जानें अनंत सूत्र बांधने की विधि
मुंबई. सनातन धर्म में अनंत चतुर्दशी (Anant Chaturdashi) को भगवान विष्णु (Lord Vishnu) के अनंत स्वरूप की आराधना और सुख-समृद्धि की कामना से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है। भाद्रपद शुक्ल चतुर्दशी को मनाए जाने वाले इस पर्व पर श्रद्धालु व्रत रखते हैं, भगवान विष्णु की पूजा करते हैं और 14 गांठों वाला अनंत सूत्र धारण करते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार अनंत सूत्र श्रद्धा, संकल्प और भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप का प्रतीक है।
25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी
पंचांग के अनुसार चतुर्दशी तिथि 24 सितंबर की रात 11 बजकर 18 मिनट से शुरू होकर 25 सितंबर की रात 11 बजकर 06 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि के अनुसार अनंत चतुर्दशी का व्रत 25 सितंबर, शुक्रवार को रखा जाएगा। इसी दिन भगवान विष्णु की पूजा के बाद अनंत सूत्र धारण करने की परंपरा है। इस व्रत को महिला और पुरुष दोनों कर सकते हैं।
ऐसे करें भगवान विष्णु की पूजा
सुबह स्नान कर स्वच्छ कपड़े पहनने के बाद भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें। पूजा स्थल की सफाई कर लकड़ी की चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं। चौकी पर कलश स्थापित कर भगवान लक्ष्मी-नारायण (Lakshmi-Narayan) की प्रतिमा रखें। कलश पर अष्टदल बनाकर फूल अर्पित करें। इसके बाद धूप, दीप, रोली, चंदन, फल और फूल से भगवान विष्णु की पूजा करें। घी का दीपक जलाना शुभ माना जाता है। पूजा के बाद भगवान को भोग लगाकर अनंत चतुर्दशी की व्रत कथा का श्रवण करें।
14 गांठों वाले अनंत सूत्र का महत्व
अनंत चतुर्दशी की पूजा में अनंत सूत्र का विशेष महत्व है। कुशा या रेशमी धागे में हल्दी-कुमकुम लगाकर इसमें 14 गांठें लगाई जाती हैं। पूजा से पहले इसे भगवान विष्णु को अर्पित किया जाता है और पूजा के बाद मंत्र का जाप करते हुए धारण किया जाता है। धार्मिक मान्यता में इन 14 गांठों को 14 लोकों का प्रतीक माना जाता है। इन्हें भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप से भी जोड़ा जाता है।
किस हाथ में बांधते हैं सूत्र?
परंपरा के अनुसार पुरुष अनंत सूत्र दाहिने हाथ में और महिलाएं बाएं हाथ में धारण करती हैं। कई परिवारों में घर के बड़े सदस्य या पुरोहित द्वारा यह सूत्र बांधने की परंपरा है। सूत्र बांधते समय श्रद्धालु भगवान विष्णु से सुख, शांति और परिवार की समृद्धि की कामना करते हैं।
कितने दिन रखें अनंत सूत्र?
अनंत सूत्र को कितने समय तक धारण करना है, इसे लेकर अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में अलग परंपराएं हैं। कुछ लोग इसे लंबे समय तक बांधकर रखते हैं, जबकि कुछ परंपराओं में निर्धारित अवधि के बाद विधि के अनुसार इसे उतारकर सुरक्षित स्थान पर रखने की मान्यता है। इसलिए स्थानीय और पारिवारिक परंपरा के अनुसार इसका पालन किया जाता है।
धार्मिक मान्यता: अनंत चतुर्दशी पर व्रत और पूजा करने से सुख-शांति तथा समृद्धि की प्राप्ति होती है और मनोकामनाएं पूर्ण होने की मान्यता है। ये धार्मिक मान्यताएं आस्था पर आधारित हैं।
अनंत चतुर्दशी 2026: विष्णु पूजा से मिलेगा सुख-समृद्धि का वरदान
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