Hindi News / Featured / Maharashtra

आज होगी बप्पा की विदाई : अगले बरस फिर आने की प्रार्थना के साथ करें प्रतिमा का विसर्जन

Article Top Ad

मुंबई. दस दिनों तक चलने वाला मुंबई सहित महाराष्ट्र का सबसे बड़ा पर्व गणेश चतुर्थी (Ganesh Chaturthi) आज बप्पा की विदाई के साथ समाप्त हो जाएगा। उल्लेखनीय यह है कि तिथियों के खेल के कारण इस बार भक्त जन 12 वें दिन बप्पा की मूर्ति का विसर्जन करेंगे।
धूमधाम से घर आए भगवान गणेश (Lord Ganesha) को 12 दिनों तक पूजा-अर्चना और भक्ति के साथ विराजमान रखने के बाद अब 25 सितंबर 2026 को अनंत चतुर्दशी (Anant Chaturdashi) के अवसर पर गणेशोत्सव (Ganeshotsav) का समापन होगा। भक्त पूजा और आरती के बाद बप्पा को भावुक विदाई देंगे और अगले वर्ष फिर घर आने की प्रार्थना करेंगे। गणेश विसर्जन (Ganesh Visarjan) केवल प्रतिमा को जल में प्रवाहित करने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि श्रद्धा, कृतज्ञता और पुनः आगमन की कामना से जुड़ी परंपरा है।
महाभारत से भी जुड़ा है गणपति का संबंध
भगवान गणेश का संबंध महाभारत (Mahabharata) से भी बताया जाता है। धार्मिक परंपरा के अनुसार महर्षि वेदव्यास (Maharishi Ved Vyasa) ने महाभारत की रचना करते समय गणेश जी को उसका लेखन करने के लिए कहा था। मान्यता है कि गणेश जी ने यह शर्त रखी कि वे लगातार लिखेंगे और व्यास जी को बिना रुके श्लोक बोलने होंगे। व्यास जी ने भी शर्त रखी कि गणेश प्रत्येक श्लोक का अर्थ समझने के बाद ही उसे लिखेंगे। धार्मिक व्याख्या यह है कि गणेश जी ने महर्षि वेदव्यास से महाभारत का ज्ञान सुनकर उसे लिखित रूप दिया। लेकिन धैर्य और एकाग्रता से अनंत चतुर्दशी के दिन कार्य पूर्ण करने के दौरान गणेश जी के इर्द-गिर्द उत्पन्न हुई ऊर्जा को शांत करने के लिए महर्षि वेद व्यास ने गणेश जी को स्नान कराया था। मान्यता है कि इसीलिए गणेश प्रतिमा के विसर्जन की प्रथा शुरू हुई है।
ऐसा होगा गणेश चतुर्थी का पंचांग
25 सितंबर को चतुर्दशी
पंचांग की दी गई जानकारी के अनुसार चतुर्दशी तिथि 24 सितंबर की रात 11:18 बजे से शुरू होकर 25 सितंबर की रात 11:06 बजे तक रहेगी। उदयातिथि के आधार पर 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी और गणेश विसर्जन किया जाएगा।
पूजा और विसर्जन के लिए दिए गए प्रमुख शुभ समय इस प्रकार हैं। सुबह का मुहूर्त 6:28 से 10:59 बजे तक, दोपहर का शुभ मुहूर्त 12:30 से 2:01 बजे तक, शाम का चर मुहूर्त 5:02 से 6:32 बजे तक और रात का लाभ मुहूर्त 9:31 से 11:01 बजे तक है। इसके अलावा 26 सितंबर को रात 12:30 से सुबह 4:59 बजे तक का समय भी दिया गया है।
पूजा से पहले रखें ये सामान
विसर्जन से पहले पूजा स्थल साफ करें और दीपक, धूप, फूल, दूर्वा, आरती की थाली तथा प्रसाद तैयार रखें। गणेश जी को मोदक, लड्डू या घर में बना कोई भी मीठा प्रसाद अर्पित किया जा सकता है। प्रतिमा को ले जाने के लिए साफ थाली या चौकी भी तैयार रखें।
ऐसे दें बप्पा को विदाई
सबसे पहले पूजा स्थल पर दीप और धूप जलाकर भगवान गणेश की पूजा करें। फूल, दूर्वा और भोग अर्पित करने के बाद परिवार के सभी सदस्य मिलकर आरती करें। इसके बाद हाथ जोड़कर बप्पा को घर आने और पूजा स्वीकार करने के लिए धन्यवाद दें। अनजाने में हुई किसी भूल के लिए क्षमा मांगते हुए परिवार के सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें और अगले वर्ष फिर आने का निमंत्रण दें।
इसके बाद प्रतिमा के आसपास की सजावट, कपड़े और प्लास्टिक की सामग्री अलग कर दें। प्रतिमा को साफ थाली या चौकी पर सावधानी से रखें। परिवार के सदस्य ‘गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ’ का जयघोष करते हुए प्रतिमा को विसर्जन स्थल तक ले जा सकते हैं।
घर पर भी कर सकते हैं विसर्जन
छोटी और प्राकृतिक मिट्टी की गणेश प्रतिमा का विसर्जन घर पर भी किया जा सकता है। इसके लिए बड़े पात्र में साफ पानी लेकर प्रतिमा को धीरे से उसमें रखें और उसे प्राकृतिक रूप से घुलने दें। प्रतिमा को तोड़ने या दबाकर घोलने की जरूरत नहीं है। मिट्टी पूरी तरह बैठने के बाद उसे पौधे या गमले की मिट्टी में मिलाया जा सकता है।
हालांकि घर के मंदिर में स्थायी रूप से रखी जाने वाली गणेश प्रतिमा का विसर्जन नहीं किया जाता। विसर्जन उस प्रतिमा का होता है जिसे गणेशोत्सव के लिए अस्थायी रूप से स्थापित किया गया हो।
मुंबई में राहुकाल
25 सितंबर को मुंबई (Mumbai) में दिए गए पंचांग के अनुसार राहुकाल सुबह 11:00 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक रहेगा। इस अवधि में पूजा और विसर्जन नहीं करने की धार्मिक मान्यता है। अन्य शहरों में राहुकाल का समय अलग है, इसलिए स्थानीय पंचांग के अनुसार समय देखना उचित रहेगा।
विसर्जन के समय मंत्र
विदाई के समय भक्त गणेश जी से पुनः आने की प्रार्थना करते हुए इन मंत्रों का जाप कर सकते हैं।
‘ॐ यान्तु देवगणा: सर्वे पूजामादाय मामकीम्। इष्टकामसमृद्धयर्थं पुनर्अपि पुनरागमनाय च॥’
‘गच्छ गच्छ सुरश्रेष्ठ स्वस्थाने परमेश्वर। मम पूजा गृहीत्मेवां पुनरागमनाय च॥’
विसर्जन के बाद प्रसाद बांटें और पूजा सामग्री को व्यवस्थित तरीके से अलग करें। फूल और सजावट को जल में प्रवाहित करने के बजाय उचित तरीके से निस्तारित करें। प्रतिमा के रंग और सामग्री की जानकारी के अनुसार विसर्जन का तरीका चुनना पर्यावरण की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है।
धार्मिक मुहूर्त, मंत्र और विसर्जन की विधियां धार्मिक आस्था तथा प्रचलित परंपराओं पर आधारित हैं। इनके संबंध में अलग-अलग पंचांग और परंपराओं में अंतर हो सकता है।

Article Inline Ad
Article Bottom Ad