारी पर जिम्मेदारी तय कर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
शिक्षक या गैर-शिक्षण कर्मचारी अनुपस्थित पाए जाने पर निलंबन (सस्पेंशन) की भी चेतावनी दी गई है।

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