मुंबई : वट सावित्री पूर्णिमा का व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखता है। इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, उत्तम स्वास्थ्य और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के साथ व्रत रखकर वट वृक्ष की पूजा करती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह व्रत अखंड सौभाग्य, पारिवारिक सुख-शांति और दांपत्य जीवन की मजबूती का प्रतीक माना जाता है।
वट पूर्णिमा व्रत 2026 की तिथि और शुभ मुहूर्त
वर्ष 2026 में वट पूर्णिमा व्रत 29 जून, सोमवार को मनाया जाएगा। पूर्णिमा तिथि 29 जून को सुबह 3:06 बजे शुरू होकर 30 जून को सुबह 5:26 बजे समाप्त होगी। पूजा के लिए अभिजीत मुहूर्त दोपहर 11:57 बजे से 12:52 बजे तक रहेगा, जबकि अमृत काल रात 8:53 बजे से 10:40 बजे तक होगा।
सावित्री-सत्यवान की कथा से जुड़ा है महत्व
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, सती सावित्री ने बरगद के वृक्ष के नीचे अपने दृढ़ संकल्प, तप और बुद्धिमत्ता से यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस प्राप्त किए थे। इसी कारण वट वृक्ष की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। शास्त्रों में वट वृक्ष को ब्रह्मा, विष्णु और महेश का निवास स्थान बताया गया है तथा इसकी दीर्घायु को अखंड सौभाग्य और स्थिर दांपत्य जीवन का प्रतीक माना जाता है।
इस प्रकार करें पूजन
प्रातः स्नान कर स्वच्छ या नए वस्त्र धारण करें और सोलह श्रृंगार के बाद व्रत का संकल्प लें। पूजा की थाली में रोली, कुमकुम, हल्दी, अक्षत, फल, फूल, भीगे चने, कलावा, मिठाई या हलवा-पूरी रखें। इसके बाद वट वृक्ष की जड़ में जल अर्पित करें, दीपक जलाएं और हल्दी-कुमकुम चढ़ाएं। फिर कच्चे सूत या कलावे से वट वृक्ष की 7 या 11 परिक्रमा करें। अंत में सावित्री-सत्यवान की कथा सुनें या पढ़ें, आरती करें और बड़ों का आशीर्वाद प्राप्त करें।
पूजा सामग्री पहले से रखें तैयार
पूजा के लिए सावित्री-सत्यवान की प्रतिमा या चित्र, दो बांस की टोकरियां, थाली, सुहाग सामग्री, लाल कपड़ा, सिंदूर, रोली, बांस का पंखा, कच्चा सूत, जल से भरा कलश, भीगे चने, बरगद का फल, मौसमी फल, घी की पूड़ियां, मिठाई, बताशे, फूल, दूर्वा, पान, सुपारी, पानी वाला नारियल, दीपक, घी, धूपबत्ती, इत्र, अक्षत और दक्षिणा की व्यवस्था पहले से कर लेना शुभ माना जाता है। विशेष रूप से बांस का पंखा और भीगे चने इस पूजा में महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
अस्वीकरण: यह लेख धार्मिक मान्यताओं और प्रचलित कथाओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत किया गया है। इसकी सत्यता का स्वतंत्र वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है। धर्म, ज्योतिष, स्वास्थ्य या अन्य विषयों से जुड़े किसी भी निर्णय या प्रयोग से पहले संबंधित विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें तथा अंतिम निर्णय स्वविवेक के आधार पर ही लें।

